- हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) भिलाई का 19 वां सामान्य सम्मेलन संपन्न।
- अब बदलती परिस्थितियों में फिक्स्ड टर्म एम्पलाइज की भर्ती शुरू की गई है। इंटर्न एवं अप्रेंटिस कर्मी की भी भर्ती हो रही है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन (सीटू) भिलाई का 19 वां त्रैवार्षिक सामान्य सम्मेलन 11 जनवरी को सेक्टर 4 इस्पात क्लब में संपन्न हुआ। अध्यक्ष के रूप में विजय कुमार जांगड़े और महासचिव पद पर टी. जोगा राव को जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। इसी के साथ ही कर्मचारियों के मुद्दे पर आंदोलन की तस्वीर भी पेश कर दी गई है। 12 फरवरी को हड़ताल की तैयारी भी शुरू हो गई है।
12 फरवरी के हड़ताल को सफल करने का प्रस्ताव सीटू ने ले लिया है। सम्मेलन के दौरान 12 फरवरी को हड़ताल सफल करने के लिए हर कर्मी तक पहुंचने, कर्मियों को चारों लेबर कोड से आ रहे खतरों के बारे में समझाने के लिए हर संभव कार्य करने का प्रस्ताव पेश किया गया।
इसे सभी सदस्यों ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। यदि लेबर कोड लागू हो जाते हैं तो आने वाले दिनों में न केवल कर्मी श्रम कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे, बल्कि श्रमिकों को अभी तक प्राप्त हुए अधिकार भी धीरे-धीरे छिनना शुरू हो जाएगा।
2018 से सीटू विरोध कर रहा था लेबर कोड का
सीटू के केंद्रीय नेता तपन सेन ने कहा-लेबर झूठ का नमूना है। उन्होंने कहा-केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया चारों लेबर कोड पर केंद्र सरकार 2018 से काम करना शुरू किया है और सीटू तभी से इन लेबर कोर्ट का विरोध कर रहा था, क्योंकि केंद्र सरकार श्रम कानून को समाप्त करके यह मजदूर विरोधी कानून ला रहा था, जो मजदूरों को गुलामी की तरफ धकेलना के लिए किया जा रहा कृत्य था।
2019 में वेज कोड बिल एवं 2020 में बाकी तीनों लेबर कोड को पारित किया गया, तभी से इसे लागू करने के लिए कोशिश करता रहा। इसका देश के कर्मियों ने लगातार विरोध किया और सरकार को पीछे हटना पड़ा। किंतु बिहार के चुनाव परिणाम के बाद दादागिरी से इसे लागू कर दिया। जिसको रोकने के लिए मजबूती से लड़ना होगा।
केवल मजदूर वर्ग में ही होता है परिस्थितियों को बदलने की ताकत
सम्मेलन को संबोधित करते हुए तपन सेन ने कहा कि दुनिया का इतिहास गवाह है कि जितने भी परिवर्तन हुए हैं उसे मजदूरों ने हीं किया है, क्योंकि उनके हाथ में ही उत्पादन शक्ति होता है और वो ही परिस्थितियों को बदलने की ताकत रखता है। सीटू एक ऐसे ही सामाजिक व्यवस्था के लिए संघर्ष करता है जिसमें व्यक्ति का व्यक्ति के द्वारा शोषण ना हो।
बदलती परिस्थितियों का मजबूती से मुकाबला कर रहे हैं मजदूर
सीटू नेता तपन सेन ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार देश की मेहनतकश वर्ग के खिलाफ जिन नीतियों को लागू कर रही है, उन नीतियों के असर से अब मजदूर विरोधी परिस्थितियां निर्मित होने लगी है। इन बदलती परिस्थितियों के खिलाफ देश का मजदूर वर्ग मजबूती से मुकाबला कर रहा है।
कर्मियों के कंपोजिशन में हो रहा है लगातार बदलाव
पहले संयंत्र के अंदर स्थाई श्रमिक ही हुआ करते थे। धीरे-धीरे ठेका श्रमिक का प्रवेश संयंत्र में शुरू हुआ। आज संयंत्र के अंदर ठेका कर्मी ही सभी कार्य को बहुलता से कर रहे है। अब बदलती परिस्थितियों में फिक्स्ड टर्म एम्पलाइज की भर्ती शुरू की गई है। इंटर्न एवं अप्रेंटिस कर्मी की भी भर्ती हो रही है। जिनको मात्र स्टाइपेंड देकर स्थाई कर्मियों जैसा काम लिया जा रहा है और इन पर श्रम कानून भी लागू नहीं होता है। यह केंद्र सरकार के इशारे पर हो रहा है इसके खिलाफ मजबूती से लड़ा जाना बहुत जरूरी है।
शहीदों के नाम पर मंच, भवन का नामकरण
सम्मेलन स्थल का नाम एएल दत्ता नगर, भवन का नाम गोकुल प्रसाद, भवन एवं मंच का नाम जी रविंद्र मंच रखा गया, सम्मेलन की शुरुआत में यूनियन के अध्यक्ष विजय कुमार जांगड़े ने यूनियन का झंडा फहराया तत्पश्चात शहीद वेदी में पुष्प चढ़कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
शोक प्रस्ताव प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि दी गई। सम्मेलन की अध्यक्षता विजय कुमार जांगड़े, संतोष कुमार पुष्टि एवं डीवीएस रेड्डी ने किया।
सवाल-जवाब का सत्र भी चला
सम्मेलन का उद्घाटन सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तपन सेन ने किया। उसके पश्चात जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने महासचिव प्रतिवेदन एवं संतोष कुमार वर्मा ने आय व्यय का रिपोर्ट प्रस्तुत किया। रिपोर्ट पर 14 सदस्यों ने अपनी बातों को रखा।
महासचिव ने बहस का जवाब दिया। तत्पश्चात सर्वसम्मति से रिपोर्ट को पारित किया गया।
सम्मेलन के दौरान चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन के अंत में 65 सदस्य कार्यकारिणी समिति का चुनाव हुआ और अंत में नवनिर्वाचित महासचिव टी जोगाराव ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए संघर्षों को तेज करने की आह्वान के साथ सबका आभार व्यक्त किया।











