प्राध्यापकों एवं तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की पात्रता व प्रावधान भी अचानक सेवा अवधि के बीच में ही समाप्त।
- छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविधालायीन पेंशनभोगी प्राध्यापक संघ सरकार के फैसले से आक्रोशित।
- पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी प्रदान करने के डॉ रमन सिंह सरकार का फैसला भी पलटा।
- विष्णुदेव साय सरकार ने 22 अगस्त 2026 की मंत्रिमंडल की बैठक में रमन सरकार का फैसला पलटकर निरस्त कर दिया।
सूचनाजी न्यूज, रायपुर। छत्तीसगढ़ अनुदानित अशासकीय महाविधालायीन पेंशनभोगी प्राध्यापक संघ छत्तीसगढ़ सरकार पर भड़का हुआ है। संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 सितम्बर 2026 को एक तुगलकी और दमनकारी आदेश जारी कर प्रदेश के अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों से सेवानिवृत हुए 400 से अधिक प्राध्यापकों और तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन अचानक बंद कर उनके समक्ष उनके जीवन-यापन, अपने इलाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
महासचिव डॉ. डीएन शर्मा और अध्यक्ष डॉ. हरिनारायण दुबे ने कहा-इसी अनुक्रम में, राज्य सरकार के 11 सितम्बर 26 को जारी आदेश के अनुसार इन अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों में वर्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं तृतीय व चतुर्थ कर्मचारियों की पेंशन व ग्रेच्युटी की पात्रता व प्रावधान को अचानक सेवावधि के बीच में ही समाप्त कर दिया है।
इससे वर्त्तमान में कार्यरत प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों को सेवानिवृत होने पर जीवन-यापन की समस्यायों से जूझना होगा।
राज्य सरकार अनुदानित अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों व कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर पेंशन व ग्रेच्युटी का निरंतर भुगतान गत 37 वर्षों से करती आ रही है। 26 अक्टूबर 2010 को डॉ रमन सिंह की सरकार ने इन प्राध्यापकों व कर्मचारियों की मांग पर पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी देना आरम्भ किया। तब से सेवानिवृत प्राध्यापक व कर्मी पांचवें वेतनमान में निरंतर पेंशन प्राप्त करते रहे हैं। हालांकि पेंशनर्स की यह मांग थी कि शासकीय महाविद्यालयों के पेंशनर्स के समकक्ष जो जिस वेतनमान में सेवानिवृत हो रहा है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन व ग्रेच्युटी प्रदान की जाए।
वेतनमान के अनुरूप पेंशन व ग्रेच्युटी के अधिकार को लेकर उच्च न्यायालय में 80 से अधिक सेवानिवृत्त प्राध्यापकों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर उच्च न्यायालय ने अलग अलग निर्णयों में राज्य सरकार को आदेश दिया कि जो प्राध्यापक जिस वेतनमान में सेवानिवृत हुआ है, उसे उसी वेतनमान में पेंशन तथा ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।
इस निर्णय के विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय (डबल बेंच) में दायर कई रिवीजन याचिकाओं को भी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेना करने पर 50 से अधिक पेंशनभोगी प्राध्यापकों ने उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के विरुद्ध ‘न्यायालय की अवमानना’ के कंटेंप्ट प्रकरण दायर किए हैं, जिन पर कार्यवाही लंबित है।
