BIG NEWS: मूल प्लान से छेड़छाड़ का आरोप, तालपुरी बी-ब्लॉक में बहुमंजिला परियोजना का विरोध तेज, रायपुर पहुंचे रहवासी

Big News Allegations of Tampering with the Original Plan Protests Intensify Against the Multi Storey Project in Talpuri B-Block, Residents Reach Raipur (1)
  • मूल स्वीकृत टाउन एंड कंट्री प्लान एवं कैटलॉग में प्रकाशित भू-उपयोग को यथावत रखा जाए।
  • बिना जन-सहमति के किसी भी प्रकार का भू-उपयोग परिवर्तन न किया जाए।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। तालपुरी बी-ब्लॉक में मूल स्वीकृत टाउन एंड कंट्री प्लान के विपरीत प्रस्तावित बहुमंजिला आवासीय-सह-व्यावसायिक परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। तालपुरी बी-ब्लॉक बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने संयोजक सुनील चौरसिया के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त से रायपुर जाकर मुलाकात कर इस प्रस्तावित विस्तार परियोजना पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और सैकड़ों कॉलोनीवासियों के हड़ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपा।

समिति का आरोप है कि जिस भूमि पर बहुमंजिला परियोजना का विज्ञापन प्रकाशित किया गया है, वह भूमि मूल स्वीकृत टाउन एंड कंट्री प्लान एवं हाउसिंग बोर्ड के कैटलॉग में केवल लोकल शॉपिंग/कमर्शियल क्षेत्र के रूप में दर्ज है। उसमें आवासीय उपयोग का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में बिना जन-सहमति भू-उपयोग परिवर्तन वादाखिलाफी और जनविरोधी कदम है।

प्रतिनिधि मंडल का कहना था कि, प्रस्तावित अतिरिक्त आवासीय इकाइयों से कॉलोनी के पहले से सीमित संसाधनों-जैसे सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज, विद्युत, पार्किंग एवं हरित क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।

जबकि कॉलोनी के समस्त आधारभूत ढांचे एवं भूमि विकास की लागत पहले ही मौजूदा रहवासियों से उनके मकानों के मूल्यों में जोड़कर वसूल की जा चुकी है। इतना ही नहीं, तालपुरी कॉलोनी (ए एवं बी ब्लॉक) की कुल 129 एकड़ भूमि, जो भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से क्रय की गई थी, उसकी लागत भी वर्तमान मकानों के मूल्य में सम्मिलित कर रहवासियों से वसूल की जा चुकी है।

इस प्रकार, भले ही विधिक रूप से भूमि हाउसिंग बोर्ड के नाम पर पंजीकृत हो, किंतु सैद्धांतिक एवं नैतिक रूप से कॉलोनी की सम्पूर्ण भूमि पर वर्तमान मकान मालिकों का सामूहिक अधिकार स्थापित होता है, और हाउसिंग बोर्ड की भूमिका मात्र एक कस्टोडियन की है।

समिति का यह भी आरोप था कि, हाउसिंग बोर्ड अपने मूल गैर-लाभकारी उद्देश्य से भटककर उक्त व्यावसायिक भूमि पर वृहद आवासीय परियोजना लाकर लाभ अर्जित करना चाहता है।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी स्मरण कराया कि कॉलोनी निर्माण के दौरान ग्रीन बेल्ट मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ था, उसके बावजूद बाद में मकानों से लगी बाजू एवं पीछे की हरित भूमि को विक्रय कर दिया गया, जिससे कॉलोनी में निर्धारित हरित क्षेत्र लगातार सिकुड़ता चला गया।

अंत में समिति की ओर से मांग की गई कि मूल स्वीकृत टाउन एंड कंट्री प्लान एवं कैटलॉग में प्रकाशित भू-उपयोग को यथावत रखा जाए तथा बिना जन-सहमति के किसी भी प्रकार का भू-उपयोग परिवर्तन न किया जाए।

उक्त ज्ञापन की प्रतिलिपि अगले दिन छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अतिरिक्त आयुक्त आरके राठौड़ एवं संयुक्त संचालक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग सूर्यभान सिंह ठाकुर को भी सौंपी गई।

इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में सुनील चौरसिया, गिरिराज देशमुख, के.एन. दिवाकर, काशीराम देशमुख, सुरेश बंछोर, सत्येन पसीने, के.के.एन. सिंह, सुरेश पिल्ले, चिरनजीत चौधरी, आई.के. सिंह, सी.के. खांडेकर, एस.एल. वर्मा, तोरणलाल सिन्हा, जे.के. अधिकारी सहित अन्य कॉलोनीवासी उपस्थित रहे।