- यूनियन ने ट्रस्ट चेयरमैन से मामले की पुनर्समीक्षा कर कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
- सेल प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
- कर्मचारियों की सहमति के बिना संचित राशि को NPS में स्थानांतरित करना ट्रस्ट नियमों का उल्लंघन है।
सूचनाजी न्यूज, दुर्गापुर। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (Steel Authority of India Limited) के कर्मचारियों-अधिकारियों से जुड़े सेवानिवृत्ति कोष SESBF ट्रस्ट की 86वीं बैठक में लिए गए निर्णय को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP) की ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि ने ट्रस्ट को भंग कर लगभग 2400 करोड़ रुपये की संचित राशि को NPS में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
हिंदुस्थान स्टील एम्प्लॉयीज यूनियन, दुर्गापुर (HSEU), जो कि CITU से संबद्ध है, के नामित ट्रस्टी सिमंता चटर्जी ने 13 फरवरी 2026 को एसईएसबीएफ ट्रस्ट के चेयरमैन को पत्र लिखकर 86वीं बैठक के प्रकाशित मिनट्स पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा है कि ट्रस्ट को भंग करने और संपूर्ण कोष को NPS में स्थानांतरित करने का निर्णय ट्रस्ट डीड के प्रावधानों के विपरीत है।
1994 में कर्मचारियों के हित में बना था ट्रस्ट
पत्र में बताया गया है कि SESBF ट्रस्ट की स्थापना 15 सितंबर 1994 को ट्रस्ट डीड के माध्यम से की गई थी। इस ट्रस्ट का गठन सेल कर्मचारियों के हित में किया गया था और इसमें विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, SEFI तथा सभी इकाइयों के मान्यता प्राप्त यूनियन प्रतिनिधियों को ट्रस्टी बोर्ड में शामिल किया गया था। दुर्गापुर स्टील प्लांट से उस समय यूनियन के प्रतिनिधि मृणाल बंद्योपाध्याय ट्रस्ट डीड के हस्ताक्षरकर्ता थे।
यह कोष मुख्य रूप से कर्मचारियों के मासिक वेतन से 2 प्रतिशत अंशदान के आधार पर बनाया गया था। कुछ अवसरों पर कंपनी द्वारा भी PLBS के नाम पर अंशदान किया गया।
सर्वसम्मति जरूरी, पर नहीं बनी सहमति
ट्रस्ट डीड की धारा 18 (Termination of Trust) का हवाला देते हुए यूनियन प्रतिनिधि ने कहा है कि ट्रस्ट को समाप्त करने का निर्णय तभी मान्य होगा जब सभी ट्रस्टी सर्वसम्मति से निर्णय लें। लेकिन 86वीं बैठक में सर्वसम्मति नहीं बनी। स्वयं उन्होंने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि CITU के एक अन्य प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हो सके।
पत्र में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट एक “Irrevocable Trust” है, जिसे केवल बोर्ड बैठक के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। ट्रस्ट डीड के अनुसार, यदि ट्रस्ट समाप्त होता है तो ट्रस्ट की संपत्तियों और निवेश को प्रत्येक सदस्य को उनके अंशदान और ब्याज के अनुसार हस्तांतरित किया जाना चाहिए, न कि किसी अन्य योजना में सामूहिक रूप से स्थानांतरित किया जाए।
कर्मचारियों की सहमति के बिना निर्णय का आरोप
यूनियन ने आरोप लगाया है कि कर्मचारियों की सहमति के बिना संचित राशि को NPS में स्थानांतरित करना ट्रस्ट नियमों का उल्लंघन है। दुर्गापुर स्टील प्लांट के कर्मचारियों का मानना है कि यह निर्णय उनके वित्तीय हितों के खिलाफ है और भविष्य में उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
यूनियन ने ट्रस्ट चेयरमैन से मामले की पुनर्समीक्षा कर कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सेल प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।















