DPS किसी की जागीर नहीं है, भिलाईवासियों द्वारा भिलाई के लिए बना, भ्रष्टाचार का संकेत, BSP-प्रशासन को चेतावनी

Allegations of Corruption at DPS Bhilai Congress Leader Warns BSP District Administration
  • यदि शासन-प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन डीपीएस में हो रही अनियमितताओं पर रोक नहीं लगाई तो होगा उग्र जन आंदोलन।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। नगर पालिका निगम के प्रभारी महापौर परिषद सदस्य, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष सीजू एन्थोनी ने दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), भिलाई में चल रही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाया है।

पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार की संभावना को रोका जा सके।

सीजू एन्थोनी ने मांग की है कि डीपीएस में रिक्त पदों की संख्या, प्रत्येक पद के लिए प्राप्त आवेदनों की संख्या, विषयवार प्राप्त आवेदन तथा सीबीएसई के मापदंडों को पूरा करने वाले और न करने वाले सभी अभ्यर्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि डीपीएस एक सार्वजनिक क्षेत्र का प्रतिष्ठान है, जिसे भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) द्वारा गठित शिक्षण समिति संचालित करती है, जिसके अध्यक्ष बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि डीपीएस को बीएसपी प्रबंधन द्वारा रियायती दरों पर जल, जमीन, चिकित्सा सुविधा और आवास उपलब्ध कराए गए हैं। स्कूल में लगभग 50 प्रतिशत विद्यार्थी बीएसपी कर्मियों के बच्चे हैं।

इसलिए यह एक अत्यंत संवेदनशील मामला है। ऐसे में अधिकांश अधिकार उस प्राचार्य के हाथों में होना, जो मात्र एक माह में सेवा निवृत्त होने वाला है, कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इतने कम समय के लिए शेष सेवा वाले अधिकारी द्वारा वर्षों के लिए भावी शिक्षकों की नियुक्ति करना उचित नहीं है।

सीजू एन्थोनी ने जिला प्रशासन, बीएसपी प्रबंधन और डीपीएस सोसायटी से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार न हो। इसके लिए सभी प्राप्त आवेदनों की सूची-जो आगे की चयन प्रक्रिया के लिए स्वीकृत या अस्वीकृत की गई है। डीपीएस की वेबसाइट और स्कूल परिसर के सार्वजनिक सूचना पटल पर चस्पा की जाए।

साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि आगे की भर्ती प्रक्रिया में सेवा निवृत्त होने वाले प्राचार्य के स्थान पर स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक को शामिल किया जाए, ताकि संस्था की गरिमा और साख बनी रहे।

उन्होंने पूर्व में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत हुए प्रवेश में कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय गरीब विद्यार्थियों से वसूली गई अतिरिक्त राशि 1440 रुपये लौटानी पड़ी थी, जिससे यह प्रमाणित होता है कि डीपीएस प्रबंधन में अनियमितताओं की आशंका पहले भी रही है।

उन्होंने मांग की कि स्कूल प्रबंधन से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों की संपत्ति की जांच की जाए और स्कूल में हुए निर्माण एवं संधारण कार्यों में संभावित भ्रष्टाचार की अलग से विस्तृत जांच कराई जाए।

सीजू एन्थोनी ने जिला प्रशासन को सतर्क करते हुए कहा कि निर्धन छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और गरीबों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने बीएसपी प्रबंधन से अपील की कि वह डीपीएस की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में मूक दर्शक न बने और उचित हस्तक्षेप कर संभावित भ्रष्टाचार को रोके।

उन्होंने चेतावनी दी कि डीपीएस किसी की जागीर नहीं है, बल्कि भिलाईवासियों द्वारा भिलाईवासियों के लिए बनाया गया एक गौरवशाली शिक्षण संस्थान है। यदि शासन-प्रशासन और बीएसपी प्रबंधन डीपीएस में हो रही अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए ठोस और सार्थक कदम नहीं उठाते हैं, तो उग्र जन आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।