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जर्जर BSP क्वार्टरों से बढ़ा जान का खतरा, बाल-बाल बचा कर्मी का परिवार, ऐसे बची जिंदगी

Azmat ali 08/07/2026 1 minute read
Accident at Bhilai Steel Plant Residential Quarters Employees Family Safe

सीटू ने नगर प्रशासन सेवाएं विभाग से चर्चा के लिए समय मांगा है और आशा व्यक्त की है कि प्रबंधन शीघ्र सकारात्मक पहल करेगा।

  • सेक्टर-5 की घटना ने खोल दी प्रबंधन की पोल।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र टाउनशिप के सेक्टर 5 के सड़क-10 स्थित क्वार्टर क्रमांक 5एच में बीती रात बेडरूम की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर जमीन पर गिर पड़ा। सौभाग्य से यूनिवर्सल रेल मिल के प्लानिंग विभाग में कार्यरत कर्मी श्रीकांत का परिवार उस समय ठीक उसी स्थान पर नहीं था, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था।

परिवार में 11 माह का बच्चा है। चिकित्सकीय सलाह के कारण वे पलंग के बजाय जमीन पर सोते थे, लेकिन उस रात बाजार से देर से लौटने के कारण अभी सोए नहीं थे। जिस स्थान पर परिवार रोज सोता था, वहीं भारी प्लास्टर गिरा। दोनों कमरों में लगभग 15 किलो वजनी पंखे जर्जर छत से लटके हुए हैं। जब छत अपना वजन नहीं संभाल पा रही है, तब पंखों का भार कब जानलेवा दुर्घटना में बदल जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है।

खानापूर्ति वाले मरम्मत कार्यों का परिणाम है यह हादसा

सीटू ने घटना की सूचना मिलते ही मौके का निरीक्षण किया। जांच में एक बार फिर स्पष्ट हुआ कि टार फेल्टिंग और मरम्मत कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं। जिस टार फेल्टिंग का दावा किया जाता है, उसकी वास्तविक स्थिति का वीडियो पहले ही सार्वजनिक किया जा चुका है। यह साबित करता है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर गंभीर सवाल हैं। इससे पहले भी इसी भवन के छज्जे गिर चुके हैं, लेकिन स्थायी मरम्मत नहीं की गई। बारिश के मौसम में ऐसे जर्जर आवास हजारों परिवारों के लिए खतरा बने हुए हैं। यदि समय रहते व्यापक कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

जर्जर आवास और प्रबंधन की नीतियां तोड़ रही हैं कर्मचारियों का मनोबल

सीटू का कहना है कि संबंधित कर्मी को यह आवास “सब्जेक्ट टू वेकेशन” नीति के तहत आवंटित किया गया था। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सब्जेक्ट टू वेकेशन के तहत आवंटित होने आवासों में प्रबंधन ना तो मरम्मत कराता है और ना ही आवश्यक रखरखाव करता है। दूसरी ओर, सेवानिवृत्ति के कारण प्रत्येक माह बड़ी संख्या में बेहतर क्वार्टर खाली हो रहे हैं, फिर भी कर्मचारियों को सुरक्षित और रहने योग्य आवास उपलब्ध कराने की कोई प्रभावी योजना दिखाई नहीं देती। अधिकारियों और कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या के कारण कार्यभार पहले ही बढ़ चुका है। ऐसे में असुरक्षित आवास कर्मचारियों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त मानसिक बोझ डाल रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी में संयंत्र के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है। और हैप्पीनेस की धज्जियां उड़ रही है

हेल्प डेस्क, पारदर्शी आवंटन और सुरक्षित आवास समय की मांग

घटना के बाद भयभीत परिवार ने उचित माध्यम से महाप्रबंधक (आवास) को दूसरे आवास के लिए आवेदन भी दे दिया है। सीटू ने मांग की है कि टाउनशिप में तत्काल हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए, जर्जर भवनों का स्वतंत्र तकनीकी सर्वे कराया जाए, सभी खतरनाक आवासों की सूची सार्वजनिक की जाए तथा खाली हो रहे बेहतर क्वार्टरों का पारदर्शी तरीके से प्राथमिकता के आधार पर कर्मचारियों को आवंटन किया जाए। केवल प्लास्टर की पैबंद मरम्मत नहीं, बल्कि आवश्यकता अनुसार संरचनात्मक मरम्मत और पुनर्निर्माण किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बने

सीटू ने नगर प्रशासन सेवाएं विभाग से इन सभी विषयों पर चर्चा के लिए समय मांगा है और आशा व्यक्त की है कि प्रबंधन शीघ्र सकारात्मक पहल करेगा। सीटू का स्पष्ट मत है कि कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मानजनक आवास और बेहतर कार्य वातावरण किसी भी सार्वजनिक उपक्रम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि प्रबंधन वास्तव में युवा कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाना चाहता है, तो उसे जर्जर आवासों की समस्या का स्थायी समाधान करना होगा। खानापूर्ति और कागजी मरम्मत की संस्कृति समाप्त कर पारदर्शी नीति अपनानी होगी। कर्मचारियों के जीवन की सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया या नीति से अधिक महत्वपूर्ण है और इस दिशा में अब तत्काल, ठोस तथा जवाबदेह कार्रवाई की आवश्यकता है।

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