Bhilai Steel Plant: महिला दिवस पर मेडिकल स्टाफ, CISF जवानों के पास पहुंचा CITU, दी बधाई, ये बात बताई

Bhilai Steel Plant CITU leaders Met Medical Staff and CISF Jawans on Womens Day congratulated Them
  • समानता के लिए संघर्ष करने का प्रण लेने का दिन है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस।
  • महिला दिवस केवल शुभकामनाओं का नहीं बल्कि संघर्षों का देता है संदेश।
  • ज्यादातर काम अस्थायी प्रकृति के होने के कारण महिलाएं समान काम के समान वेतन के अधिकार से वंचित है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को सीटू की टीम ने अस्पताल एवं सीआईएसएफ के महिला कामगारों से मिलकर बधाई दी एवं कहा कि यह केवल बधाई एवं शुभकामनाओं तक सीमित रखने का दिन नहीं, बल्कि असमानता के खिलाफ समानता के लिए संघर्ष करने के लिए प्रण लेने का दिन है। महासचिव टी. जोगा राव, सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी, हॉस्पिटल प्रभारी अजय आर्या आदि मौजूद रहे। रविवार को महिला दिवस पड़ने से अन्य विभाग बंद हैं, जिसके चलते सीटू पदाधिकारी विभागवार दौरा नहीं कर सके।

इसीलिए 8 मार्च को मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के समानाधिकार अर्जित करने के लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से सन 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेग शहर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी नारी सम्मेलन से क्लारा जेटकिन ने दुनियां भर में 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में पालन का आह्वान किया था, तभी से 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

1908 में शुरू हुआ था महिलाओं के समानाधिकार का संघर्ष

8 मार्च 1908 में न्यूयॉर्क शहर में टेलरिंग (दर्जी) के काम करने वाली महिला श्रमिकों के नेतृत्व में 15000 महिलाओं ने काम के घंटे को सीमित करने, उचित वेतन तथा वयस्क महिलाओं को मतदान के अधिकार की मांग पर जुलूस निकालकर अपनी आवाज को बुलंद किए थे। क्योंकि उस दौर में महिलाओं को मतदान करने का अधिकार नहीं हुआ करता था।

उसके बाद 8 मार्च 1917 (जो उस समय के रुसी कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी) को पेट्रोग्राड में कपड़ा क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों ने प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति एवं भोजन की कमी के विरोध में संघर्ष किया। यह आंदोलन एक बड़े क्रांति में बदल गया जिसमें महिलाओं को मताधिकार मिला और 8 मार्च की तारीख स्थापित हुई।

लैंगिक असमानता रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत 131वें स्थान पर

सीटू नेता ने कहा कि हमारे देश की सरकार का नारा है”बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।” किंतु इस नारे की असमानता एवं भेदभाव हर क्षेत्र में दिखता है। हमारा देश भी लैंगिक असमानता (annual gender gap report) 2023 के रिपोर्ट के अनुसार दुनियां के 146 देशों में भारत का स्थान 127वें स्थान पर था जो 2024 में दो पायदान गिरकर 129वें स्थान पर पहुंच गया।

अब 2025 की रिपोर्ट में 148 देश में भारत और दो पायदान नीचे गिरकर 131वें स्थान पर पहुंच गया है अर्थात लैंगिक असमानता को दूर करते हुए लैंगिक समानता में ऊपर उठने के बजाय पिछले 2 सालों से लगातार दो-दो पायदान नीचे गिर रहा है। इसके खिलाफ समानता के लिए संघर्ष जरूरी है। कार्ल मार्क्स ने 1864 में पहले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था महिलाओं के बिना मजदूर वर्ग का आंदोलन नही हो सकता है।महिला दिवस महिलाओं के समानाधिकार के संघर्ष को तेज करने के लिए संकल्प लेने का दिवस है।

महिला दिवस केवल शुभकामनाओं का नहीं बल्कि संघर्षों का देता है संदेश

महिला दिवस को बहुत से लोग सिर्फ शुभकामनएं,बधाई तक सीमित रख देना चाहते है वे महिलाओं के शोषण,उत्पीड़न को ही जीवित रखना चाहते है। सिर्फ एक निर्दिष्ट दिन पर महिलाओं के लिए कुछ कार्यक्रम आयोजित कर वे महिला दिवस के उस संघर्ष को ही भुला देना चाहते है। किंतु सच्चाई यह है कि यह दिन समानता के लिए संघर्ष करने का प्रण लेने का दिन है।

आज भी समान काम के लिए समान वेतन से वंचित हैं महिलाएं

देश के बेरोजगारी की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। ग्रामीण रोजगार में महिलाओं की स्थिति और भी भयावह है। ज्यादातर काम अस्थायी प्रकृति के होने के कारण महिलाएं समान काम के समान वेतन के अधिकार से वंचित है।

मनरेगा में किए गए परिवर्तन के बाद अब रोजगार की कोई गारंटी नहीं है।कॉरपोरेट घरानों के मुनाफा की गारंटी को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से श्रम कानून में परिवर्तन कर समान काम के समान वेतन के अधिकार को भी छलावा के रूप में पेश करके उसे अधिकार को भी सरकार छीन लेना चाहती है। इसके खिलाफ पूरे देश में संघर्ष जारी है।