SAIL, जेएसडब्ल्यू, RINL, टाटा संग 28 कंपनियों पर कीमत को लेकर गंभीर आरोप, Reuters की रिपोर्ट से मचा हड़कंप

Reuters Report Raises Alarm over Serious Allegations Against SAIL JSW RINL Tata and 28 other Steel Companies
  • भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक गोपनीय जांच रिपोर्ट लीक हो गई है।

सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल इस वक्त सुर्खियों में हैं। सेल के साथ ही टाटा, जेएसडब्ल्यू, आरआइएनएल समेत कई स्टील कंपनियों का नाम अचानक से उछल गया है। दुनिया की प्रसिद्ध न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने हंगामा मचा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल समेत कई कंपनियों ने एंटी ट्रस्ट कानून का उल्लंघन किया है। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो कंपनियों की ओर से आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। वैसे सेल और जिंदल ने इसे झूठा करार दिया है।

दावा किया जा रहा है कि भारत की प्रतिस्पर्धा निगरानी संस्था भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की एक गोपनीय जांच रिपोर्ट लीक हो गई है। 28 कंपनियों पर एंटी ट्रस्ट कानून के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने आपसी मिलीभगत कर इस्पात की बिक्री कीमतें तय कीं, जो प्रतिस्पर्धा कानून के खिलाफ है।

CCI के 6 अक्टूबर 2025 के आदेश के मुताबिक, इस मामले में 56 शीर्ष अधिकारियों को भी दोषी ठहराया गया है। इनमें जेएसडब्ल्यू के प्रबंध निदेशक सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी. वी. नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच अलग-अलग अवधियों में कीमतों को लेकर मिलीभगत की गई।

इस उच्च-प्रोफाइल जांच की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी, जब तमिलनाडु की कोयंबटूर कॉरपोरेशन कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि इस्पात कंपनियों ने छह महीनों की अवधि में कीमतें 55 प्रतिशत तक बढ़ा दीं और आपूर्ति सीमित कर कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाए। अदालत के निर्देश पर यह मामला CCI को सौंपा गया।

CCI ने कंपनियों से वर्ष 2016 से 2023 तक के आठ वर्षों के ऑडिटेड वित्तीय विवरण भी मांगे हैं, ताकि संभावित जुर्माने की गणना की जा सके। कानून के तहत, आयोग कंपनियों पर उनके मुनाफे का तीन गुना या टर्नओवर का 10 प्रतिशत (जो अधिक हो) तक जुर्माना लगा सकता है। अधिकारियों पर भी व्यक्तिगत जुर्माना संभव है।

रिपोर्ट के अनुसार, जांच में व्हाट्सएप चैट्स भी सामने आई हैं, जिनमें क्षेत्रीय इस्पात उद्योग समूहों के बीच कीमत तय करने और उत्पादन घटाने के संकेत मिले हैं। जुलाई 2025 के एक आंतरिक दस्तावेज में इन संदेशों को गलत आचरण का प्रमाण बताया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस पूरे प्रकरण पर संबंधित कंपनियों की ओर से आधारिक बयान जारी किया जाए,ताकि अगर गलत रिपोर्ट है तो सच्चाई लोगों को बताया जाए। अब देखना यह है कि प्रेस रिलीज कब तक जारी होती है।