1600 सीसी या उससे अधिक क्षमता वाली कार के लिए 7,000 रुपये तक की कर छूट, लेकिन कर्मचारियों के लिए अभी भी पुरानी 1,800 रुपए की सीमा।
कर्मचारियों के लिए ईएसएस मॉड्यूल में तत्काल 3,000 रुपये चालक भत्ता (Driver Allowance) का विकल्प शुरू किया जाए।
Employee Self Service सिस्टम में अधिकारियों को आयकर नियमों के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कर्मचारी वंचित किए गए।
सूचनाजी न्यूज, दुर्गापुर। SAIL Perks-Allowances: सेल दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP) में कर्मचारियों को आयकर छूट से जुड़े लाभ नहीं मिलने का मुद्दा गरमा गया है। हिंदुस्तान स्टील एम्प्लॉइज यूनियन (सीटू) ने प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही और कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए तत्काल सुधार की मांग की है। यूनियन का कहना है कि ईएसएस (Employee Self Service) सिस्टम में अधिकारियों (Executives) को आयकर नियमों के अनुसार सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कर्मचारियों (Workers) को वैधानिक कर लाभों से वंचित रखा गया है।
यूनियन के सचिवालय संयोजक सिमंता चटर्जी ने दुर्गापुर स्टील प्लांट की कार्यपालक निदेशक (एचआर) को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि आयकर नियमों में बदलाव के बावजूद ईएसएस सिस्टम में कर्मचारियों के लिए पुराने प्रावधान ही लागू हैं। सबसे बड़ी आपत्ति वाहन रखरखाव भत्ता (Vehicle Maintenance Allowance) को लेकर जताई गई है।
वर्तमान आयकर नियमों के अनुसार 1600 सीसी से कम क्षमता वाली कार के लिए 5,000 रुपये तथा 1600 सीसी या उससे अधिक क्षमता वाली कार के लिए 7,000 रुपये तक की कर छूट उपलब्ध है। लेकिन कर्मचारियों के ईएसएस मॉड्यूल में अभी भी पुरानी 1,800 रुपये की सीमा दर्ज है। जबकि अधिकारियों के लिए संशोधित प्रावधान लागू कर दिए गए हैं।
यूनियन ने यह भी कहा कि आयकर नियमों के तहत चालक (Chauffeur/Driver) रखने पर 3,000 रुपये प्रतिमाह की अलग कर छूट का प्रावधान है। अधिकारियों को यह सुविधा मिल रही है, लेकिन कर्मचारियों के ईएसएस मॉड्यूल में इसका कोई विकल्प ही उपलब्ध नहीं कराया गया है।
इसी प्रकार दोपहिया वाहन रख-रखाव भत्ता (Two-Wheeler Maintenance Allowance) के मामले में भी कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। आयकर नियमों के अनुसार दोपहिया वाहन के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह तक की छूट का प्रावधान है, लेकिन ईएसएस सिस्टम में यह सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
यूनियन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करने की यह स्थिति गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है। स्थिति यह है कि ईएसएस स्क्रीन भी बंद कर दी गई है, जिससे कर्मचारी अपनी घोषणा (Declaration) में संशोधन तक नहीं कर पा रहे हैं।
यूनियन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्देश जारी नहीं किए गए तो कर्मचारी वैधानिक कर लाभ से वंचित रह जाएंगे। पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों के वैध अधिकारों और लाभों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है तथा प्रबंधन से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
यूनियन की प्रमुख मांगें
कर्मचारियों के लिए ईएसएस मॉड्यूल में तत्काल 3,000 रुपये चालक भत्ता (Driver Allowance) का विकल्प शुरू किया जाए।
वाहन रखरखाव भत्ते की राशि 1,800 रुपये से बढ़ाकर आयकर नियमों के अनुसार 5,000 और 7,000 रुपये की जाए।
दोपहिया वाहन रखरखाव भत्ता 3,000 रुपये प्रतिमाह का विकल्प कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराया जाए।
यदि चालक भत्ता प्राप्त करने के लिए लिखित घोषणा आवश्यक हो तो कर्मचारी उसे देने को तैयार हैं, लेकिन यह नियम अधिकारियों और कर्मचारियों दोनों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
यदि ईएसएस स्क्रीन तत्काल नहीं खोली जा सकती तो जिन कर्मचारियों ने वाहन रखरखाव मद में वेतन का 10 प्रतिशत विकल्प चुना है, उसे विभाजित कर वाहन रखरखाव भत्ता और चालक भत्ते के रूप में मानते हुए इसी माह से कर लाभ दिया जाए।
अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच किए जा रहे कथित भेदभाव को तत्काल समाप्त किया जाए।