हालाकि डॉ. आरके उपाध्याय व डॉ. सीके तिवारी के कंटेंप्ट प्रकरण पर उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा उन्हें 6वें वेतनमान में ग्रेच्युटी का भुगतान कर, 6वें वेतनमान में पेंशन दी जा रही है, जो इस आदेश के बाद रोक दी गई है। स्थिति यह है कि गत दो माहों (जुलाई व अगस्त) की किसी भी पेंशनभोगी को पेंशन का भुगतान राज्य सरकार द्वारा अब तक नहीं किया गया है।
उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनर्स के उपयुक्त वेतनमान में पेंशन देने के अधिकार को मान्य कर उनके हित में दिये गए आदेशों से क्षुब्ध होकर राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (विशेष पुनरीक्षण याचिका) दायर की थी; जो सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गईं है। पेंशनर्स को उनका हक नहीं देने के लिए राज्य सरकार ने 27 पेंशनर्स के मामले फिर से सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी दायर कर दी है।
जब सरकार को लगा कि न्यायालयों से पेंशनर्स प्राध्यापकों को उनका अधिकार मिल जाएगा तो दमनकारी रवैया अपनाते हुए पांचवें वेतनमान में पेंशन तथा चौथे वेतनमान में ग्रेच्युटी प्रदान करने के डॉ रमन सिंह सरकार द्वारा जारी आदेश को विष्णुदेव साय सरकार ने 22 अगस्त 2026 की मंत्रिमंडल की बैठक में पलटकर निरस्त कर दिया।
इस निर्णय के अनुसरण में 1 सितंबर 2026 और 11 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर राज्य में अनुदानित अशासकीय महाविद्यालय के प्राध्यापकों और कर्मचारियों को मिल रही पेंशन 1 सितंबर 2026 से बंद कर दी है। यहाँ तक कि जुलाई व अगस्त माहों की पेंशन का भुगतान भी राज्य सरकार ने रोक दिया है।
विष्णुदेव साय सरकार के इस दमनकारी निर्णय से सेवानिवृत वृद्द प्राध्यापक व कर्मचारी गंभीर आर्थिक कठिनाइयों में आ गए हैं। बीपी, डायबिटीज, हार्ट रोगों, घुटनों के दर्द सहित उम्र जनित बीमारियों के चलते बुढ़ापे के दौर में पारिवारिक जिम्मेदारियां के निर्वाह के लिए पेंशन ही उनके जीवन का सहारा थी। विष्णुदेव साय सरकार ने पेंशन को बंद कर हमारे सम्मानजनक व गरिमामय जीवन जीने के हक़ पर ऐसा डाका डाला है जिससे अब हमें विषमतापूर्ण जीवन जीने को बाध्य होना पढ़ेगा।
राज्य सरकार से यह मांग है कि
1. राज्य सरकार द्वारा जारी 1 सितंबर 2026 तथा 11 सितंबर 2026 के पेंशन व ग्रेच्युटी बंद करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से राज्य सरकार वापस ले और सभी पेंशनर्स की पेंशन को यथावत लागू करें।
2. जुलाई व अगस्त की पेंशन का भुगतान अति शीघ्र किया जाए।
3. उत्पीड़न का रवैया छोड़ राज्य सरकार उच्च न्यायालय द्वारा पेंशनभोगियों के हित में (जो जिस वेतनमान में सेवानिवृत हुआ है, उसे उसी वेतनमान के अनुरूप पेंशन दिए जाने के) दिए गए आदेशों का अनुपालन राज्य सरकार तत्काल करें।
वयोवृद्ध व असहाय होते प्राध्यापकों और कर्मचारियों के प्रति सरकार की हठधर्मिता और भेदभाव व उत्पीडन वाले उपेक्षापूर्ण रवैय्ये से हम सब प्राध्यापक हैरान व दुखी हैं। हम अत्यधिक वेदना और पीड़ा के साथ यह व्यक्त कर रहे हैं कि हम प्राध्यापकों ने प्रदेश की उच्च शिक्षा में उस समय से अपना महत्वपूर्ण योगदान देते आ रहे हैं, जब अंचल/प्रदेश में गुणवत्तायुक्त उच्च शिक्षा के संस्थान बहुत ही कम थे; और फिर भी हम वर्तमान राज्य सरकार द्वारा पुरस्कारस्वरूप सताये जा रहे हैं। हमारे पढ़ाये हुए विद्यार्थी आईएएस, आईपीएस, वैज्ञानिक, न्यायाधीश, मंत्री, विधायक, सांसद जैसे राजनेता व अन्य उच्च पदों आसीन हुए हैं। कई अंतर-राष्ट्रीय खिलाडी भी दिए हैं।


