Bhilai Steel Plant ने लगाया दिल्ली शिकायत, नेताओं की पैरवी पर बैन, यूनियन बोली-यही है तानाशाही, पढ़ें

भिलाई स्टील प्लांट की ट्रेड यूनियनों का आया पक्ष। कर्मचारियों को शौक नहीं है कि प्रबंधन के खिलाफ कहीं जाएं। प्रबंधन शिकायतों को सुने और समाधान करे। शिकायत करने पर भी काम नहीं होता है तो वह कहीं बाहर जाएंगे ही।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि कार्मिक बाहरी पैरवी न कराएं। स्थानीय प्रबंधन से ही शिकायत करें। प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय, इस्पात मंत्रालय से सीधी शिकायत करने की परंपरा बंद करें। साथ ही राजनीतिक दलों या बाहरी लोगों से पैरवी भी न कराएं। प्रमोशन, ट्रांसफर और आवास आवंटन के मामले में पैरवी कराने वालों पर गाज गिरेगी। 

सूचनाजी.कॉम ने “SAIL BSP: प्रमोशन-ट्रांसफर, मकान में राजनीतिक दबाव पड़ेगा भारी, PMO-राष्ट्रपति, मंत्रालय से सीधे शिकायत पर रोक, नौकरी खतरे में, पढ़ें सर्कुलर” शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रसारित किया। इस पर इंटक, सीटू, बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ, बीएमएस का पक्ष आया है। समाचार और सेल बीएसपी प्रबंधन के सर्कुलर पर भिलाई स्टील प्लांट की ट्रेड यूनियन नेताओं की प्रतिक्रिया में एकमत दिख रहा है। यूनियन नेताओं ने प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी ज़ाहिर की है।

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जानिए ट्रेड यूनियन नेताओं का पक्ष 

हिंदुस्तान स्टील एम्प्लाइज यूनियन सीटू के महासचिव टी. जोगा राव का कहना है कि शिकायतों को ऊपर भेजने पर रोक लगाना तानाशाही की ओर बढ़ता कदम है। कोई भी कर्मचारी अपनी समस्या लेकर उच्च स्तर पर तभी जाता है, जब संयंत्र स्तर पर उसकी सुनवाई नहीं होती। यदि नीचे ही समस्याओं का समाधान हो जाए, तो ऊपर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यूनियन भी अपने पत्रों की प्रतिलिपि दिल्ली तक इसलिए भेजती है, ताकि स्थानीय स्तर पर उन्हें रद्दी की टोकरी में न डाल दिया जाए। ऐसे में उच्च स्तर से शिकायतों को ऊपर नहीं भेजने का सर्कुलर जारी करना कर्मचारियों की आवाज दबाने और तानाशाही को बढ़ावा देने वाला कदम है।

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बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ-बीएकेएस के अध्यक्ष अमर सिंह ने कहा-सेल प्रबंधन तानाशाही पर उतर आया है। लोकतंत्र (Democracy) के सारे नियम को भूलकर तानाशाही दिखाई जा रही है। अगर, प्रबंधन सारे मुद्दों को आसानी से साल्व करती तो हमें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। प्रबंधन का फॉर्मूला है कि मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे। बीएसपी ये भी बता दे कि समस्याओं का समाधान करने के लिए कौन सा सिस्टम भिलाई में काम कर रहा है, जो यूनियन की प्रॉब्लम को साल्व कर रहा। प्रबंधन को 10 लेटर लिखते हैं तो एक का भी जवाब नहीं आता है। 

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बीएमएस के कार्यकारी अध्यक्ष वंश बहादुर सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को शौक नहीं है कि प्रबंधन के खिलाफ कहीं जाएं। प्रबंधन शिकायतों को सुने और समाधान करे। शिकायत करने पर भी काम नहीं होता है तो वह कहीं बाहर जाएंगे ही। लोकतंत्र में और कहां जाएगा। लोकतंत्र में बहुत सी व्यवस्था बनी हुई है। प्रबंधन अगर चाहता है कि ऐसी स्थिति न आए तो वह सिस्टम को सुधारे। कोई शिकायत आती है तो निवारण करे। समस्या समाधान नहीं करने वालों पर कार्रवाई करे और कार्मिकों का विश्वास जीते। 

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इंटक महासचिव संजय साहू का कहना है कि कर्मचारियों की सुविधाओं एवं शिकायतों का समाधान निर्धारित फोरम में समय-सीमा में होना चाहिए। अगर, प्रबंधन उस पर कार्रवाई नहीं करती है तो कर्मचारियों को विवश होकर ऊपर जाना होता है। जबकि स्टैंडिंग ऑर्डर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि जो भी समस्या हो, प्रबंधन स्तर पर समाधान किया जाए। स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं होने पर विवश होकर बाहरी पैरवी तक लोग पहुंच जाते हैं। 

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