Bokaro Steel Plant: सेल/बीएसएल प्रबंधन की कथित तानाशाही और NJCS नेताओं की कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश।
- नारी शक्ति ने संभाली आंदोलन की अगुवाई।
- प्रबंधन बिना यूनियन चुनाव कराए कई फैसले ले रहा है।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। अपनी 45 से अधिक लंबित मांगों और बोनस राशि को लेकर NJCS नेताओं की कथित असफलता के विरोध में बीएसएल कर्मचारियों ने मौन जुलूस निकालकर काले झंडे के साथ प्रदर्शन किया। बीएसएल अनाधिशासी कर्मचारी संघ के नेतृत्व में कर्मचारी मजदूर मैदान में एकत्र हुए और वहां से प्रशासनिक भवन स्थित धरना स्थल तक काले झंडे लेकर मौन पदयात्रा की।
आंदोलन में महिला कर्मचारियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और नारी शक्ति ने जुलूस की अगुवाई की। धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यूनियन के महासचिव हरिओम ने कहा कि इस्पात मंत्रालय के अधिकारी कार्यालय से बाहर निकलकर सेल कर्मचारियों की समस्याओं को समझने और उनका संज्ञान लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि सैकड़ों पत्रों, फोन कॉल और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से सेल कर्मचारियों की समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद मंत्रालय के अधिकारी मौन हैं।
हरिओम ने आरोप लगाया कि सेल प्रबंधन अब खुले तौर पर कर्मचारियों के शोषण पर उतारू है, जबकि हैदराबाद और दिल्ली में बैठे NJCS नेता प्रबंधन के सामने कर्मचारियों की आवाज मजबूती से नहीं उठा रहे हैं।
बोनस समझौते को लेकर भी सवाल
महासचिव हरिओम ने हाल में हुए बोनस समझौते को लेकर भी NJCS नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बोनस की राशि तय करने में कर्मचारियों के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि बोनस फॉर्मूले को लेकर दिल्ली में हुई बैठक में 32,000 रुपये की राशि तय की गई और इसके बाद अन्य NJCS नेताओं ने भी इस पर सहमति जताते हुए दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए।
यूनियन ने आरोप लगाया कि वेज रिवीजन एमओयू और एरियर के बाद अब बोनस के मामले में भी कर्मचारियों के हितों के साथ समझौता किया जा रहा है।
कर्मचारियों से संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान
सभा में वक्ताओं ने कर्मचारियों से अपने अधिकारों और लंबित मांगों के लिए आंदोलन तेज करने का आह्वान किया। महासचिव हरिओम ने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह देशवासियों ने अंग्रेजों के शोषण और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष किया था, उसी तरह सेल कर्मचारियों को भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा।
बिना यूनियन चुनाव के फैसलों का विरोध
यूनियन अध्यक्ष दिलीप ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि प्रबंधन बिना यूनियन चुनाव कराए कई फैसले ले रहा है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि ऐसी कथित अवैध परिपाटी का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों और यूनियन प्रतिनिधित्व से जुड़े मामलों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
इन पदाधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
मौन जुलूस को सफल बनाने में कार्यकारिणी सदस्य शत्रुजय कुमार, त्रिवेणी सिंह, माणिक मुंडा, देवेंद्र, चुन्नी कुमारी और रेणु कुमारी सहित अन्य पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
