- वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक कैपेक्स प्रस्तावित।
- 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, एक समर्पित मालवाहक गलियारा और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग प्रस्तावित।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड से निजी डेवलेपरों के विश्वास को बढ़ावा मिलेगा।
- सीप्लेन के स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सीप्लेन वीजीएफ स्कीम लागू होगी।
अज़मत अली, भिलाई। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। शेयर बाजार तो औंधे मुंह गिरा, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर हुई घोषणाओं ने स्टील सेक्टर की उम्मीदें बढ़ा दी है।
देश की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल को सीधा फायदा होने जा रहा है। 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से भिलाई स्टील प्लांट को रेल पटरी का ऑर्डर मिलेगा। रेल-सेल की दोस्ती की डोर भिलाई स्टील प्लांट रेल पटरी से ही मजबूत किए हुए है।
रेलवे के लिए सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बना रहे हैं। साउथ में चेन्नई-बेंगलुरु-हैदराबाद ट्रायंगल, नॉर्थ में दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी और मुंबई-पुणे-हैदराबाद का मेजर कॉरिडोर है। इन शहरों की कुल दूरी 3844 किलोमीटर है। यानी साढ़े 3 हजार किलोमीटर से ज्यादा की रेल लाइन बिछाई जाएगी, जिसके लिए सेल भिलाई स्टील प्लांट ही रेल पटरी की सप्लाई करेगा।
साथ ही, बंगाल में दानकुनी से गुजरात में सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, ईस्ट को वेस्ट से जोड़ेगा। इसकी दूरी 2,099 km है। इससे भी भिलाई स्टील प्लांट को बड़ा ऑर्डर मिलेगा। दुर्गापुर स्टील प्लांट रेलगाड़ी का पहिया बनाता है। बोकारो स्टील प्लांट और सेलम स्टील प्लांट रेलवे के लिए स्पेशल स्टील की सप्लाई करते हैं। आरएसपी और आइएसपी के प्रोडक्ट भी इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होते हैं।
जानिए 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की दूरी
I) मुम्बई-पुणे: 155 km
II) पुणे-हैदराबाद: 556 km
III) हैदराबाद-बेंगलूरु: 575 km
IV) हैदराबाद-चेन्नई: 634km
V) चेन्नई-बेंगलूरु: 348 km
VI) दिल्ली-वाराणसी: 874 km
VII) वाराणसी-सिलीगुड़ी: 702 km
कुल 3844 किलोमीटर रेल लाइन
इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट से अधिक संभावनाएं
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सार्वजनिक कैपेक्स वित्त वर्ष 2014-15 के 2 लाख करोड़ रुपये से कई गुना बढ़कर बजट अनुमान 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये के आवंटन तक पहुंच गया और इसकी गति बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में इसे 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
उन्होंने संसद को बताया कि पिछले दशक के दौरान सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) जैसे नये वित्त पोषण इंस्टूमेंट्स और एनआईआईएफ तथा एनएवीएफआईडी जैसे संस्थानों सहित व्यापक स्तर पर सार्वजनिक बुनियादी ढ़ांचे में वृद्धि के लिए कई पहल की हैं।
पिछले कुछ वर्षों में आरईआईटी एसेट मॉनेटाइजेशन के लिए एक सफल इंस्टूमेंट के रूप में उभरा है। बजट 2026-27 में डेडिकेटेड आरईआईटी की स्थापना के माध्यम से सीपीएससी के महत्वपूर्ण रियल एस्टेट एसेट्स की रिसाइक्लिंग में तेजी लाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड
बुनियादी ढ़ांचा विकास तथा निर्माण चरण के दौरान जोखिमों को लेकर निजी डेवलेपरों के विश्वास को मजबूत करने के लिए ऋणदाताओं को विवेकपूर्ण संयोजित आंशिक क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड का प्रस्ताव रखा गया है।
