मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) द्वारा 25-10-2024 को बुलाई गई सुलह बैठक का परिणाम मायूस करने वाला था। प्रबंधन के रवैये से कर्मचारी आक्रोशित हैं।
- स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-सीआईटीयू ने कहा-लड़ेंगे और जीतेंगे। कर्मचारियों को एकजुट होने का भरा जा रहा है दम।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल कर्मचारियों (SAIL Employees) के बकाया एरियर (Outstanding Arrears) पर प्रबंधन ने यू-टर्न ले लिया है। अब तक यही बात कही जाती रही है कि कंपनी के हालात ठीक नहीं है, जैसे ही प्रॉफिट होगा, भुगतान किया जाएगा। पहली बार प्रबंधन ने आधारिक बैठक में दो-टूक बोल दिया है कि भुगतान नहीं किया जा सकता है। इसकी वजह से कर्मचारियों को सीधेतौर पर डेढ़ लाख से लेकर करीब 3 लाख रुपए तक का नुकसान हो रहा है। समझौते के बाद 19 माह का न्यूनतम एरियर करीब 70 हजार रुपए दिया गया था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कर्मचारियों के कितने रुपए बकाया है।
सेल प्रबंधन और एनजेसीएस में भाग लेने वाली यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच मुख्य श्रम आयुक्त कार्यालय (केन्द्रीय) नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और भागीदारी में सुलह बैठक आयोजित की गई।
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बैठक में मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय) भी कुछ समय के लिए उपस्थित रहे। सभी एनजेसीएस यूनियनों (NJCS Unions) द्वारा 28 अक्टूबर 2024 को सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग के सभी प्रतिष्ठानों में अपनी लंबित वैध बकाया और मांगों को लेकर हड़ताल के लिए दिए गए हड़ताल नोटिस के मद्देनजर सीएलसी (सी) द्वारा सुलह बैठक बुलाई गई थी।
बैठक में सीटू का प्रतिनिधित्व इसके राष्ट्रीय सचिव ललितमोहन मिश्रा ने किया, जो एसडब्ल्यूएफआई के महासचिव भी हैं। इसके अलावा एटक, इंटक, एचएमएस और बीएमएस के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
सभी मांगों पर घंटों विचार-विमर्श के बावजूद, सेल प्रबंधन ने श्रमिकों की सभी वैध मांगों पर अपना पूरी तरह से नकारात्मक रुख जारी रखा। यहां तक कि प्रबंधन इस हद तक नापाक हो गया है कि उन्होंने सीएलसी के समक्ष अपने लिखित प्रस्तुतिकरण में, अपने स्वयं के एमओयू द्वारा अंतिम रूप दिए गए वेतन संशोधन के 39 महीने के बकाया को पाने के लिए श्रमिकों के अधिकार को भी स्वीकार करने से पूरी तरह से इनकार कर दिया।
अंत में बैठक गतिरोध की स्थिति में समाप्त हुई और यूनियन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि श्रमिक 28 अक्टूबर 2024 को अपने हड़ताल कार्यक्रम पर आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए 28 अक्टूबर 2024 को इस्पात उद्योग की संयुक्त हड़ताल कायम है। ललित मोहन मिश्र का कहना है कि आइए 28 अक्टूबर 2024 की हड़ताल को एक बड़ी सफलता बनाएं और प्रबंधन के नाजायज अहंकार के खिलाफ लड़ाई शुरू करें, जो श्रमिकों के सबसे वैध अधिकारों और हकों को नकारता है- जो केवल कंपनी और राष्ट्र के लिए मूल्यों का निर्माण करते हैं। हम लड़ेंगे और जीतेंगे…।








