सेल बीएसपी, लखोटिया पर मेहरबान: फेरो स्क्रैप निगम का काम लखोटिया को देने की तैयारी। कर्मचारियों ने उठाई आवाज।
- 6 माह बाद भी सुरक्षा निधि जमा नहीं करने और काम शुरू नहीं होने के बावजूद राहत देने का दावा, कर्मचारियों ने उठाए सवाल
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड (एफएसएनएल) के कर्मचारियों ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि एक ओर कंपनी के निजीकरण के बाद कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी ओर करीब 45 वर्षों से नॉमिनेशन आधार पर मिलने वाले स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग के कार्य को ग्लोबल टेंडर के जरिए बांटकर लगभग 6,000 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि सेल-बीएसपी में यह कार्य किसी भी स्थिति में फेरो स्क्रैप निगम को ही दिया जाना चाहिए। उनका दावा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कर्मचारी दोबारा आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
कर्मचारियों के अनुसार, मार्च माह में भिलाई इस्पात संयंत्र ने स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग कार्य के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया था। पहले यह कार्य फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड द्वारा नॉमिनेशन आधार पर किया जाता था। आरोप है कि इस कार्य को सुनियोजित तरीके से चार हिस्सों में बांटकर निविदाएं आमंत्रित की गईं। इनमें से एक कार्य फेरो स्क्रैप निगम को, एक श्री इंटरनेशनल व्यापार प्राइवेट लिमिटेड (लखोटिया समूह) को तथा एक कार्य जीएसडब्ल्यू समूह को मिला।
कर्मचारियों का दावा है कि दोनों निजी कंपनियां निर्धारित छह माह की अवधि बीत जाने के बाद भी सैकड़ों करोड़ रुपये की सुरक्षा निधि जमा नहीं कर सकीं और न ही कार्य शुरू कर पाईं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में नियमानुसार इन कंपनियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।
एफएसएनएल (कोनोइके ग्रुप) की ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष अरुण सिंह सिसोदिया ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत बीएसपी प्रबंधन लखोटिया समूह को 1 अक्टूबर से काम देने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इसी समूह के संचालक को पूर्व सांसद ताराचंद साहू ने कथित रूप से रिश्वत देते समय रंगे हाथ पकड़वाया था। उनका आरोप है कि ऐसे विवादित समूह को काम दिए जाने से संयंत्र में चोरी, दबंगई और स्क्रैप माफिया की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
सिसोदिया ने कहा कि वर्तमान में संयंत्र से करोड़ों रुपये के लोहे की कथित चोरी के मामले की पुलिस जांच चल रही है और इस मामले में ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों तथा बीएसपी के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। उनका आरोप है कि फेरो स्क्रैप निगम को किनारे कर लखोटिया समूह को लाभ पहुंचाने का प्रयास किसी बड़ी मिलीभगत की ओर संकेत करता है। उनका दावा है कि यदि यह निर्णय लागू हुआ तो लगभग 6,000 अधिकारी, कर्मचारी और ठेका श्रमिकों की आजीविका प्रभावित होगी।
उन्होंने मांग की कि इस निर्णय पर तत्काल रोक लगाई जाए और स्क्रैप प्रोसेसिंग एवं हैंडलिंग का पूरा कार्य फेरो स्क्रैप निगम को ही सौंपा जाए।
अरुण सिंह सिसोदिया ने यह भी कहा कि यदि लखोटिया समूह को करोड़ों रुपये की राहत दी जाती है, तो अन्य चयनित कंपनी जीएसडब्ल्यू भी समान छूट की मांग कर सकती है। उनके अनुसार इससे भविष्य में निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि ऐसे ठेकेदारों को संयंत्र में काम मिलता है तो स्क्रैप चोरी, भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी हो सकती है। उनका कहना है कि भिलाई इस्पात संयंत्र देश के लिए महत्वपूर्ण रेल पटरियां तथा रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाली विशेष इस्पात प्लेटें तैयार करता है, इसलिए यहां कार्य आवंटन में पारदर्शिता और गुणवत्ता के सर्वोच्च मानकों का पालन किया जाना चाहिए। आरोप एफएसएनएल ट्रेड यूनियन के अध्यक्ष अरुण सिंह सिसोदिया एवं कर्मचारियों ने लगाए हैं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

