SAIL BSP कर्मियों की पुकार: प्राइवेट हाथों में जाने से बचा लो सेक्टर 9 हॉस्पिटल, वरना पछताएंगे सब

बीएसपी के सेक्टर 9 हॉस्पिटल को बचाने के लिए व्यापक जनसंघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा। कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में सबको यह पछतावा हो कि यदि समय रहते संघर्ष किया होता, तो शायद अस्पताल को निजी हाथों में जाने से बचाया जा सकता था। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सूचनाजी.कॉम ने 16 मई को ‘सेक्टर 9 अस्पताल हो सकता है कॉर्पोरेट हॉस्पिटल जैसा स्मार्ट, CITU के सुझाव में दम…’ शीर्षक से समाचार प्रसारित किया था। इस न्यूज में अस्पताल को निजी हाथों में देने के लिए टेंडर प्रक्रिया का जिक्र किया गया। सीटू के कई सुझाव

  • बीएसपी के सेक्टर 9 हॉस्पिटल को बचाने के लिए व्यापक जनसंघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा।
  • कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में सबको यह पछतावा हो कि यदि समय रहते संघर्ष किया होता, तो शायद अस्पताल को निजी हाथों में जाने से बचाया जा सकता था।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सूचनाजी.कॉम ने 16 मई को ‘सेक्टर 9 अस्पताल हो सकता है कॉर्पोरेट हॉस्पिटल जैसा स्मार्ट, CITU के सुझाव में दम…’ शीर्षक से समाचार प्रसारित किया था। इस न्यूज में अस्पताल को निजी हाथों में देने के लिए टेंडर प्रक्रिया का जिक्र किया गया। सीटू के कई सुझाव पर आधारित समाचार प्रसारित होने के बाद एक और सुझाव सामने आया है। अस्पताल को बचाने के लि व्यापक जनसंघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया गया है। भिलाई इस्पात संयंत्र का सेक्टर-9 अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि लाखों कर्मियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं उनके परिवारों की जीवनरेखा है। आज जिस प्रकार अस्पताल को निजी हाथों में सौंपने की आशंका पैदा हा चुकी है। वह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में केवल एक संगठन के भरोसे इस लड़ाई को छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। ये खबर भी पढ़ें: सेक्टर 9 अस्पताल हो सकता है कॉर्पोरेट हॉस्पिटल जैसा स्मार्ट, CITU के सुझाव में दम… अस्पताल को बचाने के लिए कई ट्रेड यूनियनों ने लगातार आवाज उठाई है। वहीं, सीटू अपने हिस्से का संघर्ष लगातार कर रहा है। जनजागरण, विरोध कार्यक्रमों और कर्मचारियों की आवाज उठाने के माध्यम से अस्पताल की सार्वजनिक व्यवस्था को बचाया जा सकता है। किंतु यह संघर्ष तभी व्यापक रूप ले सकेगा, जब अन्य ट्रेड यूनियन, सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल भी स्वतंत्र एवं संयुक्त रूप से आगे आएँगे। ये खबर भी पढ़ें: NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को, 2027 से ऑनलाइन होगा एग्जाम यह केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। यदि अस्पताल निजी हाथों में चला गया, तो इलाज महंगा होने का खतरा बढ़ेगा और सामान्य कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त करना कठिन हो जाएगा अथवा वर्तमान में बीएसपी कर्मी सेवानिवृत कर्मियों एवं उनके आश्रितों का संयंत्र के अस्पताल मे चल रहा मुफ्त इलाज भविष्य में कहीं ना कहीं पैसे देकर इलाज करवाने के दायरे में आ जाएगा। इसलिए सभी संगठनों को दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर एक साझा जनआंदोलन खड़ा करना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें: SAIL CMD अशोक पंडा के नाम पर ठगी की कोशिश, थाइलैंड से फर्जी WhatsApp मैसेज, हो जाइए सावधान संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त कर्मियों की भी इस संघर्ष में सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इतिहास गवाह है कि जब जनता और कर्मचारी एकजुट होकर संघर्ष करते हैं, तब बड़े से बड़े निर्णयों को बदला जा सकता है। केवल मूकदर्शक बने रहने से भविष्य सुरक्षित नहीं होगा। ये खबर भी पढ़ें: SAIL में लगातार मुनाफा, अब तो दीजिए 39 माह का बकाया एरियर, प्लांट में चलाइए इलेक्ट्रिक बस, दें भिलाई-स्टील क्लब की मेंबरशिप यूनियन नेताओं का कहना है कि आज आवश्यकता है कि हर कर्मचारी, हर संगठन और हर जागरूक नागरिक आगे आएं और अस्पताल बचाने की इस लड़ाई को जनआंदोलन का रूप दे। कहीं ऐसा न हो कि भविष्य में सबको यह पछतावा हो कि यदि समय रहते संघर्ष किया होता, तो शायद अस्पताल को निजी हाथों में जाने से बचाया जा सकता था। ये खबर भी पढ़ें: Stocks Updates: कोल इंडिया और टाटा स्टील पर निवेशकों की नजर, टाटा का मुनाफा 125% बढ़ा, शेयर बाजार में हलचल