- बीएसपी कोक ओवन गैस पाइपलाइन हादसे पर पूर्व ईडी वर्क्स पीके दास पर गिरी गाज, जांच में बड़ी लापरवाही उजागर।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र में 2018 हुए भीषण हादसे को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। श्रम न्यायालय दुर्ग ने तत्कालीन ईडी वर्क्स पीके दास, कोक ओवन के एचओडी जीएसवी सुब्रमणियम को सजा दी है।
हादसे का दोषी सिद्ध कर दिया है। लंबे समय तक चली जांच के बाद यह फैसला लिया गया है, जिसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। जबकि सजा तत्कालीन सीईओ एम. रवि, ईएमडी के एचओडी नवीन कुमार, जीएम सेफ्टी टी. पांडियाराजा को देते हुए सस्पेंड किया गया था। पीके दास को सेल प्रबंधन से क्लीन चिट मिली थी, लेकिन अब न्यायालय ने ईडी वर्क्स को ही आरोपी मानते हुए सजा दी है।
श्रम न्यायधीश यशवंत कुमार सारथी ने फैसला सुनाया है। इसमें उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दुर्ग के उप मुख्य कारखाना निरीक्षक केके द्विवेदी को अभियोगी और पीके दास ईडी वर्क्स बीएसपी एवं कारखाना प्रबंधक कोक ओवन जीएसवी सुब्रमणियम को अभियुक्त बनाया गया।
जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि 9 अक्टूबर 2018 को कोक ओवन गैस पाइपलाइन के फ्लैंज ज्वाइंट में डी-ब्लैंकिं का कार्य करते हुए हादसा हुआ था। जबकि पाइपलाइन में गैस का प्रेशर 250 मिमी वाटर कॉलम से 300 मिमी थी। इस तरह असुरक्षित कार्य कराने से हादसा हुआ। विस्फोट हुआ और भीषण आग की चपेट में 23 कर्मचारी-अधिकारी आए। इनमें से 14 कर्मचारियों की मौत हुई।
अभियुक्तों की आयु 65 साल से अधिक होने से न्यायधीश ने पीके दास और जीएसवी सुब्रमणियम को न्यायालय उठने तक की सजा और एक-एक लाख का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर एक-माह का साधारण कारावास की सजा होगी। प्रकरण में अभियुक्तगण के द्वारा प्रस्तुत जमानत मुचलके आगामी 6 माह तक प्रवृत्त रहेंगे।
हादसा किसी एक गलती का नहीं, बल्कि पूरी सिस्टम की लापरवाही का नतीजा था। मजदूर ऊंचाई पर काम कर रथे थे, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि काम शुरू करने से पहले जरूरी रिस्क असेसमेंट ही नहीं किया गया था। यानी जिस काम में जान का खतरा था, उसके लिए खतरे का सही आकलन ही नहीं हुआ। यही नहीं, मौके पर मौजूद अधिकारियों और सुपरवाइजरी स्टाफ ने भी सुरक्षा नियमों को गंभीरता से नहीं लिया।
हादसा सुबह करीब 10:30 से 11 बजे के बीच हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद राहत और बचाव कार्य में भी अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
आदेश में यह भी कहा गया है कि फैक्ट्री एक्ट 1948 और अन्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ। कंपनी के अपने सेफ्टी गाइडलाइन और 1962 के नियमों को भी नजरअंदाज किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि पहले भी इस तरह के जोखिम भरे कामों में लापरवाही होती रही थी, लेकिन सुधार के ठोस कदम नहीं उठाए गए।
जांच समिति ने साफ तौर पर जिम्मेदारी तय करते हुए कहा है कि उच्च स्तर पर निगरानी और नियंत्रण की कमी थी। इसी आधार पर तत्कालीन ईडी (वर्क्स) पीके दास को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।
सख्त संदेश देते हुए सभी विभागों को सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जोखिम वाले कार्यों के लिए विशेष अनुमति, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
इस कार्रवाई के बाद भिलाई स्टील प्लांट में हड़कंप मचा हुआ है। कर्मचारियों और यूनियनों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। इसे बड़ी और कड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, जो आने वाले समय में सुरक्षा मानकों को लेकर एक मिसाल बन सकती है।













