- एक ही समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाना लोकतंत्र के विरुद्ध।
- अनैतिक दबाव बनाकर SIR प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर रही भाजपा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। दावा आपत्ति की अंतिम तिथि 22 जनवरी 2026 नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी के बूथ लेवल एजेंट (BLA) सुनियोजित तरीके से एक ही समुदाय के मतदाताओं के नाम विलोपित कराने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं। यह न केवल निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास भी है।
निर्वाचन नियमों के अनुसार फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति केवल उन्हीं मामलों में की जा सकती है, जहाँ नए नाम जुड़ने को लेकर संदेह हो। किंतु भाजपा के BLA उन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं जो वर्ष 2003 की मतदाता सूची में भी शामिल रहे हैं।
और SIR प्रक्रिया से गुजरते हुए सभी वैधानिक अहर्ताएँ पूर्ण कर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सम्मिलित किए गए हैं। बीएलओ और ईआरओ भी इन आपत्तियों को लेने से कतरा रहे हैं क्योंकि यह नियमविरुद्ध है।
भिलाई शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर के मुताबिक भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 65 के बूथ क्रमांक 1, 3 एवं 9 में भाजपा के BLA द्वारा एक-एक बूथ पर 60 से 70 मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि आपत्तिकर्ता का नाम पेन से भरा गया है, जबकि जिन मतदाताओं के नाम विलोपित करने की मांग की गई है वे प्रिंटेड फॉर्मेट में हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह पूरी प्रक्रिया भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर संचालित की जा रही है।
यह भी उल्लेखनीय है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पूर्व ए एस डी (अब्सेंट,शिफटेड,डेथ) सूची प्रकाशित की गई थी। उस समय इन भाजपाई BLA द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई, लेकिन अब अंतिम प्रकाशन से ठीक पहले द्वेषवश विशेष रूप से एक समुदाय एवं विपक्षी मतदाताओं को चिन्हित कर आपत्तियाँ लगाई जा रही हैं, जो SIR प्रक्रिया की भावना के पूर्णतः विपरीत है।
एक ही व्यक्ति द्वारा अपने हस्ताक्षर से सैकड़ों फॉर्म-7 भरकर आपत्ति करना, वह भी उन मतदाताओं पर जो सभी वैधानिक मापदंडों को पूरा करते हैं, स्पष्ट रूप से एक षड्यंत्र को दर्शाता है। यदि इस प्रकार की आपत्तियों को स्वीकार किया गया, तो SIR प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर आघात पहुँचेगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी से मांग की गई है कि वे इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए भाजपा के बीएलए द्वारा प्रस्तुत सभी नियमविरुद्ध एवं दुर्भावनापूर्ण आपत्तियों को एकमुश्त खारिज करें, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाता सूची की पवित्रता बनी रहे।











