सेक्टर 9 अस्पताल को निजी हाथों में सौंपना समाज के गरीब, श्रमिक, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और आम नागरिकों संग अन्याय होगा।
संयुक्त ट्रेड यूनियन ने कहा-करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति निजी हाथों में सौंपने की साजिश स्वीकार नहीं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। संयुक्त ट्रेड यूनियन ने आरोप लगाया है कि सेक्टर-9 अस्पताल केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि लगभग 64 एकड़ में फैली करोड़ों रुपये मूल्य की राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसे देश के सार्वजनिक क्षेत्र और कर्मचारियों के धन से विकसित किया गया है। इस अमूल्य संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। अस्पताल का निजीकरण करना केवल अस्पताल पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों और आम जनता के स्वास्थ्य अधिकार पर सीधा हमला है। संयुक्त यूनियन ने स्पष्ट किया कि जनता की संपत्ति पर किसी भी प्रकार का निजी कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसी को कहते हैं सार्वजनिक संपत्ति को निजी पूंजीपतियों को लूटाना
संयुक्त यूनियन ने कहा कि पिछले वर्षों में अस्पताल के आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। नई इमारतें, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, उन्नत उपकरण, नई दवा भंडारण व्यवस्था, मरीजों के लिए परिवहन सुविधाओं का विस्तार तथा अन्य आधारभूत ढांचे का विकास किया गया। यदि अस्पताल को निजी हाथों में ही सौंपना था, तो जनता के धन से यह भारी निवेश क्यों किया गया? यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर संकेत करता है कि सार्वजनिक धन से अस्पताल को मजबूत कर अब उसका लाभ निजी कंपनियों को देने की तैयारी की जा रही है।
यह संघर्ष केवल अस्पताल का नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की रक्षा का है
संयुक्त यूनियन ने कहा कि सेक्टर-9 अस्पताल का निजीकरण केवल एक संस्थान का हस्तांतरण नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में खतरनाक कदम है। यदि इसे नहीं रोका गया तो भविष्य में अन्य सार्वजनिक संस्थानों पर भी यही खतरा मंडराएगा। इसलिए कर्मचारी, सेवानिवृत्तजन, उनके परिवार तथा आम जनता को एकजुट होकर इस जनविरोधी निर्णय का संगठित तरीके से विरोध करना होगा, ताकि सार्वजनिक संपत्ति और स्वास्थ्य सेवाओं की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जनऔषधि और मरीज सुविधाएं साबित करती हैं कि अस्पताल जनसेवा का केंद्र है
सेक्टर-9 अस्पताल में मरीजों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए दो जनऔषधि (जेनेरिक मेडिसिन) फार्मेसियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही ओपीडी एवं कैजुअल्टी तक मरीजों को पहुंचाने के लिए परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया गया है। ये सभी कदम इस बात का प्रमाण हैं कि अस्पताल को एक मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे अस्पताल को निजी हाथों में सौंपना समाज के गरीब, श्रमिक, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और आम नागरिकों के हितों के साथ अन्याय होगा।

