- हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन सीटू की कार्यकारिणी समिति की बैठक में हड़ताल की तैयारियों का बना रोडमैप।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन सीटू की कार्यकारिणी समिति की बैठक संपन्न हुई, जिसमें 12 फरवरी की देश व्यापी हड़ताल के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। तय किया गया कि हड़ताल की मांगे पर्चा, पोस्टर, व्यक्तिगत संपर्क एवं छोटी-छोटी ग्रुप मीटिंग्स के माध्यम से हड़ताल का संदेश कर्मियों तक पहुंचाया जाएगा।
कार्यकारिणी बैठक में विस्तार से नई श्रम कोड पर बातों को रखते हुए यूनियन के महासचिव टी जोगा राव ने कहा कि 12 फरवरी की हड़ताल आर पार की लड़ाई है, क्योंकि सरकार ने 29 कानून को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं बनाया है, जो मजदूरों को तेजी से गुलामी की तरफ धकेल देगा।
लंबी लड़ाई के बाद हासिल किए गए श्रम कानूनों को मालिकों के पक्ष में खत्म कर दिया जा रहा है। जिन्हें बचाने के लिए हर कर्मी को इस संघर्ष में भाग लेना होगा।
वेतन समझौता को पूर्ण करवाने के लिए करना होगा संघर्ष
9 वेतन समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं एवं दसवां वेतन समझौता पिछले 9 साल से प्रबंधन और सरकार की नई-नई नीतियों और जुमले की भेंट चढ़ी हुई है। बहुमत को आधार बनाकर जिस एमओयू को किया गया, उसके परिणाम स्वरूप प्रबंधन अब एरियर्स देने से मुकर रही है।
जुमले बाजी शुरू कर दी है कि वेतन समझौता को अब पूर्ण समझिए। प्रबंधन के इन चालबाजियों के खिलाफ दसवें वेतन समझौता को एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट, एरियर्स की पूरी राशि रात्रि पाली भत्ता में बढ़ोतरी सहित अन्य लाभों को लेते हुए पूर्ण करवाने के लिए सभी को संघर्षों में उतरना होगा।
कर्मियों के 30 जून 2021 के हड़ताल के बदौलत ही मिल रहा है 26.5% पर्क्स
सीटू नेताओं ने कहा कि जून के आखिरी सप्ताह में 6 दिन तक चले ऑनलाइन मीटिंग के दौरान प्रबंधन और यूनियनों ने क्या-क्या कहा इसको सभी ने देखा। प्रबंधन 10% पर्क्स देने की बात कह रहा था एवं एक यूनियन 25% पर्क्स अपनी सहमति जाता चुका था। इसका सहारा लेकर प्रबंधन किसी भी तरह से जोड़-तोड़ करके 15% से 17% के बीच पर्क्स को खत्म करने की कोशिश में था।
इसी बीच 30 जून 2021 का हड़ताल आया। कर्मियों ने जबरदस्त तरीके से हड़ताल को सफल किया और प्रबंधन 26.5% पर्क्स देने के लिए मजबूर हुआ। आधे अधूरे मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग करने के बजाय यदि एक बैठक और रुक जाते तो प्रबंधन पर्क्स का प्रतिशत राशि को भी बढ़ता एवं एरियर की राशि भी मिल जाती।
इसी संघर्ष को 12 फरवरी को फिर से आगे बढ़ाना है ताकि वेतन समझौता को पूर्ण कर सके और लेबर कोड को पीछे धकेल सके।
मालिकों के पक्ष में लिखा गया है श्रम कोड के सभी नियम
यूनियन के उपाध्यक्ष केंवेद्र सुंदर ने कहा कि 21 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए हुए श्रम कोड बिल के नियमों को लिखकर 30 दिसंबर को सार्वजनिक किया गया है एवं उस पर राय मांगी गई है। उन नियमों को विस्तार से अध्ययन करने पर स्पष्ट होता है कि पूरे के पूरे नियम मालिकों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
न्यूनतम मजदूरी की गारंटी की बात करने वाला वेज कोड बिल मौजूदा समय में मिल रहे रोजी को भी घटा देगा, काम के घंटे की परिभाषा, महिलाओं को रात्रि पाली में नौकरी करवाने की बात कहना, कारखाने की परिभाषा को बदलना, 300 से कम कर्मी वाले उद्योग को फैक्ट्री के दायरे से बाहर रखना, भविष्य निधि में 12% की कटौती को कम करते हुए 10% करना, आदि सभी केवल और केवल मालिकों के हित में है। इसके लागू होते ही मजदूर वर्ग हाशिये पर चला जाएगा। इसे रोकने के लिए हर संभव लड़ाई को लड़ा जाना जरूरी है।











