हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भी डॉ. द्विवेदी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने हिंदी साहित्य से जुड़ी कई पुस्तकों की रचना की।
- वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. हरिहर नाथ द्विवेदी का निधन, शिक्षा और हिंदी साहित्य जगत में शोक।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल भिलाई स्टील प्लांट के जीएम एचआर संजय द्विवेदी के पिता जी का निधन हो गया है। वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. हरिहर नाथ द्विवेदी के निधन से शिक्षा और हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है। लखनऊ स्थित आवास में निधन हुआ है। अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट या कानपुर में गंगा तट पर किया जाएगा। संजय द्विवेदी की बहन अमेरिका में रहती हैं। स्वदेश लौटने का इंतजार किया जा रहा है।
डाक्टर हरिहर नाथ द्विवेदी का 23 मई 2026 की शाम 7 बजे हृदयाघात से निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे। उनके निधन से शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। अपने लंबे शैक्षणिक और सामाजिक जीवन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण संस्थानों में उल्लेखनीय सेवाएं दीं।
डॉ. द्विवेदी ने Patna University, Ranchi University, Gorakhpur University और Lucknow University में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किए। वे King George Medical College के सीनेट सदस्य भी रहे। साथ ही Dr. Ram Manohar Lohia National Law University की गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।
हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भी डॉ. द्विवेदी का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने हिंदी साहित्य से जुड़ी कई पुस्तकों की रचना की। वे प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रमुख लोगों में शामिल थे।
सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 1988 में वे श्रीलंका में आईपीकेएफ संधि से पहले शांति प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे। इसके अलावा, उन्होंने लखनऊ में राष्ट्रीय एकता शिविर के प्रथम आयोजक के रूप में भी कार्य किया।
डॉ. द्विवेदी ने Kanyakubj Postgraduate College के प्राचार्य के रूप में 16 वर्षों तक सेवाएं दीं। बाद में वे उत्तर प्रदेश पुस्तकालय समिति के अध्यक्ष भी रहे। दो पुत्र और एक पुत्री सहित भरे-परिवार में शोक है। उनके निधन पर शिक्षाविदों, साहित्यकारों और समाज के विभिन्न वर्गों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

