SAIL Bhilai Steel Plant में बड़ा हादसा, ऑपरेटर की जान बाल-बाल बची, पूरा सिस्टम लगा है मामला छुपाने में…

Accident at SAIL Bhilai Steel Plant Operator Narrowly Escapes Entire System is Working to Hide the Matter
  • 26 फरवरी की आधी रात को कोक ओवन में हुई बड़ी दुर्घटना। ऑपरेटर बाल बाल बचा। फिर लगी एसएमएस 2 जैसी आग।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट से बड़ी खबर है। एसएमएस 2 जैसी घटना कोक ओवन में भी हो गई। किसी तरह ऑपरेटर की जान बाल-बाल बच गई। यह हादसा 26 फरवरी की आधी रात का है। लेकिन, मामले को छुपाने में पूरा सिस्टम जुटा रहा।

कोक ओवन की बैटरी नंबर-5 और 6 के ऊपर चलने वाले चार्जिंग कार में आग लग गई। देखते ही देखते ऑपरेटर का केबिन जल गया। कार को धकेलकर किनारे कर दिया गया है। दूसरे कार से चार्जिंग का काम जारी है। कार में ऑपरेशन के लिए सैकड़ों इलेक्ट्रिक वायर का जाल रहता है, जो पूरी तरह से जलकर नष्ट हो चुका है। अब उसे काट कर अलग किया जा रहा है। फिर से नए इलेक्ट्रिक तार डालने के बाद इसके ऑपरेशन के काम को शुरू किया जा सकेगा। तब तक दूसरे चार्जिंग कार से काम चलता रहेगा। बता दें कि बैटरी नंबर 5 लंबे समय से बंद है।

इसलिए लगी चार्जिंग कार में आग
विभागीय कार्मिक बता रहे हैं कि एक बैटरी में 65 ओवन होते हैं और हर ओवन के ऊपर पुशर साइड में मीडिल में एवं कोक साइड में तीन चार्जिंग होल्स रहते हैं। एक ओवन में 14 से 18 टन कोल चार्ज किया जाता है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में लगभग 17 घंटे तक पका कर कोल को कोक बनाया जाता है।

कोल को चार्ज करने के दौरान कोल को लेवल किया जाता है एवं ओवन के अंदर बनने वाले कोक ओवन गैस को बाहर निकलने का रास्ता बना होता है, जो अत्यधिक ज्वलनशील होता है। कभी-कभी चार्जिंग के समय दोनों साइड से गैस निकलने वाले मार्ग में कोल का हिप बन जाने से गैस निकालने का रास्ता बंद हो जाता है।

ऐसे समय में टॉप के तीनों होल से गैस निकालने की कोशिश करता है। यह गैस ऑक्सीजन के संपर्क में आने से अत्यधिक ज्वलनशील हो जाता है और आग लग जाती है। 26 फरवरी की रात को भी ऐसा ही हुआ। ठीक उसी समय बैटरी का करंट भी ट्रिप हो गया। चार्जिंग कार एक स्थान पर खड़े रह गया और उसमें आग लग गई। आग लगते देख ऑपरेटर तुरंत वहां से हट गया और बाल बाल बच गया।

पूरी तरह से आउटसोर्स है बैटरी क्रमांक 5 एवं 6
भिलाई इस्पात संयंत्र का बुनियाद रखने के समय सबसे पहले संयंत्र में कोक ओवन एवं ब्लास्ट फर्नेस आया। आज धीरे-धीरे सार्वजनिक उद्योग को खत्म करने की नीतियों पर चलकर संयंत्र के एक-एक विभाग को आउटसोर्स किया जा रहा है, जिसके तहत बैटरी क्रमांक 5 और 6 को पूरी तरह से आउटसोर्स कर दिया गया है।

जहां पर सब आउटसोर्सिंग कर्मी कार्य करते हैं। दूसरे बैटरी के बीएसपी कर्मी बताते हैं कि अक्सर इन आउटसोर्स हुए बैटरी में कोई ना कोई समस्या उत्पन्न होती रहती है। इसका काम बीएसपी के अधीन संचालित बैटरी के कर्मियों को करना पड़ता है। अर्थात आउटसोर्सिंग करने के बाद भी बीएसपी को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

बहुत ही अमानवीय परिस्थितियों में करते हैं काम यहां के श्रमिक
कोक ओवन के कामगार बताते हैं कि यहां काम करने वाले श्रमिक बहुत ही अमानवीय परिस्थितियों में काम करते हैं। हमेशा यहां के कर्मी तीन तरह के खतरों से घिरे रहते हैं। कोक ओवन गैस एवं ब्लास्ट फर्नेस गैस तथा गरम कोक ठंडा करने वाला फिनलिक वाटर। यहां काम करने वाले कर्मी कंधे पर बेलचा लेकर कोक ओवन के ओवन टॉप पर इधर-उधर चलते हुए अपना काम करते रहते हैं। इसे देखकर तो आम आदमी लगभग डर ही जाएगा।

कोक ओवन में पूरी जगह स्थाई कर्मी काम करते थे। अब उनके स्थान पर धीरे-धीरे ठेका श्रमिक काम करने लगे हैं। एक तो काम करने की परिस्थितियों की अमानवीयता विद्यमान है, तो दूसरी तरफ पूरा वेतन खाते में डालने के बाद उस वेतन में से एक हिस्सा वापस ले लेने की घटनाएं आम बात है, जो इस अमानवीयता को और ज्यादा बढ़ता है। ठेका श्रमिक द्वारा आवाज उठाने पर उनका गेट पास रख लेना एवं ऑपरेटिंग अथॉरिटी द्वारा उस परिस्थितियों को रोक नहीं पाना यहां की आम बात है।