चोर आकाश कुमार सिंह के पास से RED बीएसपी के वरिष्ठ तकनीशियन प्रकाश सामतकर के नाम से जारी एक कथित फर्जी गेट पास मिला।
- फर्जी गेट पास पर आरोपी की फोटो लगी हुई थी और उस पर बीएसपी का होलोग्राम भी मौजूद था। चोरी की वारदात में यही हो रहा इस्तेमाल।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संयंत्र में कर्मचारियों के नाम पर फर्जी गेट पास बनाकर बाहरी लोगों के प्रवेश का खेल लंबे समय से चल रहा है। हाल ही में कॉपर केबल चोरी के मामले में हुई गिरफ्तारी ने इस पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया है कि चोर नकली बीएसपी गेट पास के सहारे प्रतिबंधित क्षेत्र में आसानी से प्रवेश कर रहे हैं और लाखों रुपये की संपत्ति पर हाथ साफ कर रहे हैं।
भिलाई भट्ठी थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, सीआईएसएफ ने 27 मई की रात एक संदिग्ध सेंट्रो कार को बीएफ-7 क्षेत्र के पास रोका था। तलाशी के दौरान कार की पिछली सीट के नीचे बनाई गई गुप्त केविटी से करीब 270 किलो स्क्रैप कॉपर केबल बरामद किया गया, जिसकी कीमत लगभग 1.62 लाख रुपये आंकी गई है।
पकड़े गए आरोपी आकाश कुमार सिंह (26 वर्ष) के पास से बीएसपी RED के वरिष्ठ तकनीशियन प्रकाश सामतकर के नाम से जारी एक कथित फर्जी गेट पास भी मिला। हैरानी की बात यह है कि फर्जी गेट पास पर आरोपी की फोटो लगी हुई थी और उस पर बीएसपी का होलोग्राम भी मौजूद था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इसी फर्जी पास का इस्तेमाल कर आरोपी संयंत्र के अंदर प्रवेश करता था।
सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों का मानना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। फर्जी गेट पास तैयार कर बाहरी लोगों को प्लांट में प्रवेश दिलाने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। बीएसपी जैसे संवेदनशील और प्रतिबंधित औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह की सेंध सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए बीएसपी प्रबंधन अब पारंपरिक गेट पास व्यवस्था को समाप्त कर RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) आधारित प्रवेश प्रणाली को अनिवार्य बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। जून या जुलाई 2026 से इसे लागू किए जाने की तैयारी चल रही है। RFID कार्ड में डिजिटल सत्यापन होने के कारण फर्जी पहचान पत्र बनाना बेहद कठिन होगा और प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक समय में निगरानी संभव हो सकेगी।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि RFID व्यवस्था जल्द लागू नहीं की गई तो फर्जी गेट पास के सहारे चोरी और स्क्रैप तस्करी के मामलों पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल होगा। हालिया कॉपर केबल चोरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संयंत्र की सुरक्षा में सबसे बड़ी कमजोरी अब नकली गेट पास बन चुके हैं।

