एबीके मेटल्स एंड इंजीनियरिंग वर्कर्स यूनियन (सीटू) ने उठाया सवाल। चुनाव से पहले वादों का हिसाब मांगना जरूरी।
- बर्नपुर के कर्मचारी 24 सितंबर को मतदान से पहले घोषणापत्र और पिछले कार्यों का स्वयं परीक्षण करें तथा अपने विवेक से निर्णय लें।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। सेल इस्को स्टील प्लांट में 24 सितंबर को मतदान है। 7 यूनियनों के बीच मुकाबला है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसी बीच बीएमएस को घेरने के लिए भिलाई का संकल्प पत्र सामने रख दिया गया है। सीटू ने बीएमएस के वादों पर कटाक्ष किया है। आइएसपी में बीएमएस द्वारा किए जा रहे वादों पर सीटू ने कहा-सेल कर्मचारी बीएमएस के झांसेबाजी से वाकिफ हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र के मान्यता चुनाव के समय बीएमएस अपने संकल्प पत्र में 50 हजार फैस्टिवल एडवांस, 50 ग्राम सोना, टूल डाउन किए युवा साथियों को स्थानांतरित करने पर वापस लाने, S-6 से जूनियर इंजीनियर पदनाम, 39 महीने का एरियर दिलाने का संकल्प लिया था। मान्यता समाप्त हुए भी दो साल बीत चुका है। झांसेबाजी में फंसे बीएसपी कर्मचारी आज भी माथा पीट रहे हैं।
जबकि ट्रिपल इंजन की सरकार होने का दावा किया था
सीटू ने कहा 24 सितंबर का चुनाव केवल मतदान नहीं, बल्कि यूनियन के कामकाज और वादों का हिसाब लेने का अवसर भी है। चुनाव आते-जाते रहेंगे, लेकिन कर्मचारियों के वेतन, रोजगार, सुविधाओं और सम्मान से जुड़े सवाल लगातार बने रहते हैं। इसलिए किसी भी यूनियन के घोषणापत्र और पिछले कार्यकाल के दावों को पढ़कर, उनके क्रियान्वयन की स्थिति को समझना जरूरी है। बर्नपुर में 24 सितंबर 2026 को ट्रेड यूनियन चुनाव निर्धारित है और सात यूनियन चुनाव मैदान में हैं।
भिलाई चुनाव का अनुभव और घोषणाओं को याद रखना होगा जरूरी
31 जुलाई 2022 के भिलाई मान्यता चुनाव में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बीएमएस, इंटक और सीटू प्रमुख दावेदारों में थे। उस समय 39 माह के एरियर सहित वेतन संबंधी मुद्दे प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल थे। एबीके मेटल्स एंड इंजीनियरिंग वर्कर्स यूनियन (सीटू) का सवाल है कि चुनाव के दौरान किए गए वादों का चुनाव के बाद कितना पालन हुआ? कर्मचारियों के सामने यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज भी 39 माह के एरियर सहित अनेक वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर आंदोलन और मांगें जारी हैं। 2024-25 की श्रम मंत्रालय की रिपोर्ट में भी SAIL यूनियनों द्वारा 39 माह के एरियर, HRA, नाइट शिफ्ट अलाउंस, बोनस तथा ठेका श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को उठाए जाने का उल्लेख है।
भिलाई के बीएमएस ‘संकल्प पत्र’ के वादों का क्या हुआ?
भिलाई चुनाव के दौरान बीएमएस से जुड़े चुनावी प्रचार में कर्मचारियों के सामने जिन वादों को रखा गया था, उनमें 39 माह का एरियर, 50 ग्राम सोना, ₹500 नाइट शिफ्ट अलाउंस, ₹50,000 फेस्टिवल एडवांस, S-6 से जूनियर इंजीनियर पदनाम, बीएसपी सिम व ₹15,000 हैंडसेट एडवांस, निजी स्कूलों की फीस में 50% छूट, निलंबित/स्थानांतरित कर्मचारियों की बहाली तथा पांच वर्ष सेवा शेष रहने पर आश्रित को रोजगार दिलाने का प्रयास जैसे मुद्दे बताए गए थे। आज बर्नपुर के कर्मचारियों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। इन वादों में से कितने पूरे हुए, कितने लंबित हैं और किनके लिए वास्तविक संघर्ष किया गया?
चुनावी प्रचार नहीं, संघर्ष और जवाबदेही चाहिए
एबीके मेटल्स एंड इंजीनियरिंग वर्कर्स यूनियन (सीटू) का मानना है कि ट्रेड यूनियन की ताकत केवल चुनाव जीतने में नहीं, बल्कि चुनाव के बाद कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करने में है। वेतन समझौता, एरियर, ठेका श्रमिकों का वेतन, रोजगार सुरक्षा, आउटसोर्सिंग, सुविधाओं और संयंत्र के भविष्य जैसे सवाल किसी एक दिन के चुनावी प्रचार से हल नहीं होंगे। 2024 में भी सेल कर्मचारियों के 39 माह के एरियर और अन्य मांगों को लेकर देशभर की यूनियनों ने संयुक्त आंदोलन किया था उस समय बीएमएस कहा था।
बर्नपुर के कर्मचारी घोषणापत्र और रिकॉर्ड दोनों देखें
सीटू ने कहा-बर्नपुर के साथियों से हमारा आग्रह है कि किसी भी यूनियन के प्रचार दावों को आंख मूंदकर स्वीकार करने के बजाय उसके घोषणापत्र, पिछले कार्यों और वर्तमान मांगों की तुलना करें। सवाल पूछें-क्या वादा किया गया था? क्या पूरा हुआ? जो पूरा नहीं हुआ, उसके लिए क्या संघर्ष हुआ? और आगे उसे पूरा कराने की ठोस कार्ययोजना क्या है?
एबीके मेटल्स एंड इंजीनियरिंग वर्कर्स यूनियन (सीटू) का स्पष्ट मत है कि ट्रेड यूनियन की पहचान चुनावी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष, जवाबदेही और संगठनात्मक सक्रियता से होनी चाहिए। बर्नपुर के कर्मचारी 24 सितंबर को मतदान से पहले घोषणापत्र और पिछले कार्यों का स्वयं परीक्षण करें तथा अपने विवेक से निर्णय लें।



