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खर्च का बहाना बनाकर सेक्टर 9 हॉस्पिटल बेचने की साजिश, CITU करेगा जन लामबंदी, मंत्रालय तक भेजेगा सुझाव

Azmat ali 26/04/2026 1 minute read
Conspiracy to Sell Sector 9 Hospital Under the Pretext of Cost CITU to Mobilize Public and Send Suggestions to the Ministry (1)

सीटू साजिश के खिलाफ सभी ट्रेड यूनियनों, ऑफिसर एसोसिएशन, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ जन लामबंदी करेगा।

  • 850 बिस्तर का सेक्टर 9 अस्पताल है। हर बेड तक ऑक्सीजन की सुविधा। अस्पताल का अपना ऑक्सीजन प्लांट भी है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट के सेक्टर 9 हॉस्पिटल को बचाने की मुहिम पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू चलाने जा रही है। जन लामबंदी का अभियान चलाया जाएगा। पिछले वर्ष डिलाइट कंसल्टेंसी भिलाई इस्पात संयंत्र के सेक्टर-9 अस्पताल का दौरा करने आई थी और अस्पताल को निजी हाथों में देने संबंधी अपना परामर्श देकर चली गई। तब से लेकर अब तक किसी न किसी रूप में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र (सेक्टर-9 अस्पताल) को बेचने की साजिश जारी है।

अब इस साजिश को आगे बढ़ाने के लिए अस्पताल पर हर माह हो रहे खर्च को आधार बनाया जा रहा है। दिल्ली से यह कहा जा रहा है कि अस्पताल पर हर महीने 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहा है, जिससे घाटा हो रहा है, इसलिए इसे निजी हाथों में सौंप देना चाहिए।

सीटू इस साजिश के खिलाफ सभी ट्रेड यूनियनों, ऑफिसर एसोसिएशन, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जन लामबंदी करेगा।

अस्पताल को लाभ में लाने के लिए सीटू देता रहा है सुझाव

अस्पताल को “नो प्रॉफिट-नो लॉस” के आधार पर चलाने के लिए सीटू पहले भी इसे मेडिकल कॉलेज अथवा पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में बदलने का सुझाव दे चुका है। वर्तमान में सेक्टर-9 अस्पताल में डीएनबी कोर्स संचालित हो रहा है, जिसमें लगभग सभी विभागों में एमबीबीएस डॉक्टर डीएनबी की पढ़ाई के साथ मरीजों का उपचार कर रहे हैं। यदि इसे पूर्ण रूप से पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में परिवर्तित किया जाता है, तो यहाँ प्रोफेसरों की नियुक्ति होगी और अधिक मेडिकल विद्यार्थी आएंगे, जिससे अस्पताल और सशक्त रूप से संचालित किया जा सकेगा।

इलाज महंगा कर निजी मरीजों को दूर किया गया अस्पताल से

सीटू नेताओं का कहना है कि अस्पताल से निजी (नॉन-बीएसपी) मरीजों को दूर करने के उद्देश्य से आपातकालीन सेवाओं, ओपीडी, आईपीडी, आईसीयू और मेडिकल जांचों की दरों में अत्यधिक वृद्धि की गई।
इसके कारण बाहरी मरीजों का आना धीरे-धीरे कम हो गया और उनसे होने वाली आय में गिरावट आई। सीटू इन दरों का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही अस्पताल तथा संयंत्र प्रबंधन के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत करेगा।

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है सेक्टर-9 अस्पताल
सेक्टर-9 अस्पताल में कई अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, जो भिलाई ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के बड़े अस्पतालों में भी दुर्लभ हैं। जिनमे 3 टेस्ला एमआरआई मशीन, कैंसर जांच उपकरण, विभिन्न प्रकार की ब्लड जांच मशीनें और सीटी स्कैन मशीन प्रमुख हैं। अस्पताल में पुरानी बिल्डिंग के साथ सात मंजिला नई इमारत, आधुनिक बर्न यूनिट, सुसज्जित ऑपरेशन थिएटर, नवजात शिशु इकाई (नियोनेटल यूनिट), आधुनिक ब्लड बैंक, आईसीयू, कैथ लैब, चेस्ट वार्ड, मनोरोग वार्ड और कैंसर यूनिट उपलब्ध हैं। अस्पताल में 850 बिस्तर हैं और प्रत्येक बिस्तर तक ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए अस्पताल का अपना ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित है, जिसकी सराहना निजी अस्पताल भी करते हैं।

जानबूझकर लगाया गया डॉक्टरों की भर्ती पर रोक
सीटू का आरोप है कि कॉरपोरेट कार्यालय द्वारा डॉक्टरों की भर्ती पर जानबूझकर रोक लगाई गई है। कभी-कभार भर्ती के लिए विज्ञापन जारी भी होता है, तो उसमें अनुबंध की शर्तें और वेतन पैकेज ऐसे होते हैं कि योग्य डॉक्टर आकर्षित नहीं होते। जो डॉक्टर आते भी हैं वे बाद में आने की बात करके छुट्टी लेकर जाते है एवं वापस नहीं लौटते। इसी क्रम में हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में एक महिला डॉक्टर की भर्ती की गई, लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति देने के बजाय संविदा पर रखकर इतना परेशान किया गया कि वे नौकरी छोड़कर चली गईं।

बीएसपी के स्थाई एवं सेवानिवृत्ति कर्मियों के इलाज के लिए जरूरी है संयंत्र का अस्पताल
सीटू ने कहा कि संयंत्र में 30 वर्षों की सेवा के दौरान अधिकांश कर्मी लगभग 10 वर्षों तक ‘सी शिफ्ट’ में काम करते हैं, जिससे उन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिलती और कई प्रकार की व्यावसायिक बीमारियाँ हो जाती हैं। इसलिए नौकरी के दौरान और सेवानिवृत्ति के बाद भी अस्पताल की आवश्यकता बनी रहती है।

इस कारण सेक्टर-9 अस्पताल का संयंत्र के अधीन रहना अत्यंत आवश्यक है। यदि अस्पताल को बेचने की कोशिश की गई, तो कर्मी इसका पुरजोर विरोध करेंगे और इसका समर्थन करने वालों को कभी माफ नहीं करेंगे।

अब भी लोगों का भरोसा कायम

प्रबंधन द्वारा दरें बढ़ाए जाने के बावजूद जहाँ निजी मरीजों की संख्या घटी है, वहीं स्थायी और सेवानिवृत्त कर्मियों के कारण अस्पताल में 24×7 भीड़ बनी रहती है। वाहन स्टैंड से लेकर कैजुअल्टी, वार्ड और ओपीडी तक हर जगह मरीजों की भीड़ देखी जा सकती है। यह स्पष्ट करता है कि सेक्टर-9 अस्पताल पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है। ऐसे अस्पताल को बेचने के बारे में सोचना भिलाईवासियों के साथ विश्वासघात होगा।

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