Bhilai Steel Plant के पूर्व कर्मचारी के बेटे को मिली CSVTU के कुलपति की कुर्सी, जानिए कौन हैं डॉ. अरुण अरोड़ा, पढ़ें इंटरव्यू

Son of a Former Employee of Bhilai Steel Plant Got The Post of Vice Chancellor of CSVTU Know Who is Arun Arora, Read The Interview (1)

प्राथमिक शिक्षा सेक्टर 2 स्कूल और हायर सेकंडरी की पढ़ाई भिलाई विद्यालय सेक्टर 2 से की। 

अज़मत अली, भिलाई। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय-सीएसवीटीयू के नए कुलपति के रूप में डॉ. अरुण अरोड़ा ने कुर्सी संभाल ली है। भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व कर्मचारी के बेटे व बीआईटी दुर्ग के प्राचार्य अरुण अरोड़ा की प्राथमिक शिक्षा सेक्टर 2 स्कूल से हुई।

Vansh Bahadur

भिलाई से पढ़े-लिखे और बढ़े नए कुलपति का कहना है कि भिलाई ने मुझे बहुत कुछ दिया है, अब वक्त आया है लौटाने का…। प्रदेश की सेवा करने का मौका मिला है, कोई कोर कसर नहीं छोड़ूंगा।

सूचनाजी.कॉम से विशेष बातचीत के दौरान सीएसवीटीयू के नए कुलपति ने कहा-पापा केसी अरोडा भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस में कार्यरत थे। 1992 में चार्जमैन के पद से रिटायर हुए।

प्राथमिक शिक्षा सेक्टर 2 स्कूल और हायर सेकंडरी भिलाई विद्यालय सेक्टर 2 से किया। 1981 में 11वीं पास किया। इसके बाद रायपुर एनआइटी से बीई मैकेनिकल की पढ़ाई 1986 में की। 1988 में बीआईटी दुर्ग से जुड़े।

1992 में आईआईटी रुडकी गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद भिलाई लौटे और बीआईटी को ज्वाइन कर लिया। नौकरी के साथ ही 2003 में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से पीएचडी किया। पढ़ने और पढ़ाने का सिलसिला चलता रहा।

15 साल प्राचार्य रहे, अब कुलपति बने

इसी बीच 2010 में बीआईटी दुर्ग के प्राचार्य बने। 15 साल के बाद अब स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति बने हैं। 2005 से सीएसवीटी से जुड़े। चेयरमैन बोर्ड ऑफ स्टडी समेत अनेक पोर्टफोलियो पर काम किया। इंटरव्यू में शायद इसी अनुभव का ही लाभ मिला है।

पूर्व कुलपति एमके वर्मा का रहा दो कार्यकाल

पूर्व कुलपति डाक्टर एमके वर्मा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। पहला कार्यकाल 4 साल और दूसरा कार्यकाल 5 साल का उन्होंने पूरा किया है। एमके वर्मा के कार्यकाल में ही जर्मनी समेत कई देशों से एमओयू भी साइन किए गए।

लंबी लाइन खींचने की तैयारी में कुलपति अरोड़ा

• बातचीत के दौरान सीएसवीटीयू के कुलपति अरुण अरोड़ा ने स्पष्ट रूप से माना कि स्टूडेंट्स का विश्वास पहले से कम हुआ है। कॉलेजों के प्रति रुझान कम होने की वजह से बाहर की तरफ रुख किए हैं। समय पर परीक्षा न होने और रिजल्ट में देरी इसका कारण बनता है। इस खामी को सुधारने पर फोकस किया जाएगा।

स्टूडेंस में छत्तीसगढ़ के कॉलेजों के प्रति भावना बढ़ाना है। अव्यवस्था को दूर करना है। विश्वास बढ़ाने के लिए समय पर परीक्षा और रिजल्ट देना है।

छत्तीसगढ़ को छोड़कर बच्चा बाहर क्यों जा रहा है। इसकी कमियों को पकड़कर सुधारा जाएगा। छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में दाखिला बढ़ने से प्रदेश का राजस्व बढ़ेगा। शिक्षा का स्तर सुधर जाएगा।

स्किल्ड डेवलपमेंट का सेंटर बनाया जाएगा है। प्रैक्टिकल नॉलेज पर जोर दिया जाएगा, ताकि यहां से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स दूसरे प्रदेशों में पकड़ बना सकें।

इंटरनेशनल स्तर के कोर्स शुरू किए जाएंगे। एआई का दौर है। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल के साथ एआई, डेटा साइंस पर जोर दिया जाएगा।