- बीएसपी प्रबंधन से मांग की गई कि मानवता को नजर अंदाज न किया जाए।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट अब पुरी तरह से बिजनेस मानसिकता का चोला ओढ़ चुका है। मानवता को दरकिनार करने वाली सोच उजागर हो गई है। बीएसपी के सीआइएसएफ कवर प्रतिबंधित एरिया में शनिवार सुबह हादसा हुआ। स्कूटी सवार महिला जख्मी हो गई। शरीर से खून बहता रहा, पर बीएसपी ने एम्बुलेंस सेवा देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद राहगीरों ने 112 पर फोन किया। करीब आधे घंटे बाद एम्बुलेंस पहुंची और जख्मी महिला का लेकर सरकारी अस्पताल ले गई।
भिलाई की शिक्षिका किरण तिग्गा का दोपहर 12:30 बजे एक्सीडेंट हुआ। गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। वहां से गुजर रहे बीएसपी कार्मिकों ने मेन मेडिकल पोस्ट की एंबुलेंस के लिए फोन किया। वहां जवाब दिया गया कि बाहरी मरीजों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया जाता है। मरीज गंभीर रूप से घायल महिला डिवाइडर के बीच में पड़ी थी, जिसे आम नागरिकों के सहयोग से बाहर निकाला गया।
गहरी चोट लगी थी। कपड़े तक फट गए थे। वहां मौजूद लोगों यह सब देख तड़प उठे। बीएसपी की एम्बुलेंस न मिलने पर 112 एम्बुलेंस की सहायता से अस्पताल भेजा गया। मौके पर आइआर विभाग से प्रकाश बंसोड, बीएसपी ऑफिसर एसोसिएशन की पूर्व सचिव संजय तिवारी, बीएमसी उपाध्यक्ष शारदा गुप्ता, संजय दुबे आदि कार्मिकों ने मदद की और महिला को अस्पताल तक भेजवाया।
एम्बुलेंस को लेकर बीएसपी की सोच पर भिलाई इस्पात मजदूर संघ के उपाध्यक्ष शारदा गुप्ता ने सवार उठाया है। उन्होंने प्रबंधन से मांग किया है कि इस तरह की सोच को बदला जाना चाहिए। संयंत्र में जो कर्मचारी काम नहीं करते है, उनके लिए भी मेन मेडिकल पोस्ट से एंबुलेंस मिलना चाहिए, ताकि गंभीर पीड़ित व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा सके।
केवल भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारियों को ही एंबुलेंस मिल सकता है। इसमें सुधार किए जाने की आवश्यकता है। बता दें कि फायर ब्रिगेड के मामले में ऐसा नहीं है। छत्तीसगढ़ में कहीं भी आग लगने पर बीएसपी की दमकल गाड़ियां रवाना की जाती हैं। वहीं, बीएसपी के प्रतिबंधित एरिया में गैर बीएसपी महिला जख्म से तड़पती रही, पर बीएसपी ने एम्बुलेंस नहीं दिया।















