SAIL कर्मचारियों में बढ़ती बेचैनी: अस्पताल, स्कूल, आवास और Privatization की आशंकाओं ने बढ़ाया तनाव

Growing Unrest among SAIL Employees Hospitals, Schools, Housing and Fears of Privatization add to Tensions
  • अस्पताल, स्कूल, क्वार्टर आवंटन, रिटेंशन स्कीम और वेलफेयर सुविधाओं में कटौती से सब परेशान।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के विभिन्न स्टील प्लांट भिलाई, दुर्गापुर, बोकारो और राउरकेला में कर्मचारी इन दिनों गहरी मानसिक परेशानी से गुजर रहे हैं। लगातार बदलती नीतियों, सुविधाओं के सिकुड़ते दायरे और निजीकरण की आशंकाओं ने माहौल को असामान्य रूप से तनावपूर्ण बना दिया है।

कर्मचारियों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में जिस तरह अस्पताल, स्कूल, क्वार्टर आवंटन, रिटेंशन स्कीम और वेलफेयर सुविधाओं में कटौती महसूस की गई है, उसने उनकी पेशेवर और निजी दोनों जीवन पर असर डाला है।
भिलाई स्टील प्लांट में कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि अस्पताल सेवाओं में आने वाले संकट ने चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सुविधाओं का आउटसोर्सिंग और खर्चों में संभावित बढ़ोतरी ने परिवारों को असुरक्षित महसूस कराने का संकेत दे दिया है। वहीं स्कूलों में शिक्षकों की कमी और स्टाफ आउटसोर्सिंग के बढ़ते ट्रेंड ने बच्चों की शिक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। अब अंग्रेजी माध्यम के सेक्टर 6, 7 और 10 स्कूल को प्राइवेट हाथों में देने के लिए टेंडर तक निकाल दिया गया है।

दुर्गापुर और बोकारो स्टील प्लांट में अस्पताल, आवास को लेकर सबसे अधिक असंतोष देखा जा रहा है। कई कर्मचारी बताते हैं कि आवास आवंटन में देरी, मेंटेनेंस की दिक्कतों और नीतिगत अस्पष्टता ने कामकाजी माहौल को प्रभावित किया है।

राउरकेला स्टील प्लांट में निजीकरण की संभावित दिशा ने कर्मचारियों को सबसे अधिक झटका दिया है। आउटसोर्सिंग बढ़ने और ठेका श्रमिकों पर निर्भरता से स्थायी कर्मचारियों को भविष्य की नौकरी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है।

कर्मचारियों का कहना है कि स्टील प्लांटों ने देश और उद्योग को मजबूत करने में वर्षों दिए, लेकिन आज वे स्वयं अनिश्चितताओं से घिरे हैं। वे प्रबंधन से अपेक्षा कर रहे हैं कि स्पष्ट नीतियां, संवाद और ठोस कदम उठाकर इस बढ़ते तनाव को कम किया जाए।

हैरानी की बात यह है कि प्रबंधन की ओर से खुलकर अब तक कोई जवाब नहीं आ रहा है। कर्मचारियों के प्रतिनिधि हर फोरम पर आवाज उठा रहे हैं। लेकिन, स्पष्ट रूप से जवाब नहीं दिया जा रहा है।