सीटू को गंभीर आशंका है कि ग्रेडिंग प्रणाली का उपयोग एक निष्पक्ष मूल्यांकन उपकरण के बजाय “प्रबंधन का हथियार” बन जाएगा।
- सभी कर्मचारियों को उनकी व्यक्तिगत ग्रेडिंग और विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तक तत्काल और पूर्ण पहुंच प्रदान की जाए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मियों को दिए जाने वाले ग्रेडिंग को छुपाने का हिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉइज यूनियन (सीटू) ने कड़ा विरोध किया है। ईडी एचआर पवन कुमार से मिलनक समय मांग लिया है। मांग पत्र आइआर विभाग को सौंपकर कर्मचारियों का दुखड़ा सुनाया है।
सीटू महासचिव टी. जोगा राव ने कहा-भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत कर्मचारियों के कार्य मूल्यांकन (ग्रेडिंग) को उनसे छिपाकर रखना न केवल पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का भी हनन है। किसी भी संस्थान में निष्पक्ष और स्पष्ट मूल्यांकन प्रणाली कर्मचारियों के मनोबल, विश्वास और कार्यक्षमता को बढ़ाने का आधार होती है। लेकिन वर्तमान स्थिति में प्रबंधन द्वारा अपनाई जा रही गोपनीयता कर्मचारियों के बीच असंतोष, अविश्वास और असुरक्षा का माहौल पैदा कर रही है।
सीटू पहले भी उठा चुका है ग्रेडिंग को कर्मचारियों को दिखाने की मांग
सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने कहा-प्रबंधन द्वारा कर्मचारी विरोधी नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी के लागू करने के बाद सीटू ने उस पॉलिसी में दर्ज ग्रेडिंग सिस्टम पर सवाल उठाया था। साथ ही कार्यपालक निदेशक संकार्य को 12 अप्रैल 2025 को दिए गए पत्र में ग्रेडिंग सिस्टम के दुष्परिणामों के संदर्भ में पत्र प्रेषित किया था और प्रबंधन द्वारा कर्मियों को दिए जाने वाले ग्रेडिंग को कर्मचारियों को दिखाने की मांग करते हुए कहा था कि अधिकारियों के तर्ज पर ही कर्मचारियों को भी उनके मूल्यांकन के आधार पर दिए गए ग्रेडिंग को देखने एवं सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए। किंतु प्रबंधन इस मुद्दे पर हमेशा गोल-मोल उत्तर ही देता रहा।
प्रबंधन हथियार के रूप मे इस्तेमाल कर सकता है ग्रेडिंग प्रणाली को
यूनियन को यह गंभीर आशंका है कि ग्रेडिंग प्रणाली का उपयोग एक निष्पक्ष मूल्यांकन उपकरण के बजाय एक “प्रबंधन के हथियार” के रूप में किया जा रहा है। मनमाने ढंग से कर्मचारियों को कम ग्रेड देना, भविष्य में “कंपलसरी रिटायरमेंट” (जबरिया सेवानिवृत्ति) जैसे कठोर और अन्यायपूर्ण कदमों को लागू करने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। यह न केवल श्रमिक हितों पर हमला है, बल्कि रोजगार की स्थिरता को कमजोर करने और श्रमिकों में भय का वातावरण बनाने का प्रयास भी है।
हिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉइज यूनियन (सीटू) की मांग
1) सभी कर्मचारियों को उनकी व्यक्तिगत ग्रेडिंग और विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तक तत्काल और पूर्ण पहुंच प्रदान की जाए।
2) मूल्यांकन के मापदंडों, प्रक्रिया और निर्णय लेने के आधार को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।
3) ग्रेडिंग प्रक्रिया में यूनियन की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
4) किसी भी प्रकार के “कंपलसरी रिटायरमेंट” या कर्मचारियों को जबरन हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
5) श्रमिक हितों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णयों में श्रमिक प्रतिनिधियों की सहमति को अनिवार्य किया जाए।
औद्योगिक अशांति का कारण ना बन जाए प्रबंधन का कदम
यूनियन ने प्रबंधन को चेताया कि यदि इन जायज और लोकतांत्रिक मांगों की अनदेखी की जाती है, तो कर्मचारियों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर लोकतांत्रिक और वैधानिक संघर्ष का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
भिलाई इस्पात संयंत्र देश की औद्योगिक रीढ़ है और यहां के श्रमिक इसकी असली ताकत हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि औद्योगिक शांति और उत्पादन व्यवस्था के लिए भी घातक साबित होगा।








