- केंद्र सरकार के कर्मयोगी पोर्टल में केवल अंग्रेज़ी भाषा में प्रश्न पूछे जा रहे है, जो चिंता का विषय है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात मजदूर संघ के उपाध्यक्ष शारदा गुप्ता ने मांग की है कर्मयोगी पोर्टल में भाषा बाधा हो रही है। इसलिए हिंदी में विकल्प दिया जाए, ताकि भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों को सहूलियत प्रदान हो सके।
इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा गया है। विदित हो कि केंद्र सरकार के कर्मयोगी पोर्टल में केवल अंग्रेज़ी भाषा में प्रश्न पूछे जा रहे है, जो चिंता का विषय है। मातृभाषा हिंदी है और भिलाई इस्पात संयंत्र भी हिंदी में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करता है। अधिकांश कर्मचारियों की मातृभाषा हिंदी होने के कारण उन्हें प्रश्न समझने और सही उत्तर देने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब कार्यस्थल पर हिंदी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब इस प्रकार के महत्वपूर्ण प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन प्लेटफॉर्म पर हिंदी भाषा का विकल्प न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल कर्मचारियों का आत्मविश्वास प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनकी वास्तविक क्षमता का आकलन भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।
कर्मचारी संगठनों एवं प्रतिनिधियों ने प्रबंधन से मांग की है कि कर्मयोगी पोर्टल में हिंदी भाषा का विकल्प अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। सभी प्रश्नों का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराया जाए। कर्मचारियों के लिए हिंदी में प्रशिक्षण सामग्री भी प्रदान की जाए।
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को किसी प्रकार की भाषा संबंधी परेशानी न हो और वे बेहतर तरीके से अपने कौशल का प्रदर्शन कर सकें। मांग करने वालों में प्रमुख रूप से शारदा गुप्ता, आईपी मिश्रा, विनोद उपाध्याय, हरिशंकर चतुर्वेदी, वशिष्ठ वर्मा, नेहरू साहू, जॉन ऑथर, अविनाश, गौरव कुमार, मृगेंद्र कुमार,अखिलेश उपाध्याय, केके सिंह, अनिल सिंह, राजेश पांडे, कुलदीपक तिवारी, विमलेश्वर पांडे आदि शामिल हैं।















