ईपीएस 95 हायर पेंशन: न्याय मिलने में इतना विलंब क्यों, सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले…
हजारों में सिर्फ दो चार ही अपना मुंह खोल पाते हैं,बाकि की राय तो यही रहती है कि इन्तेजार के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है। सूचनाजी न्यूज, रायपुर। ईपीएएस 95 हायर पेंशन (EPS 95 Higher Pension) के मामले न जाने कितने लोगों ने किन-किन अदालतों में केस लगा रखे हैं। दो दशकों से भी अधिक वक़्त गुजर गया, पर EPS 95 के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों सार्वजनिक उपक्रम सहित निजी संस्थानों के सेवनिवृत्तों के लिए अभी तक ऐसा एक भी आदेश, जो सब पर समान रूप से लागू हो, नहीं निकल सका है। ये खबर भी पढ़ें: ईपीएस 95 हायर पेंश
- हजारों में सिर्फ दो चार ही अपना मुंह खोल पाते हैं,बाकि की राय तो यही रहती है कि इन्तेजार के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
ये खबर भी पढ़ें: 9436 कर्मचारी 12 को डालेंगे वोट, इंटक-बीएमएस में सीधी टक्कर, ये है राउरकेला इस्पात कारखाना कर्मचारी संघ का घोषणा पत्र
उच्च पेंशन को लेकर पता नहीं कौन कहाँ-कहाँ क्या कर रहा है। लेकिन एक बात ही दिखाई देती है कि आज दिनांक पर भी अनेक प्रकरण देश के विभिन्न उच्च न्यायालय सहित देश की सबसे बड़ी अदालत में भी अनेकों पेंशन के प्रकरण लंबित पड़े हैं। और उन पर अंतिम फैसला कब होगा यह भी कहना मुश्किल है। और उससे भी बढ़ बहुत कठिन है।
ये खबर भी पढ़ें: कर्मचारी पेंशन योजना 1995: 49 हजार ईपीएस पेंशनभोगियों को मिली 11 करोड़ पेंशन, मंत्री ने की ये घोषणा
अनिल नामदेव ने कहा-देश तो वो ही चला रहे हैं, जिनको हमने चुना है। न्यायालय को तो हमने नहीं चुना तो कैसे बताएं। न्यायालय के प्रति हमारी निराशा सिर्फ इतनी है कि वो आम और खास के बीच अंतर कैसे कर लेती है।
ये खबर भी पढ़ें: पेंशन डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान से जुड़ा बड़ा अपडेट
कोई खास न्यायालय में जाता है तो उसकी बात तुरंत सुन ली जाती है और कोई आम पक्षकार हो तो उसे तारीख ही मिलती रहती है। ऐसे कैसे? सभी जानते हैं कि पेंशनर्स का मामला कई वर्षों से कोर्ट के चक्कर में फंसा है। न जाने इस बीच कितने ही पेंशनर गुजर चुके हैं।
ये खबर भी पढ़ें: सरकार को यकीन नहीं ईपीएस 95 पेंशनभोगियों के परिवार घोर गरीबी में जी रहे, अब ये जवाबी कार्रवाई
क्या न्यालायल खुद भी इसे गंभीर बात नहीं मान सकती? अभी एक प्रकरण में preponding of hearing का आवेदन पेंशनरों की ओर से लगाया गया था,जिसे कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि शीघ्र सुनवाई का कोई कारण नहीं बनता। भले कोई न्यालायल को ये बात बताए या न बताए। हम भी तो चुप रहते हैं।
ये खबर भी पढ़ें: भविष्य निधि में जमा रकम, 7500 रुपए न्यूनतम पेंशन और पेंशनभोगियों का टेंशन
कोर्ट तक अपनी बात रख ही नहीं पाते। किसकी गलती कहाँ हो रही है। इसका पता नहीं चल पाता। क्या वकील,क्या पक्षकार या फिर कोर्ट। कहाँ किससे चूक हो रही हमारे मामले को तुरंत न सुने जाने की।
हम फेसबुक में इसकी चर्चा करते रहते है,पर हजारों में सिर्फ दो चार ही अपना मुंह खोल पाते हैं,बाकि की राय तो यही रहती है कि इन्तेजार के सिवाय उनके पास कोई विकल्प नहीं है।
ये खबर भी पढ़ें: उच्च पेंशन पर ईपीएस 95 हायर पेंशन देने में ढिलाई और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहा ईपीएफओ, SEFI का श्रम मंत्री को पत्र
ठीक है चलिए यही करते हैं। हम भी...जब तक जिंदा हैं। जो स्वर्ग को सिधार गए और जो लगभग स्वर्ग के दरवाजे पर खड़े हैं,उनके प्रति किसी की कोई संवेदना ही नहीं...।
न सरकार की…न EPFO की...न CBT की…। और तो और हमारे खुद के अग्रणी लोगों की, जिन्होंने हमें न्याय के लिए कोर्ट का रास्ता दिखाया। क्या किस्मत पाई है EPS 95 के पेंशनरों ने…हे राम।
ये खबर भी पढ़ें: EPS 95 Higher Pension कैलकुलेशन, ब्याज पर बड़ी खबर, 18 सीबीटी ट्रस्टी-EPFO के पास SEFI का खास लेटर