शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम अंततः कर्मचारियों की मेहनत की कमाई पर पड़ेगा। सीटू देशव्यापी आंदोलन चलाने जा रही।
- ईपीएफ और अन्य बाजार आधारित निवेशों पर बढ़ती निर्भरता भविष्य निधि जैसी सुरक्षित सामाजिक सुरक्षा योजना की मूल भावना के विपरीत है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन-ईपीएफओ को लेकर बड़ी खबर है। ईपीएफ पर 8.25% ब्याज देकर कर्मचारी विरोधी फैसलों को छिपाने की कोशिश का आरोप कर्मचारी यूनयिन ने लगाया है। छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों को माफी और कानून तोड़ने वालों को पुरस्कार देने की बात सीटू ने कहा है।
भलाई सीटू का मानना है कि 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखना कर्मचारियों का अधिकार है, कोई विशेष उपहार नहीं। सरकार इस घोषणा को बड़ी उपलब्धि बताकर उन नीतिगत बदलावों से ध्यान हटाना चाहती है जो भविष्य में कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की पूरी व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। वास्तविक चिंता ब्याज दर नहीं, बल्कि ईपीएफ की संरचना में किए जा रहे बदलाव हैं।
सामाजिक सुरक्षा संहिता के नाम पर श्रमिक अधिकारों पर हमला
ईपीएफ योजना-2026, ईपीएस-2026 और ईडीएलआई-2026 को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अनुरूप लागू करने की तैयारी कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह आशंका है कि भविष्य में सरकार नियमों में संशोधन कर नियोक्ताओं की जिम्मेदारी कम कर सकती है, कर्मचारियों के अधिकार सीमित किए जा सकते हैं तथा सामाजिक सुरक्षा को चरणबद्ध तरीके से कमजोर किया जा सकता है। सीटू का स्पष्ट मत है कि श्रमिकों के दशकों के संघर्ष से प्राप्त अधिकारों को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।
छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों को माफी, कानून तोड़ने वालों को पुरस्कार
सरकार ने छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के लिए एमनेस्टी योजना लाकर ब्याज, हर्जाना और दंड में राहत देने का निर्णय लिया है। सीटू इसे ईमानदार संस्थानों और कर्मचारियों के साथ अन्याय मानता है। यदि किसी प्रतिष्ठान ने वर्षों तक कानून का पालन नहीं किया, तो उसे दंडित करने के बजाय माफी देना गलत संदेश देता है। इससे भविष्य में नियमों का उल्लंघन बढ़ेगा और कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार खतरे में पड़ेंगे।
ईपीएफ को निवेश आधारित व्यवस्था बनाना जोखिमपूर्ण
ईपीएफ और अन्य बाजार आधारित निवेशों पर बढ़ती निर्भरता भविष्य निधि जैसी सुरक्षित सामाजिक सुरक्षा योजना की मूल भावना के विपरीत है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम अंततः कर्मचारियों की मेहनत की कमाई पर पड़ेगा। सीटू का मानना है कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति निधि को बाजार के जोखिमों के हवाले नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को सुरक्षित और गारंटीकृत प्रतिफल सुनिश्चित करना चाहिए।
छोटे खातों के स्वतः निपटान से बड़े मुद्दों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता
1,000 रुपये तक के निष्क्रिय खातों का स्वतः भुगतान स्वागतयोग्य प्रशासनिक कदम हो सकता है, लेकिन इससे लाखों लंबित दावों, पेंशन संबंधी विवादों, उच्च वेतन पर पेंशन के मामलों तथा कर्मचारियों की अन्य समस्याओं का समाधान नहीं होता। सरकार को प्रचारात्मक घोषणाओं के बजाय पूरी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
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भविष्य में कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा, सीटू करेगी देशव्यापी संघर्ष
सीटू का मानना है कि यदि वर्तमान दिशा में नीतियां लागू होती रहीं तो भविष्य में अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कमजोर होगी, पेंशन लाभ सीमित हो सकते हैं, नियोक्ताओं की जिम्मेदारी कम हो सकती है और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति सुरक्षा बाजार के जोखिमों पर निर्भर होती चली जाएगी। यह केवल वर्तमान कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के श्रमिकों के लिए भी गंभीर खतरा है।
सीटू नेताओं ने कहा कि श्रमिक संगठनों से व्यापक चर्चा किए बिना किसी भी नई ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजना को लागू न किया जाए। कर्मचारी हितों के विरुद्ध लिए गए हर निर्णय का लोकतांत्रिक एवं व्यापक जनसंघर्ष के माध्यम से विरोध किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