कार्गो की पर्यावरणीय रूप से सतत आवाजाही
इस उद्देशय को बढ़ावा देने के लिए बजट में पूरब में डानकुनी तथा पश्चिम में सूरत से कनेक्ट करने के लिए नए डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर की स्थापना करने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही यह बजट अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जल मार्गों (एनडब्ल्यू) को प्रचालित करने का भी प्रस्ताव रखा है।
ऐसी परिकल्पना की गई है कि यह ओडिशा में एनडब्ल्यू-5 से आरंभ कर तलचर और अंगूल के खनिज अवयव समृद्ध क्षेत्रों तथा कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केन्द्रों से पारादीप और धमरा के बंदरगाहों को जोड़ेगा। अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय शिपिंग के हिस्से को 2047 तक 6 प्रतिशत से 12 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने रेल और सड़क से एक मॉडल शिफ्ट को प्रोत्साहित करने के लिए एक तटीय कार्गो संवर्धन स्कीम लॉन्च करने का प्रस्ताव रखा।
बनारस और पटना में जहाज मरम्मत इकोसिस्टम स्थापना
निर्मला सीतारमण ने कहा कि आवश्यक श्रमबल के विकास के लिए उत्कृष्टता के क्षेत्रीय केन्द्रों के रूप में प्रशिक्षण संस्थानों की भी स्थापना की जाएगी जो प्रशिक्षित करने तथा कौशल हासिल करने के जरिए जलमार्ग के पूरे क्षेत्र में युवाओं को लाभान्वित करेगा। इसके अतिरिक्त अंतर्देशीय जलमार्गों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए वाराणसी एवं पटना में एक जहाज मरम्मत इकोसिस्टम की भी स्थापना करने का प्रस्ताव है।
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
पर्यावरणीय रूप से सतत यात्री प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में I) मुम्बई-पुणे, II) पुणे-हैदराबाद, III) हैदराबाद-बेंगलूरु, IV) हैदराबाद-चेन्नई, V) चेन्नई-बेंगलूरु, VI) दिल्ली-वाराणसी, VII) वाराणसी-सिलीगुड़ी हैं, जैसे शहरों जिन्हें “ग्रोथ कनेक्टर्स” भी कहा जाता है, के बीच 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
सीप्लेन वीजीएफ स्कीम
समग्र और दूरस्थ कनेक्टविटी तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निर्मला सीतारमण ने सीप्लेन के विनिर्माण के स्वदेशीकरण को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव रखा और कहा कि प्रचालनों को सहायता देने के लिए सीप्लेन वीजीएफ स्कीम की जाएगी।
कार्बन कैप्चर उपयोग एवं भंडारण (सीसीयूएस)
वित्त मंत्री ने कहा कि दिसम्बर, 2025 में आरंभ की गई रुपरेखा के साथ संयोजित, व्यापक स्तर पर सीसीयूएस प्रौद्योगिकियां बिजली, स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन समेत 5 औद्योगिक सेक्टरों में अंतिम-उपयोग अनुप्रयोगों में उच्चतर तैयारी स्तर अर्जित करेंगी। बजट में इसके लिए अगले 5 वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव रखा गया।
शहर आर्थिक क्षेत्र
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के शहर इसके विकास, नवोन्मेषण एवं अवसरों के वाहक हैं। बजट में अब टियर-II और टियर-III तथा यहां तक कि मंदिर-शहरों, जिन्हें आधुनिक अवसंरचना एवं मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, पर भी ध्यान केन्द्रित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
बजट का लक्ष्य उनके विशिष्ट विकास कारकों के आधार पर, शहरी आर्थिक क्षेत्रों (सीईआर) का मानचित्रण करके समूहों की आर्थिक शक्ति उपयोग करने के लिए शहरों की क्षमता को और अधिक बढ़ाना है। वित्त मंत्री ने इसके कार्यान्वयन के लिए अगले 5 वर्षों में प्रति सीईआर 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव रखा है।











