SAIL BSP: प्रमोशन-ट्रांसफर, मकान में राजनीतिक दबाव पड़ेगा भारी, PMO-राष्ट्रपति, मंत्रालय से सीधे शिकायत पर रोक, नौकरी खतरे में, पढ़ें सर्कुलर
PMO और इस्पात मंत्रालय में सीधे शिकायत भेजने से पहले अपनानी होगी आंतरिक प्रक्रिया। बाहरी दबाव डालने पर कार्रवाई होगी। SAIL Bhilai Steel Plant ने सेवा मामलों में बाहरी प्रभाव पर रोक लगाया। जानिए शिकायत प्रक्रिया, जवाब के लिए समय-सीमा और संभावित कार्रवाई के नियम।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) प्रबंधन ने कर्मचारियों और अधिकारियों के सेवा संबंधी मामलों में बाहरी प्रभाव के इस्तेमाल को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। पदोन्नति-प्रमोशन, स्थानांतरण- ट्रांसफर और क्वार्टर आवंटन जैसे सेवा मामलों में अपने हित साधने के लिए राजनीतिक या अन्य बाहरी प्रभाव डालने की अनुमति नहीं है। निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन करने पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ लागू सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
बीएसपी के रूल्स सेक्शन की ओर से जारी सर्कुलर ने नई बहस छेड़ दी है। बाहरी हस्तक्षेप पर रोक लगाने से संबंधित समेकित निर्देश हैं। प्रबंधन ने इस सर्कुलर के माध्यम से पहले जारी छह सर्कुलरों के निर्देशों को एक जगह समेकित किया है। नया सर्कुलर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
PMO, राष्ट्रपति सचिवालय और इस्पात मंत्रालय में सीधे शिकायत भेजने पर निर्देश
सर्कुलर में कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी अपने सेवा संबंधी हितों को आगे बढ़ाने के लिए किसी प्राधिकरण पर राजनीतिक या अन्य बाहरी प्रभाव डालने की कोशिश नहीं करेगा।
इसके तहत पदोन्नति, स्थानांतरण और क्वार्टर आवंटन जैसे मामलों को विशेष रूप से उल्लेखित किया गया है। कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रपति सचिवालय, इस्पात मंत्रालय, CPGRAMS या किसी अन्य बाहरी प्राधिकरण को सीधे प्रतिवेदन भेजने से पहले निर्धारित आंतरिक शिकायत निवारण प्रक्रिया का इस्तेमाल करना होगा।
सर्कुलर में चार प्रमुख पाबंदियों का उल्लेख
- आंतरिक शिकायत निवारण प्रक्रिया का पहले इस्तेमाल किए बिना सेवा संबंधी प्रतिवेदन बाहरी प्राधिकरणों को नहीं भेजना है।
- प्रतिवेदन की अग्रिम प्रतियां उच्च अधिकारियों या बाहरी प्राधिकरणों को नहीं भेजनी हैं।
- गुमनाम या छद्म नाम से शिकायत अथवा प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं करना है।
- ऐसे किसी आधिकारिक दस्तावेज का इस्तेमाल नहीं करना है, जिसे प्राप्त करने या अपने पास रखने के लिए कर्मचारी अधिकृत नहीं हैं।
अधिकारियों और गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के लिए अलग-अलग शिकायत प्रक्रिया
बीएसपी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि सेवा संबंधी शिकायतें निर्धारित आंतरिक प्रक्रिया और प्रशासनिक माध्यम से ही उठाई जानी चाहिए। गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के लिए सर्कुलर नंबर M&R-08/2003, दिनांक 31 मार्च 2003 का उल्लेख किया गया है। वहीं, कार्यपालक अधिकारियों के लिए सर्कुलर नंबर Rules-14(CC)/2011, दिनांक 5 मार्च 2011 के तहत निर्धारित प्रक्रिया लागू होगी।
दोनों प्रक्रियाएं मानव संसाधन (HR) विभाग के रूल्स वेबपेज पर उपलब्ध हैं। सर्कुलर के अनुसार, शिकायतों का निपटारा संबंधित प्रक्रियाओं में निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाना चाहिए।
बाहरी शिकायत मिलने पर क्या करेगा प्रबंधन
बाहरी माध्यम से प्राप्त शिकायतों या संदर्भों पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी विस्तार से बताई गई है। इसके तहत प्लांट के किसी भी कार्यालय में सेवा संबंधी कोई बाहरी संदर्भ प्राप्त होने पर उसे दो कार्यदिवस के भीतर HR-कॉरपोरेट रेफरेंस (CR) सेक्शन को भेजना होगा।
इसके बाद की प्रक्रिया इस प्रकार होगी
पहला चरण: CR सेक्शन संदर्भ को रजिस्टर करेगा और दो कार्यदिवस के भीतर संबंधित HR एग्जीक्यूटिव को भेजेगा।
