जहां भी सुरक्षा नियमों और सुरक्षित कार्य प्रणाली का उल्लंघन हुआ है, वहां जवाबदेही तय हो और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
- सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल। श्रमिकों की जिंदगी किसी भी उत्पादन लक्ष्य से अधिक महत्वपूर्ण है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सुबह ब्लास्ट फर्नेस 6 में पुशर कार के कपलिंग बोल्ट के लूज होने की शिकायत पर काम करने गए ठेका श्रमिक की पुशर कार में फंसने से हुई मौत अत्यंत गंभीर और चिंताजनक घटना है। हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) की टीम ने घटना के बाद मौके का मुआयना किया। भिलाई में कार्यपालक निदेशक संकार्य राकेश कुमार लगातार सुरक्षित कार्य प्रणाली को लेकर न केवल जोर दे रहे हैं, बल्कि विभिन्न अभियानों के माध्यम से सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी कर रहे हैं, जिसका सीटू समर्थन करता है। लेकिन जमीनी स्तर पर कहीं अधिकारी तो कहीं कर्मचारी इन बातों और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं की अनदेखी कर रहे हैं।
कई जगह नियमों और सुरक्षित कार्य प्रणाली की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और ऐसी गलत कार्यप्रणाली के परिणामस्वरूप ही दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि जब सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात लगातार कही जा रही है, तो जमीन पर उसकी गंभीरता क्यों दिखाई नहीं दे रही है? क्यों संबंधित विभाग के अधिकारी जमीन पर मेहनत करते नज़र नहीं आते। ठेका कंपनी के भरोसे सेफ्टी को छोड़ दिया गया है।
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परमिट टू वर्क और शटडाउन की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं?
विभाग में बाहर की एजेंसी किसी कार्य के लिए आती है तो उसे परमिट टू वर्क दिया जाता है, जबकि विभाग के मेंटेनेंस कर्मियों के लिए संबंधित उपकरण या सिस्टम को सुरक्षित रूप से बंद कर शटडाउन देने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पुशर कार के मेंटेनेंस का कार्य करने वाले संबंधित कर्मियों को नियमानुसार शटडाउन देकर ही काम की अनुमति दी गई थी या नहीं। यदि शटडाउन दिया गया था तो परमिट टू वर्क, शट-डाउन, एलओटीओ, सुरक्षा अनुमति और संबंधित रिकॉर्ड की जांच होनी चाहिए। यदि शटडाउन नहीं दिया गया था तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? सुरक्षा प्रक्रिया केवल कागजों पर पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि श्रमिक की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए होती है।
मौके की स्थिति से उठे सुरक्षा दावों पर सवाल
सीटू टीम के मौके के निरीक्षण में हाउसकीपिंग, तकनीकी अनुशासन और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। जिस स्थान पर सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, वहां यदि कार्यस्थल की व्यवस्था और निर्धारित तकनीकी अनुशासन ही सवालों के घेरे में दिखाई दे, तो’सुरक्षा प्रथम’ और ‘जीरो टालरेंस’ जैसे नारों की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सुरक्षा का मतलब केवल दुर्घटना के बाद जांच करना नहीं, बल्कि दुर्घटना की संभावना पैदा करने वाली गलत कार्यप्रणाली को समय रहते रोकना है। नियमों की अनदेखी को सामान्य मान लेने की कार्यसंस्कृति पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
जांच के साथ जवाबदेही और सुरक्षित कार्यप्रणाली जरूरी
हिंदुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) मांग करती है कि दुर्घटना की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर परमिट टू वर्क/शट-डाउन, एलओटीओ, सुरक्षा अनुमति, सुपरविजन, टेक्नोलॉजिकल डिसिप्लिन और ठेका श्रमिकों की कार्यप्रणाली से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच की जाए।
जहां भी सुरक्षा नियमों और सुरक्षित कार्य प्रणाली का उल्लंघन हुआ है, वहां जवाबदेही तय हो और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। श्रमिकों की जिंदगी किसी भी उत्पादन लक्ष्य से अधिक महत्वपूर्ण है। प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘सुरक्षा प्रथम’ केवल नारा न रहे, बल्कि हर स्तर पर कार्यप्रणाली का अनिवार्य हिस्सा बने, ताकि हर श्रमिक सुरक्षित कार्य करे और अपने परिवार के पास सुरक्षित लौटे।



