जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र सेक्टर 9 अस्पताल को निजी हाथों में देने के इरादे पर तुरंत रोक लगाने की मांग।
- स्वास्थ्य सेवा का भविष्य जनसेवा में है, निजीकरण में नहीं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के सेक्टर 9 अस्पताल के निजीकरण के खिलाफ 14 जुलाई को होने वाले प्रदर्शन का पर्चा बांटा जा रहा है। कर्मियों से चर्चा के दौरान संयुक्त ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को विकास और सुधार का पर्याय बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है। दावा किया जाता है कि निजीकरण से अस्पतालों की गुणवत्ता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। लेकिन वास्तविक प्रश्न यह है कि क्या बेहतर स्वास्थ्य सेवा पर केवल भुगतान करने वालों का अधिकार होगा, या हर नागरिक का?
निजीकरण से किसे लाभ
अस्पताल के निजीकरण से उसका संचालन करने वाली निजी कंपनियों और कॉरपोरेट अस्पतालों को अपनी आय एवं मुनाफा बढ़ाने का अवसर मिलता है। अधिक आय और मुनाफे के आधार पर आधुनिक मशीनों तथा सुविधाओं में निवेश की संभावना भी रहती है। भुगतान करने में सक्षम मरीजों को अपेक्षाकृत शीघ्र सेवाएँ मिल सकती हैं। जिन लोगों के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं, उन्हें यह व्यवस्था बेहतर प्रतीत हो सकती है।
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निजीकरण से किसे नुकसान
अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने से गरीब, मध्यम वर्ग, श्रमिक, किसान, पेंशनभोगी तथा असंगठित क्षेत्र के लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। इलाज महंगा होने के कारण अनेक परिवार कर्ज लेने या अपनी संपत्ति बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। अधिक लाभ कमाने का दबाव अनावश्यक जांचों तथा महंगे उपचार को बढ़ावा दे सकता है। इसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सीमित होने लगती है।
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क्यों आवश्यक हैं सार्वजनिक अस्पताल
सार्वजनिक अस्पताल आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि आवश्यकता के आधार पर इलाज उपलब्ध कराते हैं। इनमें कम लागत पर ऑपरेशन, दवाइयाँ, आपातकालीन सेवाएँ तथा विशेष चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध रहती हैं। महामारी, दुर्घटना और आपदा जैसी परिस्थितियों में सार्वजनिक अस्पताल समाज की सबसे बड़ी सुरक्षा बनकर सामने आते हैं। यदि सरकार पर्याप्त निवेश करे, तो सभी नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
सार्वजनिक संपत्ति जनता की सेवा के लिए है, किसी निजी कंपनी के मुनाफे के लिए नहीं, इसीलिए जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र सेक्टर 9 अस्पताल को निजी हाथो में देने के इरादे पर तुरंत रोक लगाया जाए।

