- सूचनाजी.कॉम से बातचीत के दौरान 38 वर्षीय यशवंत कुमार देवांगन ने सुनाई परिवार के संघर्ष की कहानी।
अज़मत अली, भिलाई। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सीजीपीएससी 2024 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। तीसरी रैंक लाने वाले यशवंत कुमार देवांगन भिलाई स्टील प्लांट-बीएसपी में डिप्लोमा इंजीनियर हैं।
आइए जानते हैं डिप्टी कलेक्टर मनने वाले यशवंत कुमार देवांगन की कुंडली
सूचनाजी.कॉम से बातचीत के दौरान 38 वर्षीय यशवंत कुमार देवांगन ने बताया कि बीएसपी में 8 घंटे की नौकरी के बाद पूरा समय परिवार के लिए तय था। पढ़ाई में पूरा साथ पत्नी मोनिका का मिला। वह बीएसई और एमए अंग्रेजी से पढ़ाई की हैं। इसलिए मोनिका पत्नी, दोस्त और शिक्षक के रूप में यशवंत को आगे बढ़ाती रहीं। पढ़ाई में कहीं भी अटकते तो मोनिका समझाती।
कैंटीन में गपशप नहीं, पढ़ाई
बीएसपी में नौकरी करते हुए यशवंत ने पढ़ाई की। लंच टाइम और टी ब्रेक में किताबों से खेलते रहे। 10 मिनट का ब्रेक भी मिलता था तो रील देखने के बजाय मोबाइल पर पढ़ते रहते। किताबों को ज्यादा फॉलो करते। ड्यूटी में जाते थे तो साथ में किताब रखते। मोबाइल में पीडीएफ से पढ़ते रहते। समय को सही दिशा में लगाया।
टाइम पास वाले वीडियो के बजाय मोटिवेशनल वीडियो और सब्जेक्ट से जुड़ी जानकारी को देखते। कभी-कभी ऐसा भी होता था कि एक मिनट भी पढ़ाई का समय नहीं मिलता था, लेकिन इसकी भरपाई कई घंटों से कर लेते।
12वीं में थे, तभी पिता का साया उठा
कोरबा के मूल निवासी यशवंत देवांगन बताते हैं कि पिता स्वर्गीय भरत लाल देवांगन का निधन बीमारी से हो गया था। 12वीं में पढ़ाई कर रहे थे, तभी पिता का निधन हो गया था। 4 भाई और 1 बहन में सबसे छोटे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रही। बड़े भाइयों ने संभाला।
ग्रेज्युएट इंजीनियर बनना चाहते थे, आर्थिक स्थिति की वजह से डिप्लोमा ही किए। इसके बाद कोरबा में आर्यन ग्रुप एसीबी माइनिंग कंपनी में साढे 5 साल तक प्राइवेट नौकरी की। जिस दिन डिप्लोमा खत्म हुआ, उसी दिन ज्वाइन किया। 7 हजार रुपए में सैलरी रही।
भिलाई स्टील प्लांट में 2013 में आए
2013 में नौकरी छोड़ा तो 15 हजार मिलता था। 2013 में भिलाई स्टील प्लांट-बीएसपी में में आए। दो माह में रेल मिल में ट्रेनिंग की। इसके बाद ईआरएस पोस्टिंग दी गई।
हिम्मत नहीं हारी, दूसरे इंटरव्यू में तीसरा रैंक
2013 में बीएसपी आए। काफी खुश थे। डिप्लोमा की स्थिति और पद से संतुष्ट नहीं थे। इंजीनियरिंग एसोसिएट पद पर थे। कोशिश करने लगे। 2019 से सीजीपीएसई की तैयारियां शुरू की। जानने वालों का चयन होता देख, हौसला बढ़ता गया।
2019-20 से लगातार परीक्षा दे रहे थे। 4 बार प्री, मेंस लिखा। ये दूसरा इंटरव्यू था। 2022 में 164 रैंक आया था, लेकिन पद नहीं मिला था। 2023 में प्री नहीं निकल सका। उसी समय संकल्प लिया, एक साल के विराम का प्रयोग किया। संघर्ष करते गए। यह ठान लिया था कि दोबारा न यह दिन न देखना पड़े, इसलिए रिजल्ट लाना है। आखिरकार वह दिन आया और दूसरे इंटरव्यू में तीसरा रैंक प्राप्त हुआ।
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किसको-किसको श्रेय
बड़े भाई, बहन और पत्नी, विभाग प्रमुख, दोस्तो को श्रेय दिया है। यशवंत ने कहा-परिवार को श्रेय जाता है। 8 साल का बच्चा आर्यन देवांगन और पत्नी मोनिका देवांगन का पूरा साथ रहा।
इलेक्ट्रिकल रिपेयर शॉप-ईआरएस के विभाग प्रमुख से लेकर साथी भरपूर मदद करते रहे। सबको उम्मीद थी कि कामयाबी हासिल करूंगा। इसिए सब सहयोग करते रहे।















