अडानी ग्रुप को मिला BHILAI का साथ, अब क्वालिटी सर्कल पर मिलाया हाथ, पढ़ें डिटेल

QCFI Bhilai Chapter to Play a key Role in Implementation of Integrated Safety Circle in Various Units of Adani Group
  • क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर अब अडानी समूह की विभिन्न इकाइयों के कर्मचारी को सुरक्षा तंत्र का एक सक्रिय भागीदार बनाना है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। औद्योगिक सुरक्षा मानकों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, क्वालिटी सर्कल फोरम ऑफ इंडिया (क्यूसीएफआई), भिलाई चैप्टर ने अडानी समूह के साथ मिलकर ‘इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल’ (आईएससी) अभियान शुरू करने के लिए आधिकारिक साझेदारी की है। इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ मार्च 2026 के चौथे सप्ताह में अहमदाबाद स्थित ‘अडानी कॉर्पोरेट हाउस’ में किया गया, जो दोनों संगठनों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

इस कार्यक्रम में अडानी समूह और क्यूसीएफआई के शीर्ष नेतृत्व ने शिरकत की। अनिल सरदाना: एमडी (अडानी पावर लिमिटेड एवं अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड), सीईओ-एनएमडी (धारावी), और ग्रुप सर्विस हेड (बिजनेस एक्सीलेंस एवं सेफ्टी), जयंत परिमल: सीईओ, पेट्रो-केमिकल्स,सी.पी. साहू: सीईओ, एआईएमएसएल, ऋतुराज मेहता: ग्रुप हेड-सेफ्टी, अडानी समूह, जयदेव नंदा: सलाहकार, अडानी पावर लिमिटेड,श्री अविनाश मिश्रा: अध्यक्ष, क्यूसीएफआई डी.के.श्रीवास्तव: कार्यपालक निदेशक, क्यूसीएफआई,जी.पी.सिंह: सचिव, क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर। इसके साथ ही अडानी समूह के विभिन्न प्लांट हेड और अन्य गणमान्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सुरक्षित कार्यस्थल का दृष्टिकोण

अडानी समूह के सुरक्षा प्रमुख ऋतुराज मेहता ने स्वागत भाषण में आधुनिक औद्योगिक परिचालन में आईएससी की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य अतिथि श्री अनिल सरदाना ने अपने संबोधन में कहा कि दैनिक जीवन और कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ‘जोखिम की धारणा’ (Risk Perception) सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने ऊंचाई पर काम करने और सीमित स्थानों (Confined Space) के उदाहरण देते हुए बताया कि फिसलन और गिरने जैसी सामान्य दुर्घटनाओं को तब पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है जब कर्मचारी स्वयं सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर एक-दूसरे को सुरक्षित कार्य करने के लिए प्रेरित करें।

क्यूसीएफआई भिलाई: आईएससी अवधारणा का प्रणेता

क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर इस आईएससी अवधारणा का मुख्य शिल्पकार और प्रणेता है। जी. पी. सिंह (सचिव, भिलाई चैप्टर), जो आईएससी कॉन्सेप्ट को विकसित करने वाले प्रमुख व्यक्तियों मे शामिल हैं, ने बताया कि यह मॉडल मौजूदा ‘लीन सेफ्टी सर्कल’ और ‘जोखिम धारणा’ का एक अनूठा संगम है। आईएससी ढांचा तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है: इन्फोर्म्ड कल्चर,रिपोर्टिंग कल्चर, अनुभवात्मक शिक्षण कल्चर।

जीपी सिंह ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “सुरक्षा संस्कृति में वास्तविक बदलाव तब दिखेगा, जब हम यह पूछना बंद कर देंगे कि प्रबंधन कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए क्या कर रहा है, और यह देखना शुरू करेंगे कि कर्मचारी अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए क्या कर रहा है।”

सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड

लाई चैप्टर की विशेषज्ञता पूरे देश में सर्वविदित है। इनके मार्गदर्शन में सेल मे जून 2024 में अपनी सभी इकाइयों में ‘सेल इंटीग्रेटेड सेफ्टी सर्कल’ लागू करने वाला भारत का पहला संगठन बना। भिलाई चैप्टर वर्तमान में सेल-डीएसपी,आरएसपी,बीएसएल, बीआरपी, नालको, एनएमडीसी स्टील, जिंदल पावर, जिंदल स्टेनलेस, ओडिशा माइनिंग कॉर्पोरेशन, सारडा एनर्जी, जेएनआईएल और एमएसपी स्टील जैसे दिग्गज उद्योगों में आईएससी लागू करने में सहयोग कर रहा है।

आगामी कदम

इस सफल शुरुआत के बाद, क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर अब अडानी समूह की विभिन्न इकाइयों में व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। इन सत्रों का उद्देश्य प्रत्येक कर्मचारी को सुरक्षा तंत्र का एक सक्रिय भागीदार बनाना है।

क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर: श्रेष्ठता का सफर

क्यूसीएफआई भिलाई चैप्टर के पीआरओ सत्यवान नायक ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि भिलाई चैप्टर भारतीय उद्योगों में गुणवत्ता और सुरक्षा अवधारणाओं को बढ़ावा देने वाली एक अग्रणी संस्था है। यह चैप्टर 5 बार ‘सर्वश्रेष्ठ चैप्टर अवार्ड’ का विजेता रहा है। आईएससी के प्रणेता के रूप में, यह विश्व स्तरीय सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण और कार्यान्वयन रणनीतियां प्रदान करता है।