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40% श्रमिकों की कटौती बेरोजगारी और हादसे को दावत, बीएसपी की संयुक्त यूनियन ने इस्पात सचिव को भेजा सुझाव

Azmat ali 19/05/2026 1 minute read
Reduction in Workers Invites Unemployment and Accidents BSPs Joint Union Sends Suggestion to Steel Secretary

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड, राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में श्रमिकों की 40% कटौती संबंधी आदेश को निरस्त किया जाए।

  • संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने कहा-भिलाई इस्पात संयंत्र एक अत्यंत जटिल एवं जोखिमपूर्ण औद्योगिक इकाई है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत श्रमिकों की 40% कटौती संबंधी निर्देश को तत्काल वापस लेने के लिए संयुक्त ट्रेड यूनियन भिलाई द्वारा इस्पात सचिव को संबोधित मांग पत्र बीएसपी के आइआर विभाग को सौंपा गया। इसकी प्रतिलिपि भारतीय इस्पात प्राधिकरण के सीएमडी डाक्टर अशोक कुमार पंडा और बीएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज को भेजी गई है। ज्ञापन देने आए संयुक्त ट्रेड यूनियनों में एटक, एक्टू, सीटू और लोइमू के पदाधिकारी शामिल हुए।

ज्ञापन के माध्यम से संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा बताया गया कि भिलाई इस्पात संयंत्र एक अत्यंत जटिल एवं जोखिमपूर्ण औद्योगिक इकाई है, जहाँ भारी मशीनरी, उच्च तापमान, अत्यधिक धूल तथा विषैले धुएँ जैसी कठिन परिस्थितियों में कार्य किया जाता है। ब्लास्ट फर्नेस, स्टील मेल्टिंग शॉप, आईएमएफ, बैटरी, सिंटर प्लांट आदि विभागों में होने वाले अधिकांश कठिन एवं जोखिमपूर्ण कार्य श्रमिकों द्वारा संपादित किए जाते हैं।

इस्पात निर्माण की प्रक्रिया में श्रम शक्ति की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि अधिकांश कार्य अभी भी मैनुअल प्रकृति के हैं। वर्तमान में स्थायी कर्मचारियों की संख्या निरंतर घट रही है तथा औद्योगिक इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आवश्यक मानव संसाधन के अध्ययन के बावजूद नई नियुक्तियाँ नहीं की जा रही हैं। ऐसी स्थिति में उत्पादन एवं उत्पादकता बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी श्रमिकों पर ही आ गई है।

सर्वविदित है कि तीनों शिफ्टों तथा सामान्य शिफ्ट में विद्युत पैनल, विद्युत सर्किट, भूमिगत कार्य, वर्कशॉप रखरखाव तथा अन्य तकनीकी कार्यों में पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता होती है। सुरक्षा मानकों के पालन हेतु प्रत्येक कार्यस्थल पर कम-से-कम दो या अधिक अनुभवी श्रमिकों की आवश्यकता अनिवार्य होती है।

विशेष रूप से विद्युत कार्यों, लोकोमोटिव संचालन, यार्ड संचालन, भूमिगत कार्यों तथा भारी सामग्री खींचने जैसे कार्यों में एक व्यक्ति द्वारा कार्य संपादित करना संभव नहीं है। इसलिए प्रत्येक स्थान पर कार्य की आवश्यकता के अनुसार न्यूनतम मानव संसाधन की तैनाती की जाती है, जिसे लाइन मैनेजर एवं शॉप स्तर के अधिकारी भी आवश्यक मानते हैं। वर्तमान में कार्य पहले से ही अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों में किया जा रहा है।

मशीनरी, पैनल नियंत्रण तथा अन्य तकनीकी गतिविधियों का संचालन एवं रखरखाव पर्याप्त मानव संसाधन के बिना संभव नहीं है। निविदा जारी करने से पूर्व औद्योगिक इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विस्तृत अध्ययन किया जाता है तथा उसके आधार पर संबंधित विभागों, वित्त विभाग, सामग्री विभाग, अनुबंध विभाग एवं संयंत्र अभियंता द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाता है। इसके बावजूद वर्तमान व्यवस्था पहले से ही न्यूनतम स्तर पर संचालित हो रही है।

ऐसी परिस्थिति में वित्तीय वर्ष के दौरान श्रमिकों की संख्या में 40% कटौती करना एसओपी एवं एसएमपी के तहत निर्धारित मानकों एवं सुरक्षा व्यवस्था के पूर्णतः विपरीत है।

1) भिलाई इस्पात संयंत्र में वर्तमान कार्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है, न कि लागत कम करने के नाम पर 40% श्रमिकों की कटौती करने की। ऐसा कदम श्रमिकों को असुरक्षित परिस्थितियों में कार्य करने के लिए विवश करेगा, जो श्रम कानूनों, सुरक्षा नियमों एवं निष्पक्ष श्रम प्रथाओं के विरुद्ध है।

2) सभी श्रमिक स्थायी एवं चिरस्थायी प्रकृति के कार्यों में संलग्न हैं। उनकी संख्या में किसी भी प्रकार की कमी से संयंत्र के उत्पादन एवं उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा यह श्रम कानूनों एवं सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों की भावना के भी विपरीत होगा।

3) उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य मशीनों एवं भट्टियों की क्षमता वृद्धि, उचित रखरखाव, सुरक्षित कार्य परिस्थितियों तथा गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल एवं तैयार लौह अयस्क की उपलब्धता सुनिश्चित करके प्राप्त किया जाना चाहिए।

4) लागत एवं व्यय नियंत्रण के अनेक अन्य उपाय संभव हैं। श्रमिकों की संख्या में 40% कटौती करने से दुर्घटनाओं, असंतोष, मानसिक तनाव एवं शारीरिक दबाव में वृद्धि होगी, जिसका प्रभाव स्थायी कर्मचारियों एवं अन्य श्रमिकों दोनों पर पड़ेगा।

5) संयंत्र में कार्यरत हजारों श्रमिकों की आजीविका इस रोजगार पर निर्भर है। 40% श्रमिकों की कटौती उन्हें बेरोजगारी की ओर धकेल देगी, जिससे औद्योगिक अशांति एवं सामाजिक असंतोष उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाएगी।

नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय हित, औद्योगिक सुरक्षा एवं उत्पादन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा केवल भिलाई इस्पात संयंत्र ही नहीं, बल्कि पूरे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड एवं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में भी श्रमिकों की 40% कटौती संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।

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