Bhilai BMS में एक और बगावत, बन रही नई यूनियन, INTUC ने कसा तंज, वंश बहादुर ने तोड़ी चुप्पी, खोले राज़
अब माना जा रहा है कि भिलाई बीएमएस का सियासी वंश बढ़ाने के लिए बहादुर का कद भी आगे बढ़ाया जाएगा। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भारतीय मजदूर संघ-बीएमएस भिलाई में एक बार फिर से बगावत शुरू हो गई है। घोषित रूप से 2 और अघोषित रूप से चौथा गुट अब बनने जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात इंटक के पूर्व महासचिव और एनजेसीएस सदस्य वंश बहादुर सिंह को लेकर है। तरह-तरह की चर्चाएं चलनी शुरू हो गई है। वहीं, इंटक के महासचिव संजय साहू का कहना है कि जिनका संगठन के प्रति आस्था नहीं है, ऐसे लोगों के चले जाने से इंटक और मजबूत हो
- अब माना जा रहा है कि भिलाई बीएमएस का सियासी वंश बढ़ाने के लिए बहादुर का कद भी आगे बढ़ाया जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भारतीय मजदूर संघ-बीएमएस भिलाई में एक बार फिर से बगावत शुरू हो गई है। घोषित रूप से 2 और अघोषित रूप से चौथा गुट अब बनने जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात इंटक के पूर्व महासचिव और एनजेसीएस सदस्य वंश बहादुर सिंह को लेकर है। तरह-तरह की चर्चाएं चलनी शुरू हो गई है।
वहीं, इंटक के महासचिव संजय साहू का कहना है कि जिनका संगठन के प्रति आस्था नहीं है, ऐसे लोगों के चले जाने से इंटक और मजबूत होगी। पूर्व में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। इंटक ने जिसे मान-सम्मान और एनजेसीएस का पद दिया, वही अब मुंह फेर ले तो समझ जाइए, कि पद ऐसे लोगों के लिए कितना जरूरी है। इंटक छोड़ बीएमएस का दामन थामने वाले वंश बहादुर सिंह से सूचनाजी.कॉम ने तीखे सवाल किए। जिसका उन्होंने बारीकी से जवाब भी दिया?
अब माना जा रहा है कि भिलाई बीएमएस का सियासी वंश बढ़ाने के लिए बहादुर का कद भी आगे बढ़ाया जाएगा। बता दें कि सूचनाजी.कॉम ने 9 जुलाई को ही सबसे पहले "BMS में बवाल: पदाधिकारियों ने खोला मोर्चा, नई यूनियन की राह, इंटक से NJCS सदस्य वंश बहादुर सिंह ये बोले..." शीर्षक से समाचार प्रसारित किया था। उस वक्त वंश बहादुर सिंह ने खुलकर नहीं बोल पा रहे थे। अब अपनी चुप्पी तोड़ दी है।
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वंश बहादुर ने बताया-इंटक छोड़ने का प्रमुख कारण
1. भिलाई इंटक में आपसी मतभेद और खींचतान की वजह से संगठन से दूरी बढ़ती जा रही थी। इंटक यूनियन चुनाव में महासचिव पद हार गए थे। अब पदाधिकारी नहीं थे। किसी फोरम में बात रखने का पॉवर ही नहीं था।
2. इंटक के राष्ट्रीय महासचिव संजय सिंह से संबंध खराब हो चुके हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्टर संजीवा रेड्डी का समर्थन था, लेकिन राष्ट्रीय महासचिव संजय सिंह की वजह से भी खुलकर कुछ नहीं कर पा रहे थे।
3. एनजेसीएस की मेंबरशिप भी वापस लेने की तैयारी चल रही है। पद से हटने के बाद वजूद नहीं बचता। इंटक में 27 साल से काम करने के बाद इस तरह साइडलाइन होना बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
4. कर्मचारियों की आवाज को उठाना है। एक मंच चाहिए था, जहां दमदारी से काम कर सकें। इसलिए बीएमएस का चयन किए।
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5. इंटक और बीएमएस की विचारधारा अलग-अलग है। कैसे, समन्वय बनेगा। इस पर वंश बहादुर सिंह बोले-इंटक में 80 प्रतिशत भाजपाई हैं। इसलिए बीएमएस में कोई दिक्कत नहीं होगी। मेरा फोकस कर्मचारियों के मुद्दे पर काम करना है। किसी तरह के विवाद में नहीं फंसना है।
6. बीएमएस से विवादित लोगों के हटने से रास्ता साफ हो गया। कामकाज करने में कोई दुश्वारी नहीं होगी। कानूनी अड़चन भी नहीं है।
7. वंश बहादुर सिंह का रिटायरमेंट 2030 में है। इंटक का चुनाव 2029 में है। ऐसे में एक साल का समय बचेगा। वहां चुनाव लड़ने पर भी खतरा रहता। भविष्य को देखते हुए इंटक छोड़ने का रास्ता चुने।
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चंदाखोरी, सीपीएफ ट्रस्टी के बदले पैसा…
बीएसपी के इतिहास में पहली बार बीएमएस मान्यता चुनाव जीती थी। कुछ समय ही गुजरा था कि पदाधिकारियों पर अरोप लगने शुरू हो गए थे। अरविंद पांडेय ने चंदाखोरी, कार्यालय को किराए पर देना, सीपीएफ ट्रस्टी के लिए पैसा लेने आदि आरोप लगाते हुए मामले को कोर्ट तक ले गए। इसके बाद राजेश चौहान, एके माहौर आदि ने बीएमएस का साथ छोड़ दिया। एक नया गुट भिलाई कर्मचारी यूनियन बनाया।
वहीं, बीएमएस को खड़ा करने वालों में देवेंद्र कौशिक, धामू आदि अलग ही गुट के बताए जा रहे हैं। अब चौथा गुट बनने की राह पर। बीएमएस विचार धारा के 50 कर्मचारियों ने बगावत कर दी है। इनका कहना है कि सुनवाई ही नहीं है तो क्या कर सकते हैं? इसलिए नई यूनियन बनना तय है।
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