सेक्टर-9 अस्पताल को लेकर बढ़ती आशंका, प्रबंधन से पारदर्शिता की मांग। अस्पताल बचाने की आवश्यकता पर दिया जोर।
- हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) ने मुद्दा उठाया।
सूचनाजी न्यूज़, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) द्वारा जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र अर्थात सेक्टर-9 स्पताल के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। वर्तमान समय में संयंत्र कर्मियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा आम नागरिकों के बीच यह आशंका लगातार बढ़ रही है कि अस्पताल के संचालन अथवा प्रबंधन को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इसी संदर्भ में सीटू ने औद्योगिक संबंध विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक राहुल थोटे के माध्यम से कार्यपालक निदेशक मानव संसाधन को पत्र एवं उसकी प्रतिलिपि डायरेक्टर इंचार्ज को सौंप कर मांग की है कि अस्पताल से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाकर विस्तृत चर्चा की जाए तथा प्रबंधन अपनी वास्तविक योजना सार्वजनिक करे।
कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों एवं आम जनता पर पड़ सकता है विपरीत प्रभाव
यूनियन महासचिव टी जोगराव ने कहा कि सेक्टर-9 अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि लाखों लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार है। इस अस्पताल से भिलाई इस्पात संयंत्र के नियमित कर्मचारी, ठेका श्रमिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके परिवार तथा आसपास के आम नागरिक प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
वर्तमान में अस्पताल अपेक्षाकृत सस्ती एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराता है। यदि इसे निजी हाथों में सौंपा जाता है, तो उपचार महंगा होने, व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता मिलने तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग के लोगों की पहुंच सीमित होने जैसी गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हो सकती हैं। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा भावना कमजोर होगी तथा व्यापक असंतोष की स्थिति भी पैदा हो सकती है।
ये है सेक्टर-9 अस्पताल के वास्तविक स्टेकहोल्डर
सीटू ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेक्टर-9 अस्पताल केवल प्रबंधन की प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह श्रमिकों के लंबे योगदान, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं जनविश्वास से निर्मित संस्था है। इसके वास्तविक स्टेकहोल्डर संयंत्र के कार्यरत कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, उनके आश्रित, ठेका श्रमिक, अस्पताल के डॉक्टर एवं कर्मचारी, विभिन्न ट्रेड यूनियन, सामाजिक संगठन, स्थानीय नागरिक तथा जनप्रतिनिधि हैं। इसलिए अस्पताल के भविष्य से संबंधित किसी भी निर्णय में इन सभी पक्षों की राय एवं सहभागिता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
स्टेकहोल्डर्स से चर्चा किए बिना निजीकरण पर निर्णय लेना उचित नहीं
सहायक महासचिव जेपी त्रिवेदी का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण सार्वजनिक एवं औद्योगिक अस्पताल के संबंध में यदि बिना व्यापक चर्चा एवं सहमति के निजीकरण जैसा निर्णय लिया जाता है, तो यह पारदर्शिता एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत माना जाएगा।
अस्पताल केवल भवन और संसाधनों का नाम नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा, भावनाओं और सामाजिक भरोसे से जुड़ा विषय है। इसलिए प्रबंधन को चाहिए कि वह पूर्व मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों, प्रतिनिधि यूनियनों, सेवानिवृत्त कर्मियों के प्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विस्तृत चर्चा करे सभी की राय ले और तथ्यात्मक स्थिति सार्वजनिक करे, ताकि किसी प्रकार की भ्रांतियां एवं आशंकाएं समाप्त हो सकें।
अस्पताल बचाने एवं मजबूत बनाने हेतु सामूहिक पहल आवश्यक
सीटू अध्यक्ष विजय जांगड़े का मानना है कि संवाद, पारदर्शिता एवं सामूहिक भागीदारी के माध्यम से ही सेक्टर-9 अस्पताल को मजबूत बनाया जा सकता है। यदि प्रबंधन वास्तव में अस्पताल के भविष्य को लेकर गंभीर है, तो निजीकरण को अंतिम विकल्प बनाने के बजाय अस्पताल को आधुनिक, आत्मनिर्भर एवं बेहतर चिकित्सा सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
सेक्टर-9 अस्पताल भिलाई की सामाजिक पहचान तथा श्रमिकों की सुरक्षा का प्रतीक है, इसलिए इसके भविष्य पर निर्णय लेते समय जनभावना, सामाजिक दायित्व एवं कर्मचारियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यूनियन ने प्रबंधन से मांग की है कि अस्पताल के संबंध में किसी भी निर्णय से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ विस्तृत चर्चा आयोजित की जाए तथा ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे अस्पताल के सार्वजनिक स्वरूप एवं कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

