बीएकेएस, बीएसपी प्रबंधन और क्षेत्रीय श्रमायुक्त के बीच त्रिपक्षीय समझौता। 90 दिनों में होगा छुट्टियों की नीति का तुलनात्मक अध्ययन।
- प्रबंधन द्वारा काम कराने और ट्रांसफर करने के लिए नॉन-एक्स कर्मचारी सेल कर्मचारी बन जाते हैं, लेकिन सुविधा और छुट्टी देने के मामले में बीएसपी कर्मचारी बना दिए जाते हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में कर्मचारियों की छुट्टियों में कथित असमानता का मुद्दा अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। बीएसपी अनाधिशासी कर्मचारी संघ (BAKS), बीएसपी प्रबंधन और क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय), रायपुर के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में प्रबंधन ने चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधिवत गठित नेगोशिएटिंग यूनियन या नेगोशिएटिंग काउंसिल के साथ चर्चा कर मौजूदा छुट्टी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने की दिशा में ठोस प्रस्ताव तैयार करने पर सहमति दी है।
यह त्रिपक्षीय बैठक 24 अगस्त 2026 को क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय), रायपुर अखिलेश राय की अध्यक्षता में हुई। बैठक में बीएसपी प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ प्रबंधक-मानव संसाधन (HR) नियम निवेश विजयन तथा यूनियन की ओर से कोषाध्यक्ष नवीन कुमार मिश्रा ने प्रतिनिधित्व किया।
समाधान पोर्टल पर दर्ज कराया था औद्योगिक विवाद
BAKS ने 10 दिसंबर 2025 को समाधान पोर्टल के माध्यम से बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ औद्योगिक विवाद दर्ज कराया था। यूनियन का आरोप था कि सेल की विभिन्न इकाइयों की तुलना में बीएसपी के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियों में असमानता है। यूनियन ने दावा किया कि मानव संसाधन विभाग को कई बार प्रतिवेदन देने के बावजूद इन विसंगतियों को दूर नहीं किया गया।
यूनियन ने कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच तथा सेल की अन्य इकाइयों और बीएसपी के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के बीच छुट्टियों में अंतर का मुद्दा उठाया। विशेष रूप से बंद छुट्टियों को लेकर भी सवाल उठाया गया। यूनियन के अनुसार सेल के अधिकारियों को छह बंद छुट्टियां मिलती हैं, जबकि गैर-कार्यपालक कर्मचारियों को केवल एक बंद छुट्टी दी जाती है।
CL और EL में भी अंतर का मुद्दा
BAKS ने बैठक में बताया कि दिसंबर 1985 में नियुक्त कुछ गैर-कार्यपालक कर्मचारियों को 15 दिन आकस्मिक अवकाश (CL) और 30 दिन अर्जित अवकाश (EL) का लाभ मिल रहा है, जबकि अन्य गैर-कार्यपालक कर्मचारियों को सात दिन CL और 24 दिन EL दिए जा रहे हैं।
यूनियन ने इस अंतर का आधार स्पष्ट करने के लिए प्रबंधन से दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी। क्षेत्रीय श्रमायुक्त ने भी प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, हालांकि यूनियन के अनुसार आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। मामले की सुनवाई के दौरान प्रबंधन ने अपना लिखित प्रस्तुतिकरण दिया। कई दौर की चर्चा और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ।
90 दिनों में होगा तुलनात्मक अध्ययन
समझौते के अनुसार बीएसपी प्रबंधन समान उद्योगों में लागू छुट्टी और अवकाश नीति का तुलनात्मक अध्ययन करेगा। यह अध्ययन 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके निष्कर्ष नेगोशिएटिंग यूनियन/काउंसिल के साथ साझा किए जाएंगे। यूनियन ने भी इस संबंध में उपलब्ध जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है।
प्रबंधन ने यह भी बताया कि सेल की अन्य सहयोगी इकाइयों से संपर्क कर गैर-कार्यपालक कर्मचारियों पर लागू आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, त्योहार अवकाश और अन्य छुट्टियों की पात्रता संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है तथा छुट्टियों के युक्तिकरण पर काम किया जा रहा है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों में कितना अंतर
छुट्टी: सेल अधिकारी: BSP कर्मचारी
CL: 15: 07
FL/RH: 07: 05
विशेष त्योहार: 07: 01
EL: 30: 24
यूनियन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को आधे दिन का CL लेने के मामले में भी कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया। बैठक में प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि आधे CL के संबंध में जल्द ही आदेश जारी किया जाएगा।
सेल की सभी इकाइयों में पहली बार लिखित सहमति का दावा
BAKS ने दावा किया कि सेल की विभिन्न इकाइयों में छुट्टी के मुद्दे पर किसी यूनियन को पहली बार इस प्रकार की लिखित सहमति मिली है। समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत ट्रेड यूनियन की चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद बीएसपी प्रबंधन नई रिकॉगनाइज्ड/नेगोशिएटिंग यूनियन या काउंसिल के साथ छुट्टियों के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाने पर औपचारिक चर्चा करेगा। बैठक में यूनियन की ओर से कोषाध्यक्ष नवीन कुमार मिश्रा, प्रवीण कुमार, अजय रत्न, विजय बहादुर सिंह और कृतजा बल्ली ने हिस्सा लिया।
‘काम और ट्रांसफर के समय सेल कर्मचारी, सुविधा के समय BSP कर्मचारी’
BAKS कोषाध्यक्ष नवीन कुमार मिश्रा ने कहा कि, “प्रबंधन द्वारा काम कराने और ट्रांसफर करने के लिए नॉन-एक्स कर्मचारी सेल कर्मचारी बन जाते हैं, लेकिन सुविधा और छुट्टी देने के मामले में बीएसपी कर्मचारी बना दिए जाते हैं। सभी सेल अधिकारी सीडीए रूल के नाम पर कर्मचारियों से दोगुनी छुट्टी लेंगे, जबकि कर्मचारियों को 1970 के दशक के स्टैंडिंग ऑर्डर दिखाकर गुमराह किया जाएगा। इसके लिए पूर्व की रिकॉगनाइज्ड यूनियनें भी दोषी हैं, जिन्होंने छुट्टी के मुद्दे पर कुछ नहीं किया।”
