- IIT Kanpur, IIT Bombay, IIT Delhi, NIT Trichy और ISM Dhanbad जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। भारत के स्टील सेक्टर को तकनीकी रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। स्टील मंत्रालय और प्रमुख स्टील कंपनियों की संयुक्त पहल Steel Research & Technology Mission of India (SRTMI) द्वारा “SRTMI R&D Connect: From Ideas to Industrial Impact” शीर्षक से उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री H. D. Kumaraswamy ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में स्टील सेक्टर की भूमिका अहम है और अब इसे पारंपरिक विकास से आगे बढ़ाकर ग्रीन डिकार्बोनाइजेशन और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में ले जाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि रिसर्च सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर जमीन पर लागू होनी चाहिए।
कार्यशाला में देश के प्रमुख स्टील उत्पादक जैसे Steel Authority of India Limited (SAIL), Tata Steel, JSW Steel और Steel Industry Manufacturers Association सहित कई उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। वहीं अकादमिक क्षेत्र से IIT Kanpur, IIT Bombay, IIT Delhi, NIT Trichy और ISM Dhanbad जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
स्टील मंत्रालय के सचिव Sandeep Poundrik ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जहां स्टील उद्योग चुनौतियों से गुजर रहा है, वहीं भारत तेज़ी से बढ़ते बाजार के रूप में उभर रहा है। ऐसे में R&D में निवेश कर भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।
SRTMI के अध्यक्ष और SAIL के निदेशक (माइंस) M. R. Gupta ने मिशन मोड में तकनीकी विकास, पायलट प्रोजेक्ट्स और तेजी से व्यावसायीकरण पर जोर दिया, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़े, लागत घटे और स्थिरता मजबूत हो। कार्यक्रम में Ashish Chatterjee, Abhijit Narendra और Krishna Kumar Singh समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
वर्कशॉप की प्रमुख बातें
स्टार्टअप पिच सेशन: नए स्टार्टअप्स ने प्रोसेस सुधार, डिजिटलीकरण और वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े समाधान पेश किए।
इंडस्ट्री रोडमैप: कंपनियों ने ग्रीन स्टील, संसाधन दक्षता और डिकार्बोनाइजेशन पर फोकस रखते हुए समस्याएं और समाधान रखे।
तकनीकी प्रस्तुतियां: IIT और NIT के विशेषज्ञों ने सर्कुलर इकोनॉमी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर विचार साझा किए।
पोस्टर प्रेजेंटेशन: छात्रों, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने अपने नवाचार प्रदर्शित किए।
वर्कशॉप में 180 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया
यह आयोजन रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से भविष्य में नई साझेदारियां बनेंगी, तकनीकी विकास तेज होगा और भारत का स्टील सेक्टर नवाचार और स्थिरता के साथ वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाएगा।













