- निजीकरण, रिटेंशन, सेक्टर 9 हॉस्पिटल, स्कूल, मैत्रीबाग का मुद्दा गरमाया।
- विधायक देवेंद्र यादव का सत्याग्रह जारी। सिविक सेंटर में उपवास पर बैठे हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल कर्मचारियों के लिए भिलाई में सत्याग्रह ऐतिहासिक होता जा रहा है। भिलाई स्टील प्लांट के इतिहास में पहली बार सत्याग्रह किया जा रहा है। विधायक देवेंद्र यादव ने कर्मचारियों, अधिकारियों और रहवासियों की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं।
भिलाई की बसाहट को बचाना है
विधायक ने बीएसपी प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद दो-टूक बोल दिया है कि मैं भिलाई बिकने नहीं दूंगा। मैं मर भी जाऊं तो बिकने नहीं दूंगा। सेल प्रबंधन के रवैये से ऐसा ही लगता है कि मैं मर जाऊं तो भी निजीकरण नहीं रुकेगा।
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लेकिन, हम सबको भिलाई की बसाहट को बचाना है। दो दिनों के लिए शुरू हुआ सत्याग्रह लंबा होता जा रहा है। अब बीएसपी प्रबंधन को फैसला लेना है कि वह शांति से मामले को हल करता है या नहीं।

प्रबंधन का जवाब न आने से बने ऐसे हालात
केंद्र सरकार की नीतियों पर अमल करते हुए भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने रिटेंशन, निजीकरण आदि विषयों पर कदम बढ़ाया है। इससे आक्रोशित भिलाईवासियों में काफी भय पैदा हुआ। प्रबंधन की ओर से खुलकर कोई जवाब न आने से विधायक का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। आक्रोशित समर्थकों ने भी अब आर-पार का मन बना लिया है।

बीएसपी प्रबंधन की ढिलाई, खतरनाक मोड़ पर आई
-प्रबंधन के फैसले से गुस्साए बीएसपी के कर्मचारी और अधिकारियों ने सूचनाजी.कॉम से कहा-डायरेक्टर इंचार्ज और ईडी स्तर के अधिकारियों की सुस्ती खतरनाक रूप लेगी। ढिलाई, भिलाई के लिए अच्छी नहीं है।
-कार्मिकों के बीच न रहने से इन तक सही सूचना भी नहीं पहुंच रही। प्रबंधन के गलत फैसलों का खामियाजा भिलाई भुगतेगा।

-समझदार अधिकारी इस तरह की हरकत कभी नहीं करते हैं, जो वर्तमान में हो रही है। कुछ अधिकारियों ने खुद को बीएसपी का मालिक मान लिया और तुगलकी फरमान जारी करना शुरू कर दिया।
-कम्युनिकेशन गैप इतना कि 3 करोड़ के जनसंपर्क विभाग को भी सफेद हाथी बनाकर छोड़ दिया गया है। प्रबंधन के फैसलों न यूनियन, न ही आफिसर्स एसोसिएशन को अवगत कराया गया। जनप्रतिनिधियों को भी ठेंगा दिखाया गया।
-वर्तमान हालात के लिए बीएसपी प्रबंधन सीधेतौर पर जिम्मेदार है। अगर, कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए डायरेक्टर इंचार्ज और ईडी ही दोषी माने जाएंगे।











