वेल्डिंग टेक्नोलॉजी, वियर मैनेजमेंट, सरफेस इंजीनियरिंग और उत्पादकता बढ़ाने से जुड़े आधुनिक तरीकों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
- अमेरिका के क्लीवलैंड, ओहायो स्थित Lincoln Electric Global R&D Alloys के वेल्डिंग टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ रुद्रेश बी. पटेल ने प्रस्तुति दी।
- बीएसपी में एडवांस वेल्डिंग तकनीक पर तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों ने बताईं मरम्मत और हार्ड-फेसिंग की नई तकनीकें।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील और हैवी इंजीनियरिंग उद्योग में वेल्डिंग तकनीक लगातार बदल रही है। इसी क्रम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM) भिलाई चैप्टर ने सेल-भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के सहयोग से एडवांस्ड वेल्डिंग कंज्यूमेबल्स, हार्ड-फेसिंग टेक्नोलॉजी और रिपेयर एवं मेंटेनेंस सॉल्यूशंस पर तकनीकी सत्र आयोजित किया।
बीएसपी के एचआरडीसी में आयोजित इस तकनीकी सत्र में स्टील प्लांट और स्थानीय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, अधिकारियों, प्रशिक्षुओं तथा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम बीएसपी के ईडी (वर्क्स) एवं IIM भिलाई चैप्टर के चेयरमैन राकेश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन बीएसपी के आरसीएल विभाग के सीनियर मैनेजर एवं IIM भिलाई चैप्टर के समिति सदस्य जे.एस. कोहली ने किया।
इस अवसर पर बीएसपी के सीजीएम इंचार्ज (एमएंडयू) बी.के. बेहरा उपस्थित रहे। IIM की कार्यकारिणी के सदस्य एस.एस.आर.सी. मूर्ति और उदय भानु तिवारी तथा CTO-Metexengineers नंदू पिल्लई ने कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमेरिका से आए विशेषज्ञ ने साझा की तकनीकी जानकारी
तकनीकी सत्र में अमेरिका के क्लीवलैंड, ओहायो स्थित Lincoln Electric Global R&D Alloys के वेल्डिंग टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ रुद्रेश बी. पटेल ने प्रस्तुति दी। उन्होंने वेल्डिंग तकनीक, घिसने वाले उपकरणों की सतह को मजबूत बनाने वाली तकनीकों और सरफेस इंजीनियरिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
सत्र में खास तौर पर एडवांस्ड वेल्डिंग कंज्यूमेबल्स और हार्ड-फेसिंग तकनीकों पर चर्चा हुई। स्टील और हैवी इंजीनियरिंग उद्योग में इस्तेमाल होने वाली विशेष इलेक्ट्रोड, वेल्डिंग वायर और फ्लक्स के निर्माण एवं उपयोग की जानकारी भी साझा की गई।
रोल्स की लाइफ बढ़ाने पर जोर
तकनीकी चर्चा में कंटीन्यूअस कास्टर और हॉट रोलिंग मिल के रोल्स की क्लैडिंग के लिए ओपन-आर्क और सबमर्ज्ड-आर्क वायर के विकास पर भी जानकारी दी गई। इसके अलावा आयरन-बेस, कोबाल्ट-बेस, स्टेनलेस स्टील और टंग्स्टन कार्बाइड इलेक्ट्रोड के साथ फ्लक्स-कोर्ड, मेटल-कोर्ड और सबमर्ज्ड-आर्क वेल्डिंग तकनीकों पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञ ने बताया कि महत्वपूर्ण और अधिक घिसने वाले उपकरणों के लिए कस्टमर-स्पेसिफिक वेल्डिंग सॉल्यूशन, ऑटोमेशन, रिपेयर और मेंटेनेंस तकनीकों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।
उद्योग, विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को मिला साझा मंच
तकनीकी सत्र में बीएसपी के संबंधित विभागों के प्रोफेशनल्स के साथ स्थानीय उद्योग के प्रतिनिधि, प्रशिक्षु और विद्यार्थी भी शामिल हुए। चर्चा के दौरान वेल्डिंग टेक्नोलॉजी, वियर मैनेजमेंट, सरफेस इंजीनियरिंग और उत्पादकता बढ़ाने से जुड़े आधुनिक तरीकों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। IIM भिलाई चैप्टर के मानद सचिव के.वी. शंकर ने कार्यक्रम के समापन पर अतिथि वक्ता एवं उनकी टीम, प्रतिभागियों तथा एचआरडीसी, बीएसपी का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
IIM भिलाई चैप्टर की ओर से कहा गया कि उद्योग, अकादमिक जगत और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान और तकनीकी संवाद को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम आगे भी आयोजित किए जाते रहेंगे।