दूसरा चरण: HR एग्जीक्यूटिव दो कार्यदिवस के भीतर संबंधित कर्मचारी से लिखित रूप में पूछेगा कि बाहरी संदर्भ उसकी पहल पर भेजा गया था या उसकी जानकारी में भेजा गया था।
तीसरा चरण: कर्मचारी को यह जवाब देने के लिए संदर्भ प्राप्त होने की तारीख से तीन कार्यदिवस का समय दिया जाएगा।
चौथा चरण: यदि कर्मचारी लिखित रूप में बताता है कि बाहरी संदर्भ न तो उसने शुरू कराया था और न ही अधिकृत किया था तथा उसे इसकी पहले से जानकारी भी नहीं थी, तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। बशर्ते इसके विपरीत कोई सामग्री उपलब्ध न हो।
पांचवां चरण: यदि कर्मचारी स्वीकार करता है कि उसने बाहरी संदर्भ भेजने की मांग की थी या उसे अधिकृत किया था, अथवा निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देता, तो मामला सक्षम प्राधिकारी/अनुशासनिक प्राधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। प्राधिकारी उपलब्ध अभिलेखों और लागू सेवा नियमों के आधार पर मामले की जांच करेगा।
जवाब नहीं देना अपने आप में कदाचार का निर्णायक सबूत नहीं
इस सर्कुलर का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने को अपने आप में कदाचार का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में मामला उपलब्ध अभिलेखों और लागू सेवा नियमों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। यानी जवाब नहीं देने की स्थिति में मामला जांच और विचार के लिए आगे बढ़ सकता है, लेकिन केवल जवाब नहीं देने के आधार पर अपने आप कदाचार साबित नहीं माना जाएगा।
काउंसलिंग से लेकर अनुशासनात्मक कार्यवाही तक का प्रावधान
उल्लंघन करने पर कार्रवाई का फैसला मामले की प्रकृति और गंभीरता, परिस्थितियों तथा पहले स्थापित किए गए किसी उल्लंघन के इतिहास को ध्यान में रखकर किया जाएगा। सक्षम प्राधिकारी लागू सेवा नियमों के तहत उचित कदम उठा सकता है। इनमें काउंसलिंग, लिखित सलाह, चेतावनी या अनुशासनात्मक कार्यवाही शामिल हैं।
हालांकि, सर्कुलर यह भी स्पष्ट करता है कि बाहरी माध्यम से उठाई गई किसी शिकायत या शिकायत-संदर्भ की जांच उसके गुण-दोष, लागू नियमों, उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से की जाएगी।
इसका अर्थ है कि शिकायत के बाहरी माध्यम से आने मात्र से उसके मूल विषय को स्वतः खारिज नहीं किया जाएगा। उसकी जांच संबंधित तथ्यों और नियमों के आधार पर की जानी है।
पहले जारी छह सर्कुलरों को समेकित किया गया
बीएसपी के रूल्स सेक्शन ने 28 अक्टूबर 2026 के इस आदेश में पहले जारी छह सर्कुलरों का संदर्भ दिया है। इनमें 18 अप्रैल 2009, 6 अप्रैल 2016, 6 फरवरी 2020, 2 दिसंबर 2022, 22 सितंबर 2023 और 5 मई 2024 को जारी सर्कुलर शामिल हैं। नए समेकित सर्कुलर के तत्काल प्रभाव से लागू होने के साथ संदर्भ में दिए गए पुराने छह सर्कुलरों का स्थान यह नया निर्देश लेगा।
कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए क्या है अहम संदेश
बीएसपी प्रबंधन के इस निर्देश का मुख्य जोर सेवा संबंधी शिकायतों के लिए निर्धारित आंतरिक व्यवस्था के इस्तेमाल पर है। पदोन्नति, स्थानांतरण, क्वार्टर आवंटन या अन्य सेवा मामलों में बाहरी प्रभाव डालने की कोशिश के बजाय संबंधित कर्मचारी और अधिकारी को लागू शिकायत निवारण प्रक्रिया अपनानी होगी।
ये खबर भी पढ़ें: इस्को स्टील प्लांट बर्नपुर: 18 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल, BMS ने ठोकी ताल
साथ ही, बाहरी संदर्भ प्राप्त होने पर प्रबंधन को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसकी जांच की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। संबंधित कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और आगे का निर्णय उपलब्ध रिकॉर्ड तथा लागू सेवा नियमों के आधार पर लिया जाएगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्कुलर में कार्रवाई का प्रावधान उल्लंघन स्थापित होने और लागू सेवा नियमों के अनुरूप उचित निर्णय लेने से जुड़ा है। इसे सभी बाहरी शिकायतों को स्वतः गलत मानने या हर मामले में दंड निश्चित होने के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।