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सीटू ने जारी किया मजदूर-किसान एकता रैली का पोस्टर, महंगाई पर मोदी सरकार को कोसा

14/03/2023 (Last updated: 09/10/2024) 1 minute read
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सूचनाजी न्यूज, भिलाई। हिंदुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन सीटू की कार्यकारिणी बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। 5 अप्रैल को दिल्ली में होने जा रही मजदूर-किसान एकता रैली का पोस्टर जारी किया गया। सीटू नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूरों एवं किसानों पर लगातार किए जा रहे हमलों के खिलाफ दिल्ली में यह रैली आयोजित है, जिसमें भिलाई इस्पात संयंत्र एवं राजहरा माइंस में कार्यरत सैकड़ों मजदूर भाग लेंगे।

चारों श्रम संहिताओं को वापस करवाने के लिए जारी है संघर्ष

महामंत्री जेपी त्रिवेदी ने कहा कि मौजूदा सरकार केंद्र में सत्तासीन होते ही सबसे पहले श्रमिकों के लिए बने हुए 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताओं को बनाने का काम किया है। ज्ञात हो कि यह अलग-अलग श्रम कानून देश में विभिन्न सेक्टरों अथवा व्यवसाय में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए अलग-अलग थे।

अर्थात सार्वजनिक उद्योगों में काम करने वाले मजदूर निजी उद्योगों में काम करने वाले मजदूर बीड़ी बनाने वाले मजदूर मछली पालन से जुड़े हुए मजदूर निर्माण क्षेत्र से जुड़े हुए मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर सहित विभिन्न किस्म के मजदूरों के लिए उनके काम एवं परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग श्रम कानून थे, जो उनके अधिकारों की रक्षा करते थे।

किंतु केंद्र सरकार ने उन कानूनों को बदल कर कॉर्पोरेट परस्त 4 श्रम संहिताओं को तैयार किया। यह श्रम सहिताएं मजदूरों के शोषण बढ़ाने एवं मालिकों को संरक्षण देने का कार्य कर रहा है, जिसको वापस करवाने के लिए संघर्ष जारी है।

26000 न्यूनतम मजदूरी के लिए लड़ रही है सीटू

सहायक महासचिव टी.जोगा राव ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी तय करने का एक वैज्ञानिक फार्मूला है जिसके तहत दो व्यस्कों एवं दो बच्चों वाले एक मजदूर परिवार के लिए प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम से कम 27 कैलोरीज प्रदान करने वाला भोजन, प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति कम से कम 18 गज कपड़ा, निम्न आय वर्ग के लिए सरकारी औद्योगिक आवास योजना के लिए वाले किराए के आधार पर आवास का प्रावधान, ईंधन, बिजली, विविध खर्चों के मध्य में कुल न्यूनतम वेतन का 20% तथा सुप्रीम कोर्ट के 1996 के फैसले के तहत शिक्षा,चिकित्सकीय खर्च, मनोरंजन व वृद्धावस्था तथा शादी के खर्च के मद में अतिरिक्त 25 प्रतिशत का प्रावधान भी न्यूनतम वेतन में निर्धारित किया जाना है। इस तरह न्यूनतम वेतन 26000 प्रति माह होना चाहिए।

एमएसपी की कानूनी गारंटी कर किसानों का कर्जा माफ करो

उपाध्यक्ष डीवीएस रेड्‌डी ने कहा कि 5 अप्रैल को दिल्ली में आयोजित होने जा रही मजदूर किसान रैली इस मांग को पूरे ताकत के साथ सरकार के सामने रख रही है कि स्वामीनाथन समिति के अनुसार फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की कानूनी गारंटी किया जाना चाहिए, जिसके तहत खेती में किसानों द्वारा बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, किराए पर श्रम, किराया पर मशीनरी हेतु किया गया खर्च के साथ- साथ अवैतनिक पारिवारिक श्रम की लागत, जमीन की मूल्य का हिस्सा और निश्चित पूंजी पर ब्याज को शामिल कर उस पूरे लागत पर 50% लाभ जोड़ते हुए जो मूल्य आता है उसे उस फसल का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जाना है साथ ही साथ किसानों का कर्जा माफ करने की मांग रखी गई है।

मनरेगा में 600 रोजी के साथ 200 दिन का काम दो

अध्यक्ष विजय जांगड़े ने कहा कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा काम देने का दावा करने वाली सरकार लगातार मनरेगा की बजट को कम कर रही है, जिसका नतीजा यह हुआ है कि इस साल मनरेगा के लिए आवंटित बजट से ग्रामीण मजदूरों को 40 दिन कभी काम नहीं दिया जा सकेगा।

जबकि सीटू मांग करता रहा है कि ग्रामीण मजदूरों की स्थिति सुधारने के लिए साल में कम से कम 200 दिन का रोजगार देने की व्यवस्था की जानी चाहिए साथ ही साथ उनकी प्रतिदिन की रोजी 600 होना चाहिए।

महंगाई पर रोक लगाओ

सहायक महासचिव एसएसके पनिकर ने कहा कि 5 अप्रैल को होने वाली यह रैली महंगाई पर रोक लगाने की मांग करता है। मौजूदा सरकार जब केंद्र में सत्तासीन हुई थी, तब उसने 100 दिनों में महंगाई कम करने की बात कही थी। उस समय जहां गैस सिलेंडर 400, पेट्रोल 60 रुपए लीटर था।

वहीं, खाद्यान्न सामग्री के कीमत भी आज के कीमतों की तुलना में 40% नीचे थी। मोदी सरकार के नीतियों के चलते लगातार महंगाई बढ़ती गई और स्थितियां बद से बदतर हो गई। अब जनता इनके दिखाए हुए अच्छे दिनों के ख्वाब की तुलना करते हुए पुराने दिनों को ही लौटाने की मांग कर रहा है।

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