राजहरा आयरन ओर माइंस: कर्मचारी-ठेका मजदूर उतरे सड़क पर, डबल वेज प्रमोशन, ग्रेच्युटी, ईपीएफ, भत्तों की उठी आवाज

Rajhara Iron Ore Mines Employees and Contract Workers Protest, Demanding Double Wage Promotions, Gratuity EPF, Allowances
  • सीटू के नेतृत्व में खदान कर्मियों का विशाल प्रदर्शन, 22 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा।
  • चार्टर ऑफ डिमांड में नॉन फाइनेंशियल रिवॉर्ड स्कीम लागू करने, अतिरिक्त ड्यूटी पर डबल वेज, प्रमोशन, मेडिकल सुविधाओं की बहाली की मांग।

सूचनाजी न्यूज, राजहरा। सेल भिलाई स्टील प्लांट के आयरन ओर माइंस राजहरा के नियमित एवं ठेका कर्मचारियों की लंबित और जायज मांगों को लेकर सीटू (CITU) के नेतृत्व में शुक्रवार को खदान कार्यालय के सामने सैकड़ों कर्मियों ने विशाल प्रदर्शन किया।

आक्रोशित कर्मचारियों ने खदान प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्य महाप्रबंधक खदान को 22 सूत्रीय चार्टर ऑफ डिमांड सौंपा।

सीटू ने आरोप लगाया कि विगत कई वर्षों से खदान प्रबंधन का रवैया नियमित और ठेका कर्मचारियों के प्रति उदासीन और नकारात्मक बना हुआ है। बार-बार चर्चा और बैठकों के बावजूद समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। इसी के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि बीएसपी और खदान प्रबंधन द्वारा नियमित कर्मचारियों की मेडिकल और टाउनशिप सुविधाओं में लगातार कटौती की जा रही है। राजहरा माइंस हॉस्पिटल की बदहाल व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को हर माह एक तारीख को शिविरों में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है, जो एक महारत्न कंपनी के लिए शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भिलाई रेफरल पर अघोषित पाबंदी लगा दी गई है, जिससे कर्मचारियों को सेक्टर-9 अस्पताल में इलाज कराने में भी परेशानी हो रही है।

यूनियन सचिव पुरुषोत्तम सिमैया ने टाउनशिप की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि क्वार्टरों की मरम्मत और रखरखाव की स्थिति बेहद खराब है। कर्मचारी बिना पंखे के, टपकते आवासों में रहने को मजबूर हैं। साफ-सफाई व्यवस्था चौपट है, अवैध कब्जे और चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन प्रबंधन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा। खाली पड़े आवासों का आवंटन नहीं किया जा रहा, जिससे अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।

यूनियन संगठन सचिव प्रकाश सिंह क्षत्रिय ने ठेका श्रमिकों की समस्याओं पर कहा कि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद उन्हें उनका जायज हक नहीं मिल रहा है। पूरे वेतन पर 12 प्रतिशत ईपीएफ कटौती, आईपीडी मेडिकल सुविधा, ग्रेच्युटी भुगतान, बोनस और समय पर वेतन जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं। कई ठेकों में पांच-पांच महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। खदानों में रेस्ट रूम, कैंटीन, शुद्ध पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति भी बदहाल है।

सीटू ने चेतावनी दी कि यदि सौंपे गए चार्टर ऑफ डिमांड पर प्रबंधन ने गंभीरता से बैठक कर समाधान की दिशा में ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाए, तो यूनियन चरणबद्ध आंदोलन को और तेज करेगी, जो हड़ताल और कामबंदी तक जा सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी खदान प्रबंधन की होगी।

चार्टर ऑफ डिमांड में नॉन फाइनेंशियल रिवॉर्ड स्कीम लागू करने, अतिरिक्त ड्यूटी पर डबल वेज, प्रमोशन, मेडिकल सुविधाओं की बहाली, टाउनशिप सुधार, ठेका श्रमिकों के भत्तों में वृद्धि, ईपीएफ-ग्रेच्युटी भुगतान, आईपीडी सुविधा, समान कार्य के लिए समान वेतन सहित कुल 22 सूत्रीय मांगें शामिल हैं।