7 लाख 80 हजार पीएसयू कर्मचारियों के लिए पे रिवीजन कमेटी करें गठित, वादा निभाए केंद्र सरकार

Central Government Should Set Up a Pay Revision Committee for 780,000 PSU Employees and Fulfill its Promise
  • केंद्र सरकार को सभी पीएसयू कर्मचारियों के लिए एक समान व्यवस्था लागू कर पूर्ण औद्योगिक शांति सुनिश्चित करनी चाहिए।

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। देशभर के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) में कार्यरत करीब 7 लाख 80 हजार कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) ने लोक उपक्रम विभाग (DPE) के सचिव को पत्र लिखकर पूर्व में दिए गए उस लिखित आश्वासन को शीघ्र लागू करने की मांग की है, जिसमें नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों के लिए अलग से पे रिवीजन कमेटी गठित करने की बात कही गई थी।

संघ ने बताया कि वर्तमान में देश में 291 पीएसयू संचालित हैं, जिनका कुल टर्नओवर वित्त वर्ष 2024-25 में 37.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल लाभ 3.09 लाख करोड़ रुपये रहा। पीएसयू द्वारा सरकार और शेयरधारकों को 1.39 लाख करोड़ रुपये का लाभांश भी दिया गया है। इन उपक्रमों में 2,32,088 अधिकारी, 70,935 नॉन-यूनियनाइज्ड सुपरवाइजर, 25,481 यूनियनाइज्ड सुपरवाइजर, 7,83,728 गैर-कार्यपालक (स्किल्ड/अनस्किल्ड) कर्मचारी तथा 7,58,611 कैजुअल वर्कर कार्यरत हैं।

डीपीई ने पूर्व में बीएकेएस को लिखित आश्वासन दिया था

संघ के अनुसार, डीपीई द्वारा पूर्व में बीएकेएस को लिखित रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि अगली पे रिवीजन कमेटी के गठन के दौरान नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों के वेतन समझौते को भी ध्यान में रखा जाएगा। लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

अधिकारियों के लिए 3 पे रिवीजन कमेटियों का गठन हो चुका है

बीएकेएस ने चेताया कि वर्ष 2027 से अधिकांश पीएसयू में गैर-कार्यपालक कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन समझौता/वेज रिवीजन लंबित हो जाएगा, जिसके लिए डीपीई की स्पष्ट गाइडलाइन आवश्यक है।

वर्तमान में डीपीई केवल अधिकारी वर्ग के लिए पे रिवीजन कमेटी का गठन करता है, जिसमें लाभ, वहनीयता (Affordability), स्थिरता (Sustainability), न्यूनतम गारंटी लाभ (MGB), पर्क्स प्रतिशत, पीआरपी और अन्य सुविधाओं की स्पष्ट अनुशंसा होती है। अब तक अधिकारियों के लिए तीन पे रिवीजन कमेटियों का गठन किया जा चुका है।

वेज रिवीजन के लिए डीपीई की स्पष्ट गाइडलाइन नहीं

इसके विपरीत, कर्मचारियों के वेज रिवीजन के लिए न तो डीपीई द्वारा स्पष्ट गाइडलाइन जारी की जाती है और न ही सभी पीएसयू में समान लाभ दिए जाते हैं। वेतन वार्ता की मौजूदा प्रक्रिया को संघ ने खामियों से भरी बताते हुए कहा कि इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है।

सेल में भेदभाव का आरोप

-संघ ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2017 के वेज रिवीजन में अधिकारी वर्ग को तीसरे पीआरसी का पूरा लाभ (15% एमजीबी, 35% पर्क्स, फिटमेंट और पर्क्स का एरियर) दिया गया, जबकि कर्मचारी वर्ग को मात्र 13% एमजीबी और 26.5% पर्क्स तक सीमित रखा गया।

-अधिकारियों के पर्क्स अप्रैल 2020 से प्रभावी किए गए, जबकि कर्मचारियों के पर्क्स नवंबर 2021 से लागू कर एरियर को लगभग समाप्त कर दिया गया। इसी तरह पीआरपी और बोनस के भुगतान में भी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बड़ा अंतर बताया गया।

-संघ ने यह भी कहा कि डीपीई की मौजूदा गाइडलाइन में यूनियनाइज्ड वर्कमैन के लिए न्यूनतम एमजीबी, पर्क्स प्रतिशत, परफॉर्मेंस रिलेटेड पे और वेतन समझौते की समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जिससे प्रबंधन को वेतन समझौता वर्षों तक लटकाने का अवसर मिल जाता है।

औद्योगिक शांति स्थापित होगी

बीएकेएस का तर्क है कि यदि कर्मचारियों के लिए अलग से पे रिवीजन कमेटी गठित की जाती है तो पीएसयू में हड़ताल, प्रदर्शन और टूलडाउन जैसी स्थितियों में कमी आएगी, औद्योगिक शांति स्थापित होगी और कर्मचारियों का सिस्टम पर विश्वास बढ़ेगा। साथ ही वेतन वार्ता के नाम पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च और समय की भी बचत होगी।

संघ ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) में कार्यरत साढ़े सात लाख से अधिक कर्मचारियों के वेज रिवीजन-2027 के लिए अलग से पे रिवीजन कमेटी का गठन किया जाए।

जानिए अध्यक्ष हरिओम ने क्या कहा…

बोकारो अनाधिशासी कर्मचारी संघ-बीएकेएस अध्यक्ष हरिओम ने कहा कि अब कई महारत्न और नवरत्न पीएसयू जैसे ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, एनटीपीसी, पावरग्रिड और नालको ने नॉन-एग्जीक्यूटिव कर्मचारियों के वेज रिवीजन में भी पे रिवीजन कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करना शुरू कर दिया है। ऐसे में केंद्र सरकार को सभी पीएसयू कर्मचारियों के लिए एक समान व्यवस्था लागू कर पूर्ण औद्योगिक शांति सुनिश्चित करनी चाहिए।