बीएसएल में कर्मचारियों का काला विरोध। BAKS ने कहा-अब आर-पार की लड़ाई। आगे काला झंडा और आमरण अनशन की चेतावनी।
- बीएसएल में 5000 से अधिक कर्मचारियों ने लगाया काला बैज, लंबित मुद्दों पर BAKS का विरोध तेज।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। सेल और बोकारो स्टील प्लांट स्तर के लंबित मुद्दों के विरोध में बीएसएल के 5000 से अधिक गैर-कार्यपालक कर्मचारियों ने काला बैज लगाकर काम किया। बोकारो इस्पात अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS) के आह्वान पर कर्मचारियों ने लगातार दो दिन काला बैज लगाकर प्रबंधन के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया।
यूनियन का कहना है कि सेल कर्मचारियों से जुड़े 45 प्रमुख मुद्दे अब भी लंबित हैं, जबकि बोकारो स्टील प्लांट स्तर पर 60 से अधिक मामले समाधान की प्रतीक्षा में हैं। BAKS के अनुसार, सेल के पांच प्रमुख मुद्दे विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। लंबे समय से समस्याओं का समाधान नहीं होने को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है।
प्लांट से टाउनशिप तक दिखा विरोध
काला बैज आंदोलन में बीएसएल के विभिन्न विभागों में कार्यरत गैर-कार्यपालक कर्मचारियों ने भाग लिया। धमन भट्ठी, कोक ओवन, आरएमएचपी, सिंटर प्लांट, हॉट स्ट्रिप मिल, एसएमएस-2, सीसीएस, यातायात, एचआरसीएफ, सीआरएम-1, 2 और 3, एडीएम, नगर सेवा, बीजीएच, राजीव गांधी अस्पताल, जल प्रबंधन, शॉप्स एंड फाउंड्री, ट्रैफिक, सीईडी, ऊर्जा प्रबंधन, प्लांट डिजाइन, ईडी बिल्डिंग और मानव संसाधन सहित विभिन्न विभागों में कर्मचारी काला बैज लगाए नजर आए।
वेज रिवीजन से यूनियन चुनाव तक मुद्दे
BAKS ने जिन मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू किया है, उनमें वेज रिवीजन, बोनस, इंसेंटिव फॉर्मूले में संशोधन, छुट्टियों में संशोधन, श्रम कानूनों का पालन और यूनियन चुनाव प्रमुख हैं। इसके अलावा बीएसएल स्तर के कई स्थानीय मुद्दों के लंबित रहने का भी यूनियन ने उल्लेख किया है।
यूनियन ने अपने आंदोलन को चार चरणों में आगे बढ़ाने की घोषणा की है। पहले चरण में दो दिवसीय काला बैज आंदोलन किया गया। दूसरे चरण में सभी विभागों के समक्ष सांकेतिक विरोध प्रदर्शन होगा। तीसरे चरण में काले झंडे के साथ मौन जुलूस निकालने की घोषणा की गई है। अंतिम चरण में यूनियन पदाधिकारियों ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
BAKS महासचिव बोले- अब आर-पार की लड़ाई
BAKS बोकारो के महासचिव हरिओम ने कहा, “अब आर-पार की लड़ाई होगी। हमसे ही काम तथा हमारा ही शोषण की नीति नहीं चलेगी। हमारे खून-पसीने से ही कंपनी लाखों करोड़ का व्यापार कर रही है तथा उस लाभ की हिस्सेदारी के नाम पर चूरन की परिपाटी रोकनी ही होगी।”
यूनियन ने लंबित मुद्दों के समाधान की मांग करते हुए आंदोलन के अगले चरणों की तैयारी शुरू कर दी है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रबंधन और यूनियन के बीच लंबित मुद्दों को लेकर आगे क्या बातचीत होती है।



