SAIL BIG NEWS: अधिकारियों की ग्रेडिंग अब साहब नहीं, काम के बल पर तय होगी Continuous Performance Management System से
कंसल्टेंसी एजेंसी टाटा, जिंदल जैसी निजी कंपनियों के सिस्टम की स्टडी कर रही है। अज़मत अली, भिलाई। Steel Authority of India Limited सेल अधिकारियों से जुड़ी बड़ी खबर है। अब साहब की दया-दृष्टि से अधिकारियों की ग्रेडिंग न सुधरेगी और न ही बिगड़ेगी। अधिकारियों के परफॉर्मेंस की पूरी कुंडली हर महीने सिस्टम पर अपडेट होती रहेगी। इसी के आधार पर ग्रेडिंग मिलेगी। अच्छी ग्रेडिंग पर परमोशन और खराब पर कार्रवाई तय है। साल में एक बार होने वाली ग्रेडिंग की व्यवस्था बदलकर इसे मासिक आधार पर करने की तैयारी चल रही है। न
- कंसल्टेंसी एजेंसी टाटा, जिंदल जैसी निजी कंपनियों के सिस्टम की स्टडी कर रही है।
अज़मत अली, भिलाई। Steel Authority of India Limited सेल अधिकारियों से जुड़ी बड़ी खबर है। अब साहब की दया-दृष्टि से अधिकारियों की ग्रेडिंग न सुधरेगी और न ही बिगड़ेगी। अधिकारियों के परफॉर्मेंस की पूरी कुंडली हर महीने सिस्टम पर अपडेट होती रहेगी। इसी के आधार पर ग्रेडिंग मिलेगी। अच्छी ग्रेडिंग पर परमोशन और खराब पर कार्रवाई तय है।
साल में एक बार होने वाली ग्रेडिंग की व्यवस्था बदलकर इसे मासिक आधार पर करने की तैयारी चल रही है। नए सिस्टम को अगले चार-पांच महीनों के भीतर सेल में लागू किए जाने की संभावना है। सेल भिलाई, बोकारो, राउरकेला, आइएसपी, डीएसपी आदि इकाइयों को लेकर युद्धस्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है। कंसल्टेंसी एजेंसी लगातार उच्चाधिकारियों के संपर्क में है।
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सेल अधिकारियों के लिए अब तक एक्जीक्यूटिव परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम (Executive Performance Monitoring System) लागू है। इसके स्थान पर अब कॉन्टीन्यूअस परफॉर्मेंस मैनेजमेंट सिस्टम (Continuous Performance Management System) लागू किया जा रहा है। इसके तहत अधिकारियों के हर महीने के प्रदर्शन पर नजर रखी जाएगी।
बोस्टर्न कंसल्टेंसी एजेंसी के साथ सेल अधिकारी लगातार प्लांट स्तर पर दौरा कर रहे हैं। एक टीम भिलाई भी पहुंची हुई है। यह लगातार चौथा दौरा बताया जा रहा है। सेल कॉरपोरेट ऑफिस के मुताबिक, सभी प्लांट के अधिकारियों का केपीए (KPA) अब डेटा आधारित मॉनिटरिंग से तय होगा।
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हॉट मेटल प्रोडक्शन समेत विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। हर दिन, हर महीने और पूरे साल की रिपोर्ट सिस्टम में अपडेट होती रहेगी। सिस्टम खुद-ब-खुद ग्रेडिंग तय करेगा। किसी भी उच्चाधिकारी या एचओडी के पास किसी अधिकारी की ग्रेडिंग बदलने का अधिकार नहीं रहेगा।
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स स्तर के सेल अधिकारी होंगे, उनके लिए उसी स्तर के अनुरूप परफॉर्मेंस तय किया जाएगा। प्लांट, मार्केटिंग, एचआर, टाउनशिप, हॉस्पिटल आदि विभागों के लिए जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएंगी।
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एचओडी और संबंधित अधिकारी वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही प्रत्येक अधिकारी के कार्य और जिम्मेदारियां तय करेंगे। इसमें दोनों पक्षों की सहमति शामिल होगी। कंसल्टेंसी एजेंसी टाटा, जिंदल जैसी निजी कंपनियों की नीतियों का भी अध्ययन कर रही है, ताकि व्यवस्था में समानता लाई जा सके।
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