Breaking News: हाईकोर्ट तक हारा बोकारो स्टील प्लांट, 13 साल बाद इंटक की जीत, कर्मचारियों में बंटेगा 70 से 80 करोड़ तक
Central Government Industrial Tribunal ने इंटक बोकारो के परिवाद के पक्ष में फैसला दिया। कर्मचारियों को मिलेगा पैसा।
अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारियों ने 13 साल बाद कानूनी जीत हासिल की है। रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी डेट ऑफ ज्वाइनिंग से पैसा मिलेगा। सर्विस रूल्
- Central Government Industrial Tribunal ने इंटक बोकारो के परिवाद के पक्ष में फैसला दिया। कर्मचारियों को मिलेगा पैसा।
अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारियों ने 13 साल बाद कानूनी जीत हासिल की है। रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी डेट ऑफ ज्वाइनिंग से पैसा मिलेगा। सर्विस रूल्स के तहत साढ़े 6 घंटे ड्यूटी होती है। शासकीय भवन, नगर सेवाए विभाग, हॉस्पिटल में इसके लिए मशीन एलाउंस की दिया जाता है। लेकिन, सेल बीएसएल प्रबंधन 8 घंटे ड्यूटी कराता रहा और मशीन एलाउंस नहीं दिया।
इस मामले को 13 साल पहले बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन-इंटक के महासचिव बीएन चौबे ने उठाया। परिवाद दायर किया है। प्रबंधन को कानूनी दायरे में इंटक ने फंसा दिया है। अब कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। करीब 70 से 80 करोड़ रुपए का भुगतान सेल बीएसएल प्रबंधन को करना होगा। हाईकोर्ट तक गुहार लगाने के बाद भी राहत नहीं मिली है।
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मेडिकल स्टाफ को सीधेतौर पर राहत मिलने जा रही है। साथ ही भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, इस्को बर्नपुर, खदान और अन्य यूनिट के मेडिकल स्टाफ भी लाभ के दायरे में आ जाएंगे। डेट ऑफ ज्वाइनिंग से लागू होगा। बीजीएच में 218 दावेदार हैं। 180 रिटायर हो चुके हैं। जो रिटायर हो चुके हैं, उन्हें भी पैसा मिलेगा। इस पूरे प्रकरण पर सेल बीएसएल प्रबंधन का पक्ष आते ही समाचार को अपडेट किया जाएगा।
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क्या है मामला
बीएन चौबे ने सूचनाजी.कॉम से बातचीत करते हुए कहा-सर्विस रूल्स से साढ़े 6 घंटे ड्यूटी होता है। शासकीय भवन, नगर सेवाए विभाग, हॉस्पिटल इसके दायरे में आते हैं। इन्हें मशीन एलाउंस की दिया जाता है। वहीं, स्टैंडिंग ऑर्डर प्लांट के लिए होता है। एकाउंट और फाइनेंस में मशीन ऑपरेट करने वालों को 8 घंटे ड्यूटी होती है। बीजीएच के लिए मांग करते हुए 2013 में इंटक ने परिवाद लगाया था।
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कुछ इस तरह कानूनी लड़ाई रिजल्ट तक पहुंची
-आरएलसी ने चीफ लेबर कमिशनल के पास केस भेजा। वहां कुछ समय तक सुनवाई के बाद साल 2016 में परिवाद को ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर कर दिया गया।
-केंद्र सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण-सीजीआईटी (Central Government Industrial Tribunal) का फैसला 2018 में आया कि बीएसएल प्रबंधन कर्मचारियों को मशीन एलाउंस का पैसा दे। डेट ऑफ ज्वाइनिंग से भुगतान का आदेश हुआ।
-इस आदेश के खिलाफ सेल बीएसएल मैनेजमेंट हाईकोर्ट रांची चला गया। सिंगल बेंच ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा।
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-बीएसएल प्रबंधन हाईकोर्ट के डबल बेंच पहुंच गया। वहां भी प्रबंधन को हार का सामना करना पड़ा। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिला। 6 माह का समय बीतने क बाद सीजीआईटी ने बीएसएल को पत्र लिखा कि आप फाइन लगाकर पेमेंट करें।
-बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन मामले में राहत पाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अपील किया। पब्लिक सेक्टर का मामला होने से अपील को स्वीकार किया गया। चीफ जस्टिस ने फिर से सीजीआईटी के पास मामला भेजा और कहा-दोबारा विचार किया जाए और मामले को सुना जाए।
-दो साल तक मामला चला। 7 अगस्त 2026 को सीजीआईटी ने फैसला दिया कि जो मेरा फैसला था, वही आज भी बरकरार है। अब बीएसएल प्रबंधन को भुगतान करना है।
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जानिए बीएन चौबे क्या बोले...
कर्मचारियों के हक की लड़ाई 13 साल पहले शुरू हुई थी। कानून की जीत हुई। सेल बीएसएल प्रबंधन की मनमानी पर रोक लगी। जो मेडिकल कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं, उन्हें भी पैसा मिलेगा। सेल बीएसएल के फाइनेंस-एकाउंट डिपार्टमेंट जो सर्विस रूल्स के अंतर्गत आता है। वहां के कर्मचारियों ने कानूनी लड़ाई लड़ी। पटना हाईकोर्ट तक मामला गया। इसके बाद बीएसएल प्रबंधन ने मशीन एलाउंस का भुगतान शुरू कर दिया। इस केस को संज्ञान में लेकर इंटक ने बीजीएच और नगर सेवाएं विभाग का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों की जीत हुई है। कर्मचारियों को बेसिक-पे डीए का 20 प्रतिशत एलाउंस डेट ऑफ ज्वाइनिंग से भुगतान करने का आदेश है।
बीएन चौबे, इंटक-महासचिव, बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन