- स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर, उपाध्यक्ष अजय कुमार पांडेय को सेल प्रबंधन से मिला आश्वासन।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के अधिकारियों और कर्मचारियों के आश्रित बच्चों को लेकर अच्छी खबर है। कार्मिक के निधन के बाद अब उनके बच्चों का भी उपचार सेल के अस्पताल में हो सकेगा। इस बाबत सेल प्रबंधन की ओर से सर्कुलर जारी होने की संभावना है। किसी दिन भी आदेश जारी किया जा सकता है।
स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर, उपाध्यक्ष अजय कुमार पांडेय को सेल प्रबंधन की ओर से आश्वासन दिया गया है। सेल-सेफी की पहली मीटिंग में इस मामले को अजय कुमार पांडेय ने प्रमुखता से उठाया था। इस मांग को प्रबंधन ने प्रमुखता से लिया था, जिसका परिणाम यह है कि इसे स्वीकार करने का आदेश निर्गत किया जाएगा।
आदेश जारी होने के बाद कार्मिकों के छोटे बच्चों को सीधेतौर पर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा। 25 साल की आयु तक सेल के किसी भी अस्पताल में उपचार किया जा सकेगा। इस तरह का प्रावधान सेल में न होने से कार्मिक के बच्चों का उपचार सेल के अस्पताल में नहीं होता है।
सेफी पदाधिकारियों की सेल चेयरमैन व डायरेक्टर पर्सनल के साथ हुई मीटिंग में एक और मांग उठाई गई है। आश्रित की नौकरी का मुद्दा उठाया गया। कैंसर, किडनी फेल होने पर आश्रित को नौकरी देने का प्रावधान है, लेकिन मेडिकल बोर्ड की वजह से परिवार को लाभ नहीं मिल पाता है। पिछले दिनों बोकारो स्टील प्लांट के डिप्टी मैनेजर एके अवस्थी के मामले में परिवार को नुकसान हुआ। जब तक मेडिकल बोर्ड की टीम भेजने का निर्णय हुआ था, तबतक कार्मिक की मौत स्टेज 4 कैंसर से हो गई। आश्रित को नौकरी तक नहीं मिल सकती।
अधिकारी का स्वास्थ्य खराब होने पर सीएमसी वेल्लूर में रेफर किया गया। वहां जांच में पता चलता है कि गंभीर बीमारी है। जैसे-स्टेज 4 कैंसर। मेडिकल साइंस स्टेज 4 केंसर में बायोप्सी के लिए मना करता है। दूसरी तरफ मेडिकल बोर्ड बिना बायोप्सी के अनफिट घोषित नहीं करता है। इस तरह आश्रित को मिलने वाली सुविधा यानी नौकरी नहीं मिल पाती है।














